ताहा · 59/135
अनुवाद उच्चारण — ताहा
قَالَ مَوْعِدُكُمْ يَوْمُ الزِّينَةِ وَأَن يُحْشَرَ النَّاسُ ضُحًى ۝٥٩
Qaala maw`idukum yawmuz zeenati wa ai yuhsharan naasu duhaa
📖 हिंदी अर्थ
मूसा ने कहा तुम्हारे (मुक़ाबले) की मीयाद ज़ीनत (ईद) का दिन है और उस रोज़ सब लोग दिन चढ़े जमा किए जाँए

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَوْمُ الزِّينَةِ: त्योहार का दिन, जब लोग सज-धज कर निकलते थे।
  • يُحْشَرَ: एकत्र किया जाना, इकट्ठा किया जाना।
  • ضُحًى: चाश्त का समय, सूर्य निकलने के बाद का वक्त।

तफसीर (व्याख्या):

हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन को जवाब देते हुए कहा: हमारे और तुम्हारे बीच मुलाकात का वादा त्योहार के दिन है, जब लोग अपने त्योहार के मौके पर सज-धज कर निकलते हैं और शहर के बाहर इकट्ठा होते हैं। यह वह दिन होगा जब सभी लोग चाश्त के समय (सुबह सूरज निकलने के बाद) एक जगह जमा होंगे। यह समय इसलिए चुना गया ताकि लोगों की भीड़ के सामने सच्चाई साफ़ हो जाए, और किसी को यह शुबहा (संदेह) न रहे कि यह मुलाकात छिपकर हुई थी। दिन के उजाले में, सबके सामने, हक़ (सत्य) और बातिल (असत्य) का फैसला होगा, ताकि हर शख्स अपनी आँखों से देख ले कि अल्लाह का दीन ही सच्चा है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई को हमेशा खुले मैदान में, सबके सामने पेश करना चाहिए। इस्लाम का तरीका यही है कि वह छिपकर बात नहीं करता, बल्कि दिन की रोशनी में, सबके सामने अपनी दलीलें रखता है। जिस तरह हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने बिना किसी खौफ़ के फ़िरऔन को चुनौती दी, उसी तरह हमें भी हक़ की आवाज़ बुलंद करनी चाहिए, चाहे सामने कितना भी बड़ा ज़ालिम क्यों न हो। याद रखिए, अल्लाह का वादा सच्चा है, और वह अपने नबियों की हमेशा मदद करता है। यह त्योहार का दिन और चाश्त का समय इस बात की गवाही देता है कि अल्लाह चाहता है कि उसकी निशानियाँ लोगों के सामने खुलकर आएँ, ताकि जो लोग सच्चाई की तलाश में हैं, वे उसे पा लें। आज भी जो लोग सच्चे दिल से अल्लाह की तरफ आते हैं, अल्लाह उनके लिए रास्ते खोल देता है और उन्हें कामयाबी से नवाज़ता है।



📜 आयत 57-61 — ताहा

57قَالَ أَجِئْتَنَا لِتُخْرِجَنَا مِنْ أَرْضِنَا بِسِحْرِكَ يَا مُوسَىٰ
इस पर भी उसने सबको झुठला दिया और न माना (और) कहने लगा ऐ मूसा क्या तुम हमारे पास इसलिए आए हो
58فَلَنَأْتِيَنَّكَ بِسِحْرٍ مِّثْلِهِ فَاجْعَلْ بَيْنَنَا وَبَيْنَكَ مَوْعِدًا لَّا نُخْلِفُهُ نَحْنُ وَلَا أَنتَ مَكَانًا سُوًى
कि हम को हमारे मुल्क (मिस्र से) अपने जादू के ज़ोर से निकाल बाहर करो अच्छा तो (रहो) हम भी तुम्हारे सामने ऐसा जादू पेश करते हैं फिर तुम अपने और हमारे दरमियान एक वक्त मुक़र्रर करो कि न हम उसके ख़िलाफ करे और न तुम और मुक़ाबला एक साफ़ खुले मैदान में हो
59قَالَ مَوْعِدُكُمْ يَوْمُ الزِّينَةِ وَأَن يُحْشَرَ النَّاسُ ضُحًى
मूसा ने कहा तुम्हारे (मुक़ाबले) की मीयाद ज़ीनत (ईद) का दिन है और उस रोज़ सब लोग दिन चढ़े जमा किए जाँए
60فَتَوَلَّىٰ فِرْعَوْنُ فَجَمَعَ كَيْدَهُ ثُمَّ أَتَىٰ
उसके बाद फिरऔन (अपनी जगह) लौट गया फिर अपने चलत्तर (जादू के सामान) जमा करने लगा
61قَالَ لَهُم مُّوسَىٰ وَيْلَكُمْ لَا تَفْتَرُوا عَلَى اللَّهِ كَذِبًا فَيُسْحِتَكُم بِعَذَابٍ ۖ وَقَدْ خَابَ مَنِ افْتَرَىٰ
फिर (मुक़ाबले को) आ मौजूद हुआ मूसा ने (फ़िरऔनियों से) कहा तुम्हारा नास हो खुदा पर झूठी-झूठी इफ्तेरा परदाज़ियाँ न करो वरना वह अज़ाब (नाज़िल करके) इससे तुम्हारा मटियामेट कर छोड़ेगा
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अनुवाद — ताहा 59

सूरा ताहा आयत 59 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मूसा ने कहा तुम्हारे (मुक़ाबले) की मीयाद ज़ीनत (ईद) का…

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Tuesday, August 18, 2026

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