ताहा · 57/135
अनुवाद उच्चारण — ताहा
قَالَ أَجِئْتَنَا لِتُخْرِجَنَا مِنْ أَرْضِنَا بِسِحْرِكَ يَا مُوسَىٰ ۝٥٧
Qaala aji`tanaa litukhri janaa min ardinaa bisihrika yaa Moosa
📖 हिंदी अर्थ
इस पर भी उसने सबको झुठला दिया और न माना (और) कहने लगा ऐ मूसा क्या तुम हमारे पास इसलिए आए हो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَجِئْتَنَا – क्या तुम हमारे पास आए हो
  • لِتُخْرِجَنَا – ताकि तुम हमें निकाल दो
  • مِنْ أَرْضِنَا – हमारी धरती से (मिस्र से)
  • بِسِحْرِكَ – अपने जादू के ज़रिए
  • يَا مُوسَىٰ – ऐ मूसा

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन के सामने अपनी रिसालत का दावा पेश किया और उसे अल्लाह की तरफ़ बुलाया, तो फ़िरऔन — जो अपनी सत्ता और ठाठ-बाट के नशे में चूर था — ने तुरंत उन पर इल्ज़ाम लगाया। उसने कहा: "ऐ मूसा! क्या तुम हमारे पास इसलिए आए हो कि अपने जादू के ज़रिए हमें हमारी ज़मीन (मिस्र) से निकाल दो?"

फ़िरऔन का यह क़ौल दरअसल उसकी हैसियत और उसके दिल की बीमारी को ज़ाहिर करता है। वह समझता था कि मूसा (अलैहिस्सलाम) की दावत सिर्फ़ एक राजनीतिक साज़िश है, ताकि वह मिस्र की सत्ता हथिया ले और बनी इसराईल को उसकी सरज़मीन पर हाकिम बना दे। उसने हक़ीक़त को समझने की कोशिश नहीं की, बल्कि तुरंत मूसा (अलैहिस्सलाम) की नबुव्वत को "जादू" का नाम देकर उसे बदनाम करने की कोशिश की।

फ़िरऔन की यह बात उसकी सोच की गहराई को बयान करती है — वह दुनियावी सत्ता और मुल्क की हिफ़ाज़त को ही सब कुछ समझता था। उसे यह अहसास ही नहीं था कि अल्लाह का दीन इंसानों को ज़मीन की ग़ुलामी से आज़ाद कराता है, और असली इज़्ज़त अल्लाह की इबादत में है, न कि किसी मुल्क या तख़्त की हिफ़ाज़त में।


दावती पहलू (नसीहत):

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हक़ की दावत पेश करने वालों पर हमेशा इल्ज़ामात लगाए जाते हैं। जब कोई इंसान अल्लाह की तरफ़ बुलाता है, तो दुनियादार लोग उस पर तरह-तरह के आरोप लगाते हैं — कभी उसे जादूगर कहते हैं, कभी सियासतदान, कभी फ़ित्ना फैलाने वाला। लेकिन हक़ की राह पर चलने वालों को इन बातों से घबराना नहीं चाहिए। जिस तरह मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन के इल्ज़ाम का जवाब अपने दावे की सच्चाई और अल्लाह पर भरोसे से दिया, उसी तरह हमें भी अपने ईमान और अमल से साबित करना है कि हमारी दावत सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा के लिए है, न कि किसी दुनियावी मतलब के लिए।

याद रखिए! फ़िरऔन की तरह दुनिया के ताक़तवर लोग हमेशा हक़ को दबाने की कोशिश करते हैं, लेकिन अल्लाह का वादा है कि हक़ बुलंद रहेगा और बातिल मिट जाएगा। इसलिए हमें सब्र और यक़ीन के साथ अपनी दावत पर क़ायम रहना चाहिए।



📜 आयत 55-59 — ताहा

55۞ مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ
हमने इसी ज़मीन से तुम को पैदा किया और (मरने के बाद) इसमें लौटा कर लाएँगे और उसी से दूसरी बार (क़यामत के दिन) तुमको निकाल खड़ा करेंगे
56وَلَقَدْ أَرَيْنَاهُ آيَاتِنَا كُلَّهَا فَكَذَّبَ وَأَبَىٰ
और मैंने फिरऔन को अपनी सारी निशानियाँ दिखा दी
57قَالَ أَجِئْتَنَا لِتُخْرِجَنَا مِنْ أَرْضِنَا بِسِحْرِكَ يَا مُوسَىٰ
इस पर भी उसने सबको झुठला दिया और न माना (और) कहने लगा ऐ मूसा क्या तुम हमारे पास इसलिए आए हो
58فَلَنَأْتِيَنَّكَ بِسِحْرٍ مِّثْلِهِ فَاجْعَلْ بَيْنَنَا وَبَيْنَكَ مَوْعِدًا لَّا نُخْلِفُهُ نَحْنُ وَلَا أَنتَ مَكَانًا سُوًى
कि हम को हमारे मुल्क (मिस्र से) अपने जादू के ज़ोर से निकाल बाहर करो अच्छा तो (रहो) हम भी तुम्हारे सामने ऐसा जादू पेश करते हैं फिर तुम अपने और हमारे दरमियान एक वक्त मुक़र्रर करो कि न हम उसके ख़िलाफ करे और न तुम और मुक़ाबला एक साफ़ खुले मैदान में हो
59قَالَ مَوْعِدُكُمْ يَوْمُ الزِّينَةِ وَأَن يُحْشَرَ النَّاسُ ضُحًى
मूसा ने कहा तुम्हारे (मुक़ाबले) की मीयाद ज़ीनत (ईद) का दिन है और उस रोज़ सब लोग दिन चढ़े जमा किए जाँए
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अनुवाद — ताहा 57

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Tuesday, August 18, 2026

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