अल-अंबिया · 74/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
وَلُوطًا آتَيْنَاهُ حُكْمًا وَعِلْمًا وَنَجَّيْنَاهُ مِنَ الْقَرْيَةِ الَّتِي كَانَت تَّعْمَلُ الْخَبَائِثَ ۗ إِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمَ سَوْءٍ فَاسِقِينَ ۝٧٤
Wa Lootan aatainaahu hukmanw wa `ilmanw wa najjainaahu minal qaryatil latee kaanat ta`malul khabaaa`is; innahum kaanoo qawma saw`in faasiqeen
📖 हिंदी अर्थ
और लूत को भी हम ही के फ़हमे सलीम और नबूवत अता की और हम ही ने उस बस्ती से जहाँ के लोग बदकारियाँ करते थे नजात दी इसमें शक नहीं कि वह लोग बड़े बदकार आदमी थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • हुक्मन: नबुव्वत, न्याय-निर्णय की क्षमता और समझ-बूझ।
  • इल्मन: दीन की समझ और ईश्वरीय ज्ञान।
  • अल-ख़बाइस: वे घृणित कर्म, जैसे व्यभिचार (समलैंगिकता), रास्ता काटना, और अन्य पाप।
  • क़ौम सौ': बुरे और दुष्ट लोग।
  • फ़ासिक़ीन: आज्ञा का उल्लंघन करने वाले, अल्लाह की अवज्ञा में डूबे हुए।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र करते हुए बताया कि उन्हें नबुव्वत, न्याय-निर्णय की शक्ति, और दीन की गहरी समझ प्रदान की। यह अल्लाह की विशेष रहमत थी कि उन्होंने लूत को हिक्मत और इल्म से नवाज़ा, ताकि वे अपनी क़ौम को सीधा रास्ता दिखा सकें।

फिर अल्लाह ने उन्हें उस बस्ती (सदूम) से नजात दी, जिसके निवासी घिनौने कर्मों में लिप्त थे। वे लोग ऐसे कुकर्म करते थे जो फ़ितरत के खिलाफ़ थे—पुरुषों से व्यभिचार, राहगीरों को तंग करना, और अन्य बुराइयाँ। यह क़ौम अपनी शरारत और अल्लाह की अवज्ञा में इतनी आगे बढ़ गई थी कि उन्हें "क़ौम सौ'" (बुरी क़ौम) कहा गया। वे फ़ासिक़ थे, यानी अल्लाह की हदों को तोड़ने वाले और पाप में डूबे हुए।

इस आयत से हमें सीख मिलती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को हमेशा बुराई से बचाता है और उन्हें हिक्मत व इल्म देकर ऊँचा उठाता है। जो लोग अल्लाह की नाफ़रमानी में मशगूल रहते हैं, वे अपने लिए बर्बादी का सामान करते हैं, लेकिन अल्लाह के वली (प्यारे बंदे) हर मुसीबत से निकलकर कामयाब होते हैं। यह हमारे लिए प्रेरणा है कि हम नेकी और पाकीज़गी को अपनाएँ, बुराई से दूर रहें, और अल्लाह की रहमत पर भरोसा रखें। अल्लाह हमें भी हिक्मत और इल्म दे, और हमें हर बुराई से बचाए। आमीन।



📜 आयत 72-76 — अल-अंबिया

72وَوَهَبْنَا لَهُ إِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ نَافِلَةً ۖ وَكُلًّا جَعَلْنَا صَالِحِينَ
और हमने इबराहीम को इनाम में इसहाक़ (जैसा बैटा) और याकूब (जैसा पोता) इनायत फरमाया हमने सबको नेक बख्त बनाया
73وَجَعَلْنَاهُمْ أَئِمَّةً يَهْدُونَ بِأَمْرِنَا وَأَوْحَيْنَا إِلَيْهِمْ فِعْلَ الْخَيْرَاتِ وَإِقَامَ الصَّلَاةِ وَإِيتَاءَ الزَّكَاةِ ۖ وَكَانُوا لَنَا عَابِدِينَ
और उन सबको (लोगों का) पेशवा बनाया कि हमारे हुक्म से (उनकी) हिदायत करते थे और हमने उनके पास नेक काम करने और नमाज़ पढ़ने और ज़कात देने की ''वही'' भेजी थी और ये सब के सब हमारी ही इबादत करते थे
74وَلُوطًا آتَيْنَاهُ حُكْمًا وَعِلْمًا وَنَجَّيْنَاهُ مِنَ الْقَرْيَةِ الَّتِي كَانَت تَّعْمَلُ الْخَبَائِثَ ۗ إِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمَ سَوْءٍ فَاسِقِينَ
और लूत को भी हम ही के फ़हमे सलीम और नबूवत अता की और हम ही ने उस बस्ती से जहाँ के लोग बदकारियाँ करते थे नजात दी इसमें शक नहीं कि वह लोग बड़े बदकार आदमी थे
75وَأَدْخَلْنَاهُ فِي رَحْمَتِنَا ۖ إِنَّهُ مِنَ الصَّالِحِينَ
और हमने लूत को अपनी रहमत में दाख़िल कर लिया इसमें शक नहीं कि वह नेकोंकार बन्दों में से थे
76وَنُوحًا إِذْ نَادَىٰ مِن قَبْلُ فَاسْتَجَبْنَا لَهُ فَنَجَّيْنَاهُ وَأَهْلَهُ مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيمِ
और (ऐ रसूल लूत से भी) पहले (हमने) नूह को नबूवत पर फ़ायज़ किया जब उन्होंने (हमको) आवाज़ दी तो हमने उनकी (दुआ) सुन ली फिर उनको और उनके साथियों को (तूफ़ान की) बड़ी सख्त मुसीबत से नजात दी
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अनुवाद — अल-अंबिया 74

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Tuesday, August 18, 2026

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