ताहा · 60/135
अनुवाद उच्चारण — ताहा
فَتَوَلَّىٰ فِرْعَوْنُ فَجَمَعَ كَيْدَهُ ثُمَّ أَتَىٰ ۝٦٠
Fatawallaa Fir`awnu fajjama`a kaidahoo summa ataa
📖 हिंदी अर्थ
उसके बाद फिरऔन (अपनी जगह) लौट गया फिर अपने चलत्तर (जादू के सामान) जमा करने लगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَتَوَلَّى: मुँह मोड़ा, पीठ फेर ली।
  • كَيْدَهُ: उसकी चालाकी, जादूगर और उसके सारे हथियार।
  • ثُمَّ أَتَى: फिर वह नियत समय और स्थान पर आया।

तफसीर (व्याख्या):

जब मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फिरौन के सामने सच्चाई पेश की और उसे ईमान लाने की दावत दी, तो फिरौन ने उस सच्चाई को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और घमंड के साथ मुँह मोड़कर चला गया। उसने सच्चाई का सामना करने की बजाय अपनी ताकत और चालाकी पर भरोसा किया। उसने अपने सारे जादूगरों को इकट्ठा किया और अपनी पूरी ताकत, हथियार और जादू के सामान को जमा किया, ताकि मूसा (अलैहिस्सलाम) के मुकाबले में उसे हरा सके। फिर वह उस नियत समय और स्थान पर पहुँचा, जो मूसा (अलैहिस्सलाम) के साथ तय हुआ था, ताकि वहाँ अपनी ताकत का प्रदर्शन करे और सच्चाई को दबा दे।

यह आयत हमें सिखाती है कि बातिल (असत्य) की ताकत चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, वह हक़ (सच्चाई) के सामने टिक नहीं सकती। फिरौन ने अपनी पूरी ताकत लगा दी, लेकिन अल्लाह की मदद से मूसा (अलैहिस्सलाम) की सच्चाई ने उसके सारे जादू को मिट्टी में मिला दिया। यह हर उस इंसान के लिए सबक है जो सच्चाई के रास्ते पर चलता है—अल्लाह पर भरोसा रखो, क्योंकि अल्लाह ही सबसे बड़ी ताकत है और वही अपने बंदों की मदद करता है। जो लोग सच्चाई को दबाने की कोशिश करते हैं, वे अंततः नाकाम होते हैं, जैसे फिरौन और उसके जादूगर नाकाम हुए। यह हमारे लिए प्रेरणा है कि हम सच्चाई पर डटे रहें और अल्लाह पर पूरा भरोसा रखें, क्योंकि अल्लाह का वादा है कि वह सच्चाई का साथ देता है और बातिल को मिटा देता है।



📜 आयत 58-62 — ताहा

58فَلَنَأْتِيَنَّكَ بِسِحْرٍ مِّثْلِهِ فَاجْعَلْ بَيْنَنَا وَبَيْنَكَ مَوْعِدًا لَّا نُخْلِفُهُ نَحْنُ وَلَا أَنتَ مَكَانًا سُوًى
कि हम को हमारे मुल्क (मिस्र से) अपने जादू के ज़ोर से निकाल बाहर करो अच्छा तो (रहो) हम भी तुम्हारे सामने ऐसा जादू पेश करते हैं फिर तुम अपने और हमारे दरमियान एक वक्त मुक़र्रर करो कि न हम उसके ख़िलाफ करे और न तुम और मुक़ाबला एक साफ़ खुले मैदान में हो
59قَالَ مَوْعِدُكُمْ يَوْمُ الزِّينَةِ وَأَن يُحْشَرَ النَّاسُ ضُحًى
मूसा ने कहा तुम्हारे (मुक़ाबले) की मीयाद ज़ीनत (ईद) का दिन है और उस रोज़ सब लोग दिन चढ़े जमा किए जाँए
60فَتَوَلَّىٰ فِرْعَوْنُ فَجَمَعَ كَيْدَهُ ثُمَّ أَتَىٰ
उसके बाद फिरऔन (अपनी जगह) लौट गया फिर अपने चलत्तर (जादू के सामान) जमा करने लगा
61قَالَ لَهُم مُّوسَىٰ وَيْلَكُمْ لَا تَفْتَرُوا عَلَى اللَّهِ كَذِبًا فَيُسْحِتَكُم بِعَذَابٍ ۖ وَقَدْ خَابَ مَنِ افْتَرَىٰ
फिर (मुक़ाबले को) आ मौजूद हुआ मूसा ने (फ़िरऔनियों से) कहा तुम्हारा नास हो खुदा पर झूठी-झूठी इफ्तेरा परदाज़ियाँ न करो वरना वह अज़ाब (नाज़िल करके) इससे तुम्हारा मटियामेट कर छोड़ेगा
62فَتَنَازَعُوا أَمْرَهُم بَيْنَهُمْ وَأَسَرُّوا النَّجْوَىٰ
और (याद रखो कि) जिसने इफ्तेरा परदाज़ियाँ न की वह यकीनन नामुराद रहा उस पर वह लोग अपने काम में बाहम झगड़ने और सरगोशियाँ करने लगे
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अनुवाद — ताहा 60

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Tuesday, August 18, 2026

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