ताहा · 123/135
अनुवाद उच्चारण — ताहा
قَالَ اهْبِطَا مِنْهَا جَمِيعًا ۖ بَعْضُكُمْ لِبَعْضٍ عَدُوٌّ ۖ فَإِمَّا يَأْتِيَنَّكُم مِّنِّي هُدًى فَمَنِ اتَّبَعَ هُدَايَ فَلَا يَضِلُّ وَلَا يَشْقَىٰ ۝١٢٣
Qaalah bita minhaa jamee`am ba`dukum liba`din `aduww; fa immaa yaati yannakum minnee hudan famanit taba`a hudaaya falaa yadillu wa laa yashhqaa
📖 हिंदी अर्थ
फिर उनकी तौबा कुबूल की और उनकी हिदायत की फरमाया कि तुम दोनों बेहश्त से नीचे उतर जाओ तुम में से एक का एक दुशमन है फिर अगर तुम्हारे पास मेरी तरफ से हिदायत पहुँचे तो (तुम) उसकी पैरवी करना क्योंकि जो शख्स मेरी हिदायत पर चलेगा न तो गुमराह होगा और न मुसीबत में फँसेगा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اهْبِطَا: तुम दोनों उतरो / नीचे जाओ
  • جَمِيعًا: एक साथ, सब मिलकर
  • عَدُوٌّ: शत्रु
  • هُدًى: मार्गदर्शन, सीधा रास्ता
  • يَضِلُّ: भटक जाए
  • يَشْقَى: दुखी हो, तकलीफ में पड़े

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने हज़रत आदम और हज़रत हव्वा (अलैहिमास्सलाम) को आदेश दिया कि तुम दोनों जन्नत से नीचे उतरो, और साथ ही शैतान भी तुम्हारे साथ उतरेगा। अल्लाह ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब से तुम्हारे और शैतान के बीच खुली दुश्मनी है—वह तुम्हारा शत्रु है और तुम उसके शत्रु हो। यह दुश्मनी क़ियामत तक जारी रहेगी। यह कोई साधारण दुश्मनी नहीं, बल्कि वह दुश्मनी है जो इंसान को उसके रब से दूर करने की कोशिश करती है, उसे गुमराह करने की ताक में रहती है।

इसके बाद अल्लाह तआला ने सबसे बड़ी रहमत और मेहरबानी का ज़रिया बताया—उसने फ़रमाया: "जब मेरी तरफ से तुम्हारे पास हिदायत (मार्गदर्शन) आए—और यह हिदायत मेरे रसूलों और मेरी किताबों के ज़रिए आएगी—तो जो कोई मेरी इस हिदायत का पालन करेगा, वह दुनिया में न भटकेगा और न आख़िरत में दुखी होगा।"

यानी जो इंसान अल्लाह की भेजी हुई हिदायत को थाम लेता है, उसके लिए दो बड़ी गारंटियाँ हैं: पहली—दुनिया में वह गुमराही से बचा रहेगा, उसका दिल सही रास्ते पर चलेगा, उसके फैसले सही होंगे और उसकी ज़िंदगी सुकून वाले रास्ते पर चलेगी। दूसरी—आख़िरत में उसे अल्लाह की पकड़ और अज़ाब से बचाया जाएगा, वह जन्नत में दाखिल होगा और हमेशा की खुशियाँ पाएगा।

इस आयत में अल्लाह तआला ने इंसान को बताया कि असली कामयाबी और खुशी का रास्ता सिर्फ़ एक है—अल्लाह की हिदायत का पालन करना। जो इस रास्ते पर चलेगा, उसे कभी पछतावा नहीं होगा। और जो इससे मुँह मोड़ेगा, वह दुनिया में भी भटकेगा और आख़िरत में भी नाकाम होगा।

यह अल्लाह की असीम रहमत है कि उसने इंसान को अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि उसे रास्ता दिखाने के लिए नबी भेजे, किताबें उतारीं और हिदायत का ज़रिया मुहैया किया। अब फैसला इंसान के हाथ में है—वह चाहे तो अल्लाह की हिदायत अपनाकर दोनों जहान की कामयाबी हासिल करे, या शैतान के पीछे चलकर दोनों जगह नुक़सान उठाए।

आओ, हम सब इस हिदायत को थामें, क़ुरआन और सुन्नत पर अमल करें, और उस वादे पर भरोसा रखें जो अल्लाह ने हमसे किया है—कि जो मेरी हिदायत पर चलेगा, वह न भटकेगा और न दुखी होगा। यही सच्ची कामयाबी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 121-125 — ताहा

121فَأَكَلَا مِنْهَا فَبَدَتْ لَهُمَا سَوْآتُهُمَا وَطَفِقَا يَخْصِفَانِ عَلَيْهِمَا مِن وَرَقِ الْجَنَّةِ ۚ وَعَصَىٰ آدَمُ رَبَّهُ فَغَوَىٰ
चुनान्चे दोनों मियाँ बीबी ने उसी में से कुछ खाया तो उनका आगा पीछा उनपर ज़ाहिर हो गया और दोनों बेहिश्त के (दरख्त के) पत्ते अपने आगे पीछे पर चिपकाने लगे और आदम ने अपने परवरदिगार की नाफ़रमानी की
122ثُمَّ اجْتَبَاهُ رَبُّهُ فَتَابَ عَلَيْهِ وَهَدَىٰ
तो (राहे सवाब से) बेराह हो गए इसके बाद उनके परवरदिगार ने बर गुज़ीदा किया
123قَالَ اهْبِطَا مِنْهَا جَمِيعًا ۖ بَعْضُكُمْ لِبَعْضٍ عَدُوٌّ ۖ فَإِمَّا يَأْتِيَنَّكُم مِّنِّي هُدًى فَمَنِ اتَّبَعَ هُدَايَ فَلَا يَضِلُّ وَلَا يَشْقَىٰ
फिर उनकी तौबा कुबूल की और उनकी हिदायत की फरमाया कि तुम दोनों बेहश्त से नीचे उतर जाओ तुम में से एक का एक दुशमन है फिर अगर तुम्हारे पास मेरी तरफ से हिदायत पहुँचे तो (तुम) उसकी पैरवी करना क्योंकि जो शख्स मेरी हिदायत पर चलेगा न तो गुमराह होगा और न मुसीबत में फँसेगा
124وَمَنْ أَعْرَضَ عَن ذِكْرِي فَإِنَّ لَهُ مَعِيشَةً ضَنكًا وَنَحْشُرُهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ أَعْمَىٰ
और जिस शख्स ने मेरी याद से मुँह फेरा तो उसकी ज़िन्दगी बहुत तंगी में बसर होगी और हम उसको क़यामत के दिन अंधा बना के उठाएँगे
125قَالَ رَبِّ لِمَ حَشَرْتَنِي أَعْمَىٰ وَقَدْ كُنتُ بَصِيرًا
वह कहेगा इलाही मैं तो (दुनिया में) ऑंख वाला था तूने मुझे अन्धा करके क्यों उठाया
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीRevelation
123आयत

अनुवाद — ताहा 123

सूरा ताहा आयत 123 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर उनकी तौबा कुबूल की और उनकी हिदायत की फरमाया…

सूरा आयत 123/135 — ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ताहा सुनें, ताहा अनुवाद, ताहा mp3, ताहा pdf. आयत 121–125. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए