ताहा · 124/135
अनुवाद उच्चारण — सूरा ताहा
وَمَنْ أَعْرَضَ عَن ذِكْرِي فَإِنَّ لَهُ مَعِيشَةً ضَنكًا وَنَحْشُرُهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ أَعْمَىٰ ۝١٢٤
Wa man a`rada `an Zikree fa inna lahoo ma`eeshatan dankanw wa nahshuruhoo Yawmal Qiyaamati a`maa
📖 हिंदी अर्थ
और जिस शख्स ने मेरी याद से मुँह फेरा तो उसकी ज़िन्दगी बहुत तंगी में बसर होगी और हम उसको क़यामत के दिन अंधा बना के उठाएँगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَعْرَضَ – मुँह मोड़ा, पीठ फेरी
  • ذِكْرِي – मेरी याद, मेरा ज़िक्र (यहाँ अर्थ: क़ुरआन और नबी की शिक्षाएँ)
  • مَعِيشَةً ضَنكًا – तंग और कष्टदायक जीवन, सकरी गुज़ारा
  • نَحْشُرُهُ – हम उसे उठाएँगे, इकट्ठा करेंगे
  • أَعْمَى – अंधा (आँखों से और तर्क-प्रमाण से)

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में बताते हैं कि जो व्यक्ति मेरे ज़िक्र से — यानी क़ुरआन और मेरी नसीहत से — मुँह मोड़ता है, मेरी याद को ठुकराता है और उस पर अमल नहीं करता, उसके लिए दुनिया में भी जीवन तंग और कष्टदायक हो जाता है। भले ही वह बाहर से खुशहाल और आरामदेह दिखे, लेकिन उसका दिल बेचैन रहता है, उसे सुकून नहीं मिलता। उसकी ज़िंदगी में बरकत नहीं होती, और उसकी कमाई में भी खैर नहीं रहती। यही नहीं, बरज़ख़ (क़ब्र) में भी उसका जीवन तंग किया जाएगा और उसे अज़ाब दिया जाएगा।

फिर क़ियामत के दिन उसे इस हालत में उठाया जाएगा कि वह अंधा होगा — आँखों से भी अंधा और हुज्जत (तर्क-प्रमाण) से भी अंधा। यानी उसके पास कोई दलील नहीं होगी, कोई जवाब नहीं होगा, और वह अपने रब को देखने से भी महरूम रहेगा। यह उसकी उसी आज़ादी और सरकशी का नतीजा होगा जो उसने दुनिया में अल्लाह की याद से मुँह मोड़कर किया था।


दावती पहलू (नसीहत):

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की याद ही असली सुकून का ज़रिया है। जो दिल अल्लाह से जुड़ा होता है, उसे दुनिया की तंगी में भी फराग़त मिलती है। और जो अल्लाह से कट जाता है, उसे दुनिया की फराखी में भी तंगी महसूस होती है। प्यारे भाइयो और बहनो! क़ुरआन को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाइए, उसे पढ़िए, समझिए और उस पर अमल कीजिए। यही वह रास्ता है जो दुनिया में सुकून, क़ब्र में रोशनी और क़ियामत के दिन आँखों की बीनाई और हुज्जत की कामयाबी देगा। अल्लाह हम सबको अपने ज़िक्र पर क़ायम रखे। आमीन।



📜 आयत 122-126 — सूरा ताहा

122ثُمَّ اجْتَبَاهُ رَبُّهُ فَتَابَ عَلَيْهِ وَهَدَىٰ
तो (राहे सवाब से) बेराह हो गए इसके बाद उनके परवरदिगार ने बर गुज़ीदा किया
123قَالَ اهْبِطَا مِنْهَا جَمِيعًا ۖ بَعْضُكُمْ لِبَعْضٍ عَدُوٌّ ۖ فَإِمَّا يَأْتِيَنَّكُم مِّنِّي هُدًى فَمَنِ اتَّبَعَ هُدَايَ فَلَا يَضِلُّ وَلَا يَشْقَىٰ
फिर उनकी तौबा कुबूल की और उनकी हिदायत की फरमाया कि तुम दोनों बेहश्त से नीचे उतर जाओ तुम में से एक का एक दुशमन है फिर अगर तुम्हारे पास मेरी तरफ से हिदायत पहुँचे तो (तुम) उसकी पैरवी करना क्योंकि जो शख्स मेरी हिदायत पर चलेगा न तो गुमराह होगा और न मुसीबत में फँसेगा
124وَمَنْ أَعْرَضَ عَن ذِكْرِي فَإِنَّ لَهُ مَعِيشَةً ضَنكًا وَنَحْشُرُهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ أَعْمَىٰ
और जिस शख्स ने मेरी याद से मुँह फेरा तो उसकी ज़िन्दगी बहुत तंगी में बसर होगी और हम उसको क़यामत के दिन अंधा बना के उठाएँगे
125قَالَ رَبِّ لِمَ حَشَرْتَنِي أَعْمَىٰ وَقَدْ كُنتُ بَصِيرًا
वह कहेगा इलाही मैं तो (दुनिया में) ऑंख वाला था तूने मुझे अन्धा करके क्यों उठाया
126قَالَ كَذَٰلِكَ أَتَتْكَ آيَاتُنَا فَنَسِيتَهَا ۖ وَكَذَٰلِكَ الْيَوْمَ تُنسَىٰ
खुदा फरमाएगा ऐसा ही (होना चाहिए) हमारी आयतें भी तो तेरे पास आई तो तू उन्हें भुला बैठा और इसी तरह आज तू भी भूला दिया जाएगा
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीअवतरण स्थान
124आयत

अनुवाद — ताहा 124

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Thursday, October 1, 2026

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