Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَوْلَا – क्यों नहीं / क्यों न आता
- بِآيَةٍ – कोई निशानी या चमत्कार
- بَيِّنَةُ – स्पष्ट प्रमाण / खुला सबूत
- الصُّحُفِ الْأُولَى – पिछली किताबें (तौरात, ज़बूर, इंजील आदि)
तफ़सीर:
ये आयत उन काफ़िरों के उस क़ौल का जवाब दे रही है, जो नबी करीम ﷺ से कहते थे कि "ये नबी हमारे पास अपने रब की तरफ़ से कोई निशानी (चमत्कार) क्यों नहीं लाते?" वे माँग कर रहे थे कि जैसे मूसा (अलैहिस्सलाम) को असा (लाठी) और यद-ए-बैज़ा (चमकता हाथ) जैसे मौजिज़े दिए गए, ईसा (अलैहिस्सलाम) को मुर्दों को ज़िंदा करने जैसे मौजिज़े दिए गए, वैसे ही मुहम्मद ﷺ भी कोई ऐसा ज़ाहिर चमत्कार दिखाएँ।
अल्लाह तआला उनकी इस बेजा माँग का जवाब देते हुए फ़रमाता है: "क्या उनके पास वो स्पष्ट प्रमाण नहीं आया जो पिछली किताबों में मौजूद है?" यानी ये क़ुरआन-ए-करीम ही उनके लिए सबसे बड़ी निशानी है, क्योंकि ये उन सब किताबों की तस्दीक़ करता है जो पहले आ चुकी थीं। ये किताबें उन अगली उम्मतों के हालात बयान करती हैं जिन्होंने अपने नबियों से चमत्कार माँगे, चमत्कार आए, लेकिन फिर भी उन्होंने ईमान नहीं लाया और अल्लाह के अज़ाब में गिरफ्तार हो गए।
तो क्या इन काफ़िरों को ये क़ुरआन काफ़ी नहीं, जो उन्हें पिछली उम्मतों के अंजाम से आगाह करता है? ये क़ुरआन खुद एक ज़िंदा मौजिज़ा है — इसकी फ़साहत, बलाग़त, इल्मी हक़ाइक़ और पेशनगोइयाँ (भविष्यवाणियाँ) इस बात का सबूत हैं कि ये अल्लाह का कलाम है।
प्यारे भाइयो और बहनो! ये आयत हमें सिखाती है कि हिदायत के लिए चमत्कारों का इंतज़ार करना ज़रूरी नहीं। अल्लाह ने हमें क़ुरआन जैसी अज़ीम नेमत दी है — जो हर ज़माने के लिए रहनुमा है। जो शख्स सच्चे दिल से क़ुरआन को पढ़े और समझे, उसके लिए ये किताब काफी है। ये वही किताब है जो हमें ज़िंदगी का सही रास्ता दिखाती है, और जो इस पर अमल करे, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होता है।
आइए हम क़ुरआन को सिर्फ़ पढ़ने तक ही सीमित न रखें, बल्कि उस पर अमल करें और उसे अपनी ज़िंदगी में उतारें। यही हमारी सबसे बड़ी कामयाबी है।
📜 आयत 131-135 — सूरा ताहा
अनुवाद — ताहा 133
सूरा ताहा आयत 133 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (अहले मक्का) कहते हैं कि अपने परवरदिगार की तरफ…सूरा आयत 133/135 — सूरा ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ताहा सुनें, सूरा ताहा अनुवाद, सूरा ताहा mp3, सूरा ताहा pdf. आयत 131–135. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा ताहा
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


