ताहा · 73/135
अनुवाद उच्चारण — ताहा
إِنَّا آمَنَّا بِرَبِّنَا لِيَغْفِرَ لَنَا خَطَايَانَا وَمَا أَكْرَهْتَنَا عَلَيْهِ مِنَ السِّحْرِ ۗ وَاللَّهُ خَيْرٌ وَأَبْقَىٰ ۝٧٣
Innaaa aamannaa bi Rabbinaa liyaghfira lanaa khataayaanaa wa maaa akrahtanaa `alaihi minas sihr; wallaahu khairunw waabqaa
📖 हिंदी अर्थ
(और कहा) हम तो अपने परवरदिगार पर इसलिए ईमान लाए हैं ताकि हमारे वास्ते सारे गुनाह माफ़ कर दे और (ख़ास कर) जिस पर तूने हमें मजबूर किया था और खुदा ही सबसे बेहतर है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • خَطَايَانَا: हमारे पाप और ग़लतियाँ।
  • أَكْرَهْتَنَا: तुमने हमें मजबूर किया।
  • السِّحْر: जादू (वह काम जो फ़िरऔन ने मूसा अलैहिस्सलाम के मुक़ाबले के लिए सिखलाया था)।
  • خَيْرٌ: बेहतर (इनाम और अज्र के लिहाज़ से)।
  • أَبْقَى: अधिक बाक़ी रहने वाला (अज़ाब के लिहाज़ से)।

तफ़सीर:

जब फ़िरऔन के जादूगरों ने मूसा अलैहिस्सलाम के मोजिज़े (असा का साँप बनना) को देखा, तो उनके दिलों में सच्चाई का नूर उतर गया और उन्होंने ईमान ले आए। उन्होंने फ़िरऔन की धमकियों की परवाह किए बिना यह ऐलान किया: "हम अपने रब पर ईमान लाए हैं, ताकि वह हमारी पिछली ख़ताओं को माफ़ कर दे, और उस जादू के गुनाह को भी माफ़ कर दे जिसे तुमने हम पर ज़बरदस्ती थोपा था।"

यहाँ जादूगरों ने अपनी कमज़ोरी और मजबूरी का इज़हार किया कि हमने यह जादू अपनी मर्ज़ी से नहीं किया, बल्कि तेरे दबाव और डर की वजह से किया। वे अल्लाह से दुआ कर रहे हैं कि वह उनकी इस मजबूरी को भी माफ़ कर दे, क्योंकि अल्लाह बड़ा माफ़ करने वाला और रहम करने वाला है।

फिर उन्होंने फ़िरऔन को समझाया: "अल्लाह तेरे मुक़ाबले में बेहतर है — वह अपने नेक बंदों को बेहतर इनाम देता है, और उसका अज़ाब भी तेरे अज़ाब से कहीं ज़्यादा दर्दनाक और हमेशा रहने वाला है। तू तो केवल इस दुनिया में सज़ा दे सकता है, लेकिन अल्लाह का अज़ाब आख़िरत में हमेशा के लिए है।"

इस आयत से हमें कई सबक मिलते हैं:

  1. सच्चाई का एहसास होते ही ईमान लाना चाहिए, चाहे कितनी ही बड़ी क़ुर्बानी देनी पड़े। जादूगरों ने अपनी जान की परवाह नहीं की और सच्चाई के आगे सर झुका दिया।
  2. अल्लाह की रहमत बहुत वसी' है — वह उन गुनाहों को भी माफ़ कर सकता है जो इंसान ने मजबूरी में किए हों, बशर्ते दिल सच्चा हो और तौबा ख़ालिस हो।
  3. दुनिया की सत्ता और ताक़त क्षणभंगुर है, जबकि अल्लाह की सत्ता हमेशा रहने वाली है। फ़िरऔन की धमकियाँ केवल इस दुनिया तक सीमित थीं, लेकिन अल्लाह का इनाम और अज़ाब दोनों ही आख़िरत तक जारी रहने वाले हैं।
  4. ईमान की ताक़त — जब ईमान दिल में जड़ पकड़ लेता है, तो इंसान को कोई डर नहीं होता, न फ़िरऔन का डर, न मौत का डर।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें हमेशा अल्लाह की तरफ़ रुजू करना चाहिए, उसी से माफ़ी माँगनी चाहिए, और याद रखना चाहिए कि अल्लाह ही सबसे बेहतर इनाम देने वाला और सबसे दर्दनाक सज़ा देने वाला है। उसकी रहमत से कभी निराश नहीं होना चाहिए, चाहे गुनाह कितने ही बड़े क्यों न हों।



📜 आयत 71-75 — ताहा

71قَالَ آمَنتُمْ لَهُ قَبْلَ أَنْ آذَنَ لَكُمْ ۖ إِنَّهُ لَكَبِيرُكُمُ الَّذِي عَلَّمَكُمُ السِّحْرَ ۖ فَلَأُقَطِّعَنَّ أَيْدِيَكُمْ وَأَرْجُلَكُم مِّنْ خِلَافٍ وَلَأُصَلِّبَنَّكُمْ فِي جُذُوعِ النَّخْلِ وَلَتَعْلَمُنَّ أَيُّنَا أَشَدُّ عَذَابًا وَأَبْقَىٰ
फिरऔन ने उन लोगों से कहा (हाए) इससे पहले कि हम तुमको इजाज़त दें तुम उस पर ईमान ले आए इसमें शक नहीं कि ये तुम सबका बड़ा (गुरू) है जिसने तुमको जादू सिखाया है तो मैं तुम्हारा एक तरफ़ के हाथ और दूसरी तरफ़ के पाँव ज़रूर काट डालूँगा और तुम्हें यक़ीनन खुरमे की शाख़ों पर सूली चढ़ा दूँगा और उस वक्त तुमको (अच्छी तरह) मालूम हो जाएगा कि हम (दोनों) फरीक़ों से अज़ाब में ज्यादा बढ़ा हुआ कौन और किसको क़याम ज्यादा है
72قَالُوا لَن نُّؤْثِرَكَ عَلَىٰ مَا جَاءَنَا مِنَ الْبَيِّنَاتِ وَالَّذِي فَطَرَنَا ۖ فَاقْضِ مَا أَنتَ قَاضٍ ۖ إِنَّمَا تَقْضِي هَٰذِهِ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا
जादूगर बोले कि ऐसे वाजेए व रौशन मौजिज़ात जो हमारे सामने आए उन पर और जिस (खुदा) ने हमको पैदा किया उस पर तो हम तुमको किसी तरह तरजीह नहीं दे सकते तो जो तुझे करना हो कर गुज़र तो बस दुनिया की (इसी ज़रा) ज़िन्दगी पर हुकूमत कर सकता है
73إِنَّا آمَنَّا بِرَبِّنَا لِيَغْفِرَ لَنَا خَطَايَانَا وَمَا أَكْرَهْتَنَا عَلَيْهِ مِنَ السِّحْرِ ۗ وَاللَّهُ خَيْرٌ وَأَبْقَىٰ
(और कहा) हम तो अपने परवरदिगार पर इसलिए ईमान लाए हैं ताकि हमारे वास्ते सारे गुनाह माफ़ कर दे और (ख़ास कर) जिस पर तूने हमें मजबूर किया था और खुदा ही सबसे बेहतर है
74إِنَّهُ مَن يَأْتِ رَبَّهُ مُجْرِمًا فَإِنَّ لَهُ جَهَنَّمَ لَا يَمُوتُ فِيهَا وَلَا يَحْيَىٰ
और (उसी को) सबसे ज्यादा क़याम है इसमें शक नहीं कि जो शख्स मुजरिम होकर अपने परवरदिगार के सामने हाज़िर होगा तो उसके लिए यक़ीनन जहन्नुम (धरा हुआ) है जिसमें न तो वह मरे ही गा और न ज़िन्दा ही रहेगा
75وَمَن يَأْتِهِ مُؤْمِنًا قَدْ عَمِلَ الصَّالِحَاتِ فَأُولَٰئِكَ لَهُمُ الدَّرَجَاتُ الْعُلَىٰ
(सिसकता रहेगा) और जो शख्स उसके सामने ईमानदार हो कर हाज़िर होगा और उसने अच्छे-अच्छे काम भी किए होंगे तो ऐसे ही लोग हैं जिनके लिए बड़े-बड़े बुलन्द रूतबे हैं
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अनुवाद — ताहा 73

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Tuesday, August 18, 2026

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