ताहा · 133/135
अनुवाद उच्चारण — सूरा ताहा
وَقَالُوا لَوْلَا يَأْتِينَا بِآيَةٍ مِّن رَّبِّهِ ۚ أَوَلَمْ تَأْتِهِم بَيِّنَةُ مَا فِي الصُّحُفِ الْأُولَىٰ ۝١٣٣
Wa qaaloo law laa yaateenaa bi Aayatim mmir Rabbih; awalam taatihim baiyinatu maa fis suhufil oolaa
📖 हिंदी अर्थ
और (अहले मक्का) कहते हैं कि अपने परवरदिगार की तरफ से हमारे पास कोई मौजिज़ा हमारी मर्ज़ी के मुवाफिक़ क्यों नहीं लाते तो क्या जो (पेशीव गोइयाँ) अगली किताबों (तौरेत, इन्जील) में (इसकी) गवाह हैं वह भी उनके पास नहीं पहुँची

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لَوْلَا – क्यों नहीं / क्यों न आता
  • بِآيَةٍ – कोई निशानी या चमत्कार
  • بَيِّنَةُ – स्पष्ट प्रमाण / खुला सबूत
  • الصُّحُفِ الْأُولَى – पिछली किताबें (तौरात, ज़बूर, इंजील आदि)

तफ़सीर:

ये आयत उन काफ़िरों के उस क़ौल का जवाब दे रही है, जो नबी करीम ﷺ से कहते थे कि "ये नबी हमारे पास अपने रब की तरफ़ से कोई निशानी (चमत्कार) क्यों नहीं लाते?" वे माँग कर रहे थे कि जैसे मूसा (अलैहिस्सलाम) को असा (लाठी) और यद-ए-बैज़ा (चमकता हाथ) जैसे मौजिज़े दिए गए, ईसा (अलैहिस्सलाम) को मुर्दों को ज़िंदा करने जैसे मौजिज़े दिए गए, वैसे ही मुहम्मद ﷺ भी कोई ऐसा ज़ाहिर चमत्कार दिखाएँ।

अल्लाह तआला उनकी इस बेजा माँग का जवाब देते हुए फ़रमाता है: "क्या उनके पास वो स्पष्ट प्रमाण नहीं आया जो पिछली किताबों में मौजूद है?" यानी ये क़ुरआन-ए-करीम ही उनके लिए सबसे बड़ी निशानी है, क्योंकि ये उन सब किताबों की तस्दीक़ करता है जो पहले आ चुकी थीं। ये किताबें उन अगली उम्मतों के हालात बयान करती हैं जिन्होंने अपने नबियों से चमत्कार माँगे, चमत्कार आए, लेकिन फिर भी उन्होंने ईमान नहीं लाया और अल्लाह के अज़ाब में गिरफ्तार हो गए।

तो क्या इन काफ़िरों को ये क़ुरआन काफ़ी नहीं, जो उन्हें पिछली उम्मतों के अंजाम से आगाह करता है? ये क़ुरआन खुद एक ज़िंदा मौजिज़ा है — इसकी फ़साहत, बलाग़त, इल्मी हक़ाइक़ और पेशनगोइयाँ (भविष्यवाणियाँ) इस बात का सबूत हैं कि ये अल्लाह का कलाम है।

प्यारे भाइयो और बहनो! ये आयत हमें सिखाती है कि हिदायत के लिए चमत्कारों का इंतज़ार करना ज़रूरी नहीं। अल्लाह ने हमें क़ुरआन जैसी अज़ीम नेमत दी है — जो हर ज़माने के लिए रहनुमा है। जो शख्स सच्चे दिल से क़ुरआन को पढ़े और समझे, उसके लिए ये किताब काफी है। ये वही किताब है जो हमें ज़िंदगी का सही रास्ता दिखाती है, और जो इस पर अमल करे, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होता है।

आइए हम क़ुरआन को सिर्फ़ पढ़ने तक ही सीमित न रखें, बल्कि उस पर अमल करें और उसे अपनी ज़िंदगी में उतारें। यही हमारी सबसे बड़ी कामयाबी है।



📜 आयत 131-135 — सूरा ताहा

131وَلَا تَمُدَّنَّ عَيْنَيْكَ إِلَىٰ مَا مَتَّعْنَا بِهِ أَزْوَاجًا مِّنْهُمْ زَهْرَةَ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا لِنَفْتِنَهُمْ فِيهِ ۚ وَرِزْقُ رَبِّكَ خَيْرٌ وَأَبْقَىٰ
और (ऐ रसूल) जो उनमें से कुछ लोगों को दुनिया की इस ज़रा सी ज़िन्दगी की रौनक़ से निहाल कर दिया है ताकि हम उनको उसमें आज़माएँ तुम अपनी नज़रें उधर न बढ़ाओ और (इससे) तुम्हारे परवरदिगार की रोज़ी (सवाब) कहीं बेहतर और ज्यादा पाएदार है
132وَأْمُرْ أَهْلَكَ بِالصَّلَاةِ وَاصْطَبِرْ عَلَيْهَا ۖ لَا نَسْأَلُكَ رِزْقًا ۖ نَّحْنُ نَرْزُقُكَ ۗ وَالْعَاقِبَةُ لِلتَّقْوَىٰ
और अपने घर वालों को नमाज़ का हुक्म दो और तुम खुद भी उसके पाबन्द रहो हम तुम से रोज़ी तो तलब करते नहीं (बल्कि) हम तो खुद तुमको रोज़ी देते हैं और परहेज़गारी ही का तो अन्जाम बखैर है
133وَقَالُوا لَوْلَا يَأْتِينَا بِآيَةٍ مِّن رَّبِّهِ ۚ أَوَلَمْ تَأْتِهِم بَيِّنَةُ مَا فِي الصُّحُفِ الْأُولَىٰ
और (अहले मक्का) कहते हैं कि अपने परवरदिगार की तरफ से हमारे पास कोई मौजिज़ा हमारी मर्ज़ी के मुवाफिक़ क्यों नहीं लाते तो क्या जो (पेशीव गोइयाँ) अगली किताबों (तौरेत, इन्जील) में (इसकी) गवाह हैं वह भी उनके पास नहीं पहुँची
134وَلَوْ أَنَّا أَهْلَكْنَاهُم بِعَذَابٍ مِّن قَبْلِهِ لَقَالُوا رَبَّنَا لَوْلَا أَرْسَلْتَ إِلَيْنَا رَسُولًا فَنَتَّبِعَ آيَاتِكَ مِن قَبْلِ أَن نَّذِلَّ وَنَخْزَىٰ
और अगर हम उनको इस रसूल से पहले अज़ाब से हलाक कर डालते तो ज़रूर कहते कि ऐ हमारे पालने वाले तूने हमारे पास (अपना) रसूल क्यों न भेजा तो हम अपने ज़लील व रूसवा होने से पहले तेरी आयतों की पैरवी ज़रूर करते
135قُلْ كُلٌّ مُّتَرَبِّصٌ فَتَرَبَّصُوا ۖ فَسَتَعْلَمُونَ مَنْ أَصْحَابُ الصِّرَاطِ السَّوِيِّ وَمَنِ اهْتَدَىٰ
रसूल तुम कह दो कि हर शख्स (अपने अन्जामकार का) मुन्तिज़र है तो तुम भी इन्तिज़ार करो फिर तो तुम्हें बहुत जल्द मालूम हो जाएगा कि सीधी राह वाले कौन हैं (और कज़ी पर कौन हैं) हिदायत याफ़ता कौन है और गुमराह कौन है।
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीअवतरण स्थान
133आयत

अनुवाद — ताहा 133

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Friday, October 2, 2026

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