अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- वैलकुम (ويلكم): तुम पर अफ़सोस है! यह डराने और सावधान करने का अंदाज़ है।
- तफ़्तरू (تفتروا): झूठ गढ़ना, बहाना बनाना, या अल्लाह पर झूठा आरोप लगाना।
- युस्हितकुम (يسحتكم): तुम्हें जड़ से उखाड़ दे, तुम्हें पूरी तरह नष्ट कर दे।
- ख़ाब (خاب): नाकामयाब होना, घाटे में रहना, असफल होना।
तफ़सीर (व्याख्या):
हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन के जादूगरों को संबोधित करते हुए नसीहत और चेतावनी के अंदाज़ में कहा: "तुम पर अफ़सोस है! अल्लाह पर झूठ मत गढ़ो, उस पर झूठा आरोप मत लगाओ, और अपने जादू के ज़रिए लोगों को धोखा देकर यह मत कहो कि यह अल्लाह की तरफ़ से है।" यह एक बहुत बड़ा पाप है। अगर तुमने ऐसा किया, तो अल्लाह तुम्हें अपनी तरफ़ से ऐसे अज़ाब (यातना) में गिरफ्तार करेगा जो तुम्हें जड़ से मिटा देगा, तुम्हारा कोई निशान बाक़ी नहीं छोड़ेगा।
फिर हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने एक सामान्य सच्चाई बयान की: "और जो कोई अल्लाह पर झूठ गढ़ता है, वह यक़ीनन नाकामयाब और घाटे में रहता है।" यानी झूठ और धोखे का रास्ता कभी कामयाबी की तरफ़ नहीं ले जाता, चाहे वह कितनी देर तक चले। सच्चाई ही सच्ची कामयाबी है।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई की ताक़त हमेशा झूठ पर भारी रहती है। जादूगरों ने अपनी पूरी ताक़त लगा दी थी, लेकिन जब सच्चाई सामने आई, तो उनका झूठ बेनक़ाब हो गया। अल्लाह के नबी हमेशा लोगों को सच्चाई की तरफ़ बुलाते हैं और उन्हें झूठ और धोखे से बचाते हैं।
हमें भी अपनी ज़िंदगी में सच्चाई को अपनाना चाहिए, चाहे कितनी भी मुश्किलें आएँ। झूठ और धोखे का सहारा लेने वाला इंसान दुनिया में भी नाकामयाब रहता है और आख़िरत में भी। अल्लाह की रहमत और मदद उन्हीं के साथ होती है जो सच्चाई पर क़ायम रहते हैं। याद रखें, अल्लाह कभी झूठ को कामयाबी नहीं देता, और सच्चाई की रोशनी हमेशा अंधेरे को चीरकर सामने आती है।
📜 आयत 59-63 — ताहा
अनुवाद — ताहा 61
सूरा ताहा आयत 61 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर (मुक़ाबले को) आ मौजूद हुआ मूसा ने (फ़िरऔनियों से)…सूरा आयत 61/135 — ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ताहा सुनें, ताहा अनुवाद, ताहा mp3, ताहा pdf. आयत 59–63. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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