अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَعْرَضَ – मुँह मोड़ा, पीठ फेरी
- ذِكْرِي – मेरी याद, मेरा ज़िक्र (यहाँ अर्थ: क़ुरआन और नबी की शिक्षाएँ)
- مَعِيشَةً ضَنكًا – तंग और कष्टदायक जीवन, सकरी गुज़ारा
- نَحْشُرُهُ – हम उसे उठाएँगे, इकट्ठा करेंगे
- أَعْمَى – अंधा (आँखों से और तर्क-प्रमाण से)
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में बताते हैं कि जो व्यक्ति मेरे ज़िक्र से — यानी क़ुरआन और मेरी नसीहत से — मुँह मोड़ता है, मेरी याद को ठुकराता है और उस पर अमल नहीं करता, उसके लिए दुनिया में भी जीवन तंग और कष्टदायक हो जाता है। भले ही वह बाहर से खुशहाल और आरामदेह दिखे, लेकिन उसका दिल बेचैन रहता है, उसे सुकून नहीं मिलता। उसकी ज़िंदगी में बरकत नहीं होती, और उसकी कमाई में भी खैर नहीं रहती। यही नहीं, बरज़ख़ (क़ब्र) में भी उसका जीवन तंग किया जाएगा और उसे अज़ाब दिया जाएगा।
फिर क़ियामत के दिन उसे इस हालत में उठाया जाएगा कि वह अंधा होगा — आँखों से भी अंधा और हुज्जत (तर्क-प्रमाण) से भी अंधा। यानी उसके पास कोई दलील नहीं होगी, कोई जवाब नहीं होगा, और वह अपने रब को देखने से भी महरूम रहेगा। यह उसकी उसी आज़ादी और सरकशी का नतीजा होगा जो उसने दुनिया में अल्लाह की याद से मुँह मोड़कर किया था।
दावती पहलू (नसीहत):
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की याद ही असली सुकून का ज़रिया है। जो दिल अल्लाह से जुड़ा होता है, उसे दुनिया की तंगी में भी फराग़त मिलती है। और जो अल्लाह से कट जाता है, उसे दुनिया की फराखी में भी तंगी महसूस होती है। प्यारे भाइयो और बहनो! क़ुरआन को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाइए, उसे पढ़िए, समझिए और उस पर अमल कीजिए। यही वह रास्ता है जो दुनिया में सुकून, क़ब्र में रोशनी और क़ियामत के दिन आँखों की बीनाई और हुज्जत की कामयाबी देगा। अल्लाह हम सबको अपने ज़िक्र पर क़ायम रखे। आमीन।
📜 आयत 122-126 — ताहा
अनुवाद — ताहा 124
सूरा ताहा आयत 124 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिस शख्स ने मेरी याद से मुँह फेरा तो…सूरा आयत 124/135 — ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ताहा सुनें, ताहा अनुवाद, ताहा mp3, ताहा pdf. आयत 122–126. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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