अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- خَطَايَانَا: हमारे पाप और ग़लतियाँ।
- أَكْرَهْتَنَا: तुमने हमें मजबूर किया।
- السِّحْر: जादू (वह काम जो फ़िरऔन ने मूसा अलैहिस्सलाम के मुक़ाबले के लिए सिखलाया था)।
- خَيْرٌ: बेहतर (इनाम और अज्र के लिहाज़ से)।
- أَبْقَى: अधिक बाक़ी रहने वाला (अज़ाब के लिहाज़ से)।
तफ़सीर:
जब फ़िरऔन के जादूगरों ने मूसा अलैहिस्सलाम के मोजिज़े (असा का साँप बनना) को देखा, तो उनके दिलों में सच्चाई का नूर उतर गया और उन्होंने ईमान ले आए। उन्होंने फ़िरऔन की धमकियों की परवाह किए बिना यह ऐलान किया: "हम अपने रब पर ईमान लाए हैं, ताकि वह हमारी पिछली ख़ताओं को माफ़ कर दे, और उस जादू के गुनाह को भी माफ़ कर दे जिसे तुमने हम पर ज़बरदस्ती थोपा था।"
यहाँ जादूगरों ने अपनी कमज़ोरी और मजबूरी का इज़हार किया कि हमने यह जादू अपनी मर्ज़ी से नहीं किया, बल्कि तेरे दबाव और डर की वजह से किया। वे अल्लाह से दुआ कर रहे हैं कि वह उनकी इस मजबूरी को भी माफ़ कर दे, क्योंकि अल्लाह बड़ा माफ़ करने वाला और रहम करने वाला है।
फिर उन्होंने फ़िरऔन को समझाया: "अल्लाह तेरे मुक़ाबले में बेहतर है — वह अपने नेक बंदों को बेहतर इनाम देता है, और उसका अज़ाब भी तेरे अज़ाब से कहीं ज़्यादा दर्दनाक और हमेशा रहने वाला है। तू तो केवल इस दुनिया में सज़ा दे सकता है, लेकिन अल्लाह का अज़ाब आख़िरत में हमेशा के लिए है।"
इस आयत से हमें कई सबक मिलते हैं:
- सच्चाई का एहसास होते ही ईमान लाना चाहिए, चाहे कितनी ही बड़ी क़ुर्बानी देनी पड़े। जादूगरों ने अपनी जान की परवाह नहीं की और सच्चाई के आगे सर झुका दिया।
- अल्लाह की रहमत बहुत वसी' है — वह उन गुनाहों को भी माफ़ कर सकता है जो इंसान ने मजबूरी में किए हों, बशर्ते दिल सच्चा हो और तौबा ख़ालिस हो।
- दुनिया की सत्ता और ताक़त क्षणभंगुर है, जबकि अल्लाह की सत्ता हमेशा रहने वाली है। फ़िरऔन की धमकियाँ केवल इस दुनिया तक सीमित थीं, लेकिन अल्लाह का इनाम और अज़ाब दोनों ही आख़िरत तक जारी रहने वाले हैं।
- ईमान की ताक़त — जब ईमान दिल में जड़ पकड़ लेता है, तो इंसान को कोई डर नहीं होता, न फ़िरऔन का डर, न मौत का डर।
यह आयत हमें सिखाती है कि हमें हमेशा अल्लाह की तरफ़ रुजू करना चाहिए, उसी से माफ़ी माँगनी चाहिए, और याद रखना चाहिए कि अल्लाह ही सबसे बेहतर इनाम देने वाला और सबसे दर्दनाक सज़ा देने वाला है। उसकी रहमत से कभी निराश नहीं होना चाहिए, चाहे गुनाह कितने ही बड़े क्यों न हों।
📜 आयत 71-75 — ताहा
अनुवाद — ताहा 73
सूरा ताहा आयत 73 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (और कहा) हम तो अपने परवरदिगार पर इसलिए ईमान लाए…सूरा आयत 73/135 — ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ताहा सुनें, ताहा अनुवाद, ताहा mp3, ताहा pdf. आयत 71–75. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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