ताहा · 12/135
अनुवाद उच्चारण — सूरा ताहा
إِنِّي أَنَا رَبُّكَ فَاخْلَعْ نَعْلَيْكَ ۖ إِنَّكَ بِالْوَادِ الْمُقَدَّسِ طُوًى ۝١٢
Inneee Ana Rabbuka fakhla` na`laika innaka bilwaadil muqaddasi Tuwaa
📖 हिंदी अर्थ
कि ऐ मूसा बेशक मैं ही तुम्हारा परवरदिगार हूँ तो तुम अपनी जूतियाँ उतार डालो क्योंकि तुम (इस वक्त) तुआ (नामी) पाक़ीज़ा चटियल मैदान में हो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَاخْلَعْ نَعْلَيْكَ: अपने जूते उतार दो।
  • الْوَادِ الْمُقَدَّسِ: वह घाटी जो पवित्र और बरकत वाली है।
  • طُوًى: उस घाटी का नाम, जिसे अल्लाह ने बरकत दी थी।

तफसीर (व्याख्या):

जब मूसा (अलैहिस्सलाम) ने उस आग को देखा और उसकी ओर बढ़े, तो अल्लाह तआला ने उन्हें पुकारा और फरमाया: "ऐ मूसा! मैं ही तेरा रब हूँ।" यह एक बहुत बड़ा सम्मान और करीबी रिश्ते का इज़हार था। अल्लाह ने उन्हें अपने जूते उतारने का हुक्म दिया, क्योंकि वे जानवर की खाल के बने हुए थे और पवित्र स्थान की ताज़ीम (अदब) के लिए उन्हें उतारना ज़रूरी था। यह उस पवित्र घाटी "तुवा" में खड़े होने की तैयारी थी, जिसे अल्लाह ने अपनी बरकत और पाकीज़गी से नवाज़ा था। यहाँ मूसा (अलैहिस्सलाम) को अपने रब से सीधे मुख़ातिब होने का शरफ़ हासिल हुआ, और यह उनके नबुव्वत के मिशन की शुरुआत थी।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह से मुलाक़ात और उसकी इबादत के लिए पवित्रता और अदब बेहद ज़रूरी है। जिस तरह मूसा (अलैहिस्सलाम) को अपने जूते उतारने का हुक्म दिया गया, उसी तरह हमें भी अपने दिलों को गुनाहों से पाक करके अल्लाह के सामने हाज़िर होना चाहिए। अल्लाह अपने बंदों से मुहब्बत करता है और उन्हें अपनी रहमत और बरकत से नवाज़ता है। यह वाक़िया हमें बताता है कि अल्लाह का क़ुरब (नज़दीकी) पाने के लिए सिर्फ़ ज़ाहिरी पाकीज़गी ही नहीं, बल्कि बातिनी (अंदरूनी) पाकीज़गी भी ज़रूरी है। आइए, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह के हुक्मों के मुताबिक ढालें और उसकी रहमत के हक़दार बनें।



📜 आयत 10-14 — सूरा ताहा

10إِذْ رَأَىٰ نَارًا فَقَالَ لِأَهْلِهِ امْكُثُوا إِنِّي آنَسْتُ نَارًا لَّعَلِّي آتِيكُم مِّنْهَا بِقَبَسٍ أَوْ أَجِدُ عَلَى النَّارِ هُدًى
तो अपने घर के लोगों से कहने लगे कि तुम लोग (ज़रा यहीं) ठहरो मैंने आग देखी है क्या अजब है कि मैं वहाँ (जाकर) उसमें से एक अंगारा तुम्हारे पास ले आऊँ या आग के पास किसी राह का पता पा जाऊँ
11فَلَمَّا أَتَاهَا نُودِيَ يَا مُوسَىٰ
फिर जब मूसा आग के पास आए तो उन्हें आवाज आई
12إِنِّي أَنَا رَبُّكَ فَاخْلَعْ نَعْلَيْكَ ۖ إِنَّكَ بِالْوَادِ الْمُقَدَّسِ طُوًى
कि ऐ मूसा बेशक मैं ही तुम्हारा परवरदिगार हूँ तो तुम अपनी जूतियाँ उतार डालो क्योंकि तुम (इस वक्त) तुआ (नामी) पाक़ीज़ा चटियल मैदान में हो
13وَأَنَا اخْتَرْتُكَ فَاسْتَمِعْ لِمَا يُوحَىٰ
और मैंने तुमको पैग़म्बरी के वास्ते मुन्तख़िब किया (चुन लिया) है तो जो कुछ तुम्हारी तरफ़ वही की जाती है उसे कान लगा कर सुनो
14إِنَّنِي أَنَا اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنَا فَاعْبُدْنِي وَأَقِمِ الصَّلَاةَ لِذِكْرِي
इसमें शक नहीं कि मैं ही वह अल्लाह हूँ कि मेरे सिवा कोई माबूद नहीं तो मेरी ही इबादत करो और मेरी याद के लिए नमाज़ बराबर पढ़ा करो
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीअवतरण स्थान
12आयत

अनुवाद — ताहा 12

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Friday, October 2, 2026

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