ताहा · 61/135
अनुवाद उच्चारण — सूरा ताहा
قَالَ لَهُم مُّوسَىٰ وَيْلَكُمْ لَا تَفْتَرُوا عَلَى اللَّهِ كَذِبًا فَيُسْحِتَكُم بِعَذَابٍ ۖ وَقَدْ خَابَ مَنِ افْتَرَىٰ ۝٦١
Qaala lahum Moosaa wailakum laa taftaroo `alal laahi kaziban fa yus hitakum bi `azaab, wa qad khaaba manif taraa
📖 हिंदी अर्थ
फिर (मुक़ाबले को) आ मौजूद हुआ मूसा ने (फ़िरऔनियों से) कहा तुम्हारा नास हो खुदा पर झूठी-झूठी इफ्तेरा परदाज़ियाँ न करो वरना वह अज़ाब (नाज़िल करके) इससे तुम्हारा मटियामेट कर छोड़ेगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • वैलकुम (ويلكم): तुम पर अफ़सोस है! यह डराने और सावधान करने का अंदाज़ है।
  • तफ़्तरू (تفتروا): झूठ गढ़ना, बहाना बनाना, या अल्लाह पर झूठा आरोप लगाना।
  • युस्हितकुम (يسحتكم): तुम्हें जड़ से उखाड़ दे, तुम्हें पूरी तरह नष्ट कर दे।
  • ख़ाब (خاب): नाकामयाब होना, घाटे में रहना, असफल होना।

तफ़सीर (व्याख्या):

हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन के जादूगरों को संबोधित करते हुए नसीहत और चेतावनी के अंदाज़ में कहा: "तुम पर अफ़सोस है! अल्लाह पर झूठ मत गढ़ो, उस पर झूठा आरोप मत लगाओ, और अपने जादू के ज़रिए लोगों को धोखा देकर यह मत कहो कि यह अल्लाह की तरफ़ से है।" यह एक बहुत बड़ा पाप है। अगर तुमने ऐसा किया, तो अल्लाह तुम्हें अपनी तरफ़ से ऐसे अज़ाब (यातना) में गिरफ्तार करेगा जो तुम्हें जड़ से मिटा देगा, तुम्हारा कोई निशान बाक़ी नहीं छोड़ेगा।

फिर हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने एक सामान्य सच्चाई बयान की: "और जो कोई अल्लाह पर झूठ गढ़ता है, वह यक़ीनन नाकामयाब और घाटे में रहता है।" यानी झूठ और धोखे का रास्ता कभी कामयाबी की तरफ़ नहीं ले जाता, चाहे वह कितनी देर तक चले। सच्चाई ही सच्ची कामयाबी है।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई की ताक़त हमेशा झूठ पर भारी रहती है। जादूगरों ने अपनी पूरी ताक़त लगा दी थी, लेकिन जब सच्चाई सामने आई, तो उनका झूठ बेनक़ाब हो गया। अल्लाह के नबी हमेशा लोगों को सच्चाई की तरफ़ बुलाते हैं और उन्हें झूठ और धोखे से बचाते हैं।

हमें भी अपनी ज़िंदगी में सच्चाई को अपनाना चाहिए, चाहे कितनी भी मुश्किलें आएँ। झूठ और धोखे का सहारा लेने वाला इंसान दुनिया में भी नाकामयाब रहता है और आख़िरत में भी। अल्लाह की रहमत और मदद उन्हीं के साथ होती है जो सच्चाई पर क़ायम रहते हैं। याद रखें, अल्लाह कभी झूठ को कामयाबी नहीं देता, और सच्चाई की रोशनी हमेशा अंधेरे को चीरकर सामने आती है।



📜 आयत 59-63 — सूरा ताहा

59قَالَ مَوْعِدُكُمْ يَوْمُ الزِّينَةِ وَأَن يُحْشَرَ النَّاسُ ضُحًى
मूसा ने कहा तुम्हारे (मुक़ाबले) की मीयाद ज़ीनत (ईद) का दिन है और उस रोज़ सब लोग दिन चढ़े जमा किए जाँए
60فَتَوَلَّىٰ فِرْعَوْنُ فَجَمَعَ كَيْدَهُ ثُمَّ أَتَىٰ
उसके बाद फिरऔन (अपनी जगह) लौट गया फिर अपने चलत्तर (जादू के सामान) जमा करने लगा
61قَالَ لَهُم مُّوسَىٰ وَيْلَكُمْ لَا تَفْتَرُوا عَلَى اللَّهِ كَذِبًا فَيُسْحِتَكُم بِعَذَابٍ ۖ وَقَدْ خَابَ مَنِ افْتَرَىٰ
फिर (मुक़ाबले को) आ मौजूद हुआ मूसा ने (फ़िरऔनियों से) कहा तुम्हारा नास हो खुदा पर झूठी-झूठी इफ्तेरा परदाज़ियाँ न करो वरना वह अज़ाब (नाज़िल करके) इससे तुम्हारा मटियामेट कर छोड़ेगा
62فَتَنَازَعُوا أَمْرَهُم بَيْنَهُمْ وَأَسَرُّوا النَّجْوَىٰ
और (याद रखो कि) जिसने इफ्तेरा परदाज़ियाँ न की वह यकीनन नामुराद रहा उस पर वह लोग अपने काम में बाहम झगड़ने और सरगोशियाँ करने लगे
63قَالُوا إِنْ هَٰذَانِ لَسَاحِرَانِ يُرِيدَانِ أَن يُخْرِجَاكُم مِّنْ أَرْضِكُم بِسِحْرِهِمَا وَيَذْهَبَا بِطَرِيقَتِكُمُ الْمُثْلَىٰ
(आख़िर) वह लोग बोल उठे कि ये दोनों यक़ीनन जादूगर हैं और चाहते हैं कि अपने जादू (के ज़ोर) से तुम लोगों को तुम्हारे मुल्क से निकाल बाहर करें और तुम्हारे अच्छे ख़ासे मज़हब को मिटा छोड़ें
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीअवतरण स्थान
61आयत

अनुवाद — ताहा 61

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Friday, October 2, 2026

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