अल-मोमिनुन · 10/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
أُولَٰئِكَ هُمُ الْوَارِثُونَ ۝١٠
Ulaaa`ika humul waarisoon
📖 हिंदी अर्थ
(आदमी की औलाद में) यही लोग सच्चे वारिस है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أُولَٰئِكَ (वे लोग): उन गुणों वाले मोमिनों की ओर इशारा है जिनका ज़िक्र पिछली आयात में हुआ।
  • الْوَارِثُونَ (वारिस): वे लोग जो किसी चीज़ के उत्तराधिकारी हों।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उन मोमिनों की ख़ूबियाँ बयान करने के बाद फ़रमाता है कि यही लोग असली वारिस हैं। यानी वे लोग जो नमाज़ में ख़ुशू-ख़ुज़ू रखते हैं, बेकार बातों से परहेज़ करते हैं, ज़कात अदा करते हैं, अपनी शर्मगाहों की हिफ़ाज़त करते हैं, अमानत और अहद का पालन करते हैं और अपनी नमाज़ों की पाबंदी करते हैं — यही वे लोग हैं जो जन्नत के वारिस होंगे।

यह वारसी किसी माल या ज़मीन की नहीं, बल्कि जन्नत की वारसी है। क़यामत के दिन जब मोमिनों को जन्नत में दाख़िल किया जाएगा, तो कुछ मुनाफ़िक़ीन और काफ़िरों के हिस्से भी मोमिनों को दे दिए जाएँगे। यह अल्लाह का फ़ज़ल और करम है कि उसने अपने नेक बंदों को यह बड़ी मंज़िल अता फ़रमाई।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला की रहमत का दरवाज़ा हर उस बंदे के लिए खुला है जो ईमान लाए और नेक अमल करे। जन्नत कोई ख़्वाब नहीं, बल्कि एक हक़ीक़त है जो उन लोगों का इंतज़ार कर रही है जो अल्लाह की इबादत में मशग़ूल रहते हैं। अगर हम चाहते हैं कि हम भी उन वारिसों में शामिल हों, तो हमें अपनी ज़िंदगी को उन्हीं गुणों के मुताबिक़ ढालना होगा। यह आयत हमें उम्मीद देती है कि अल्लाह की राह पर चलने वालों का अंजाम कभी बर्बादी नहीं होता, बल्कि उनका अंजाम सबसे खूबसूरत और हमेशा रहने वाली जन्नत है। आओ, हम अपने अमल को दुरुस्त करें और इस वारसी के हक़दार बनने की कोशिश करें।



📜 आयत 8-12 — सूरा अल-मोमिनुन

8وَالَّذِينَ هُمْ لِأَمَانَاتِهِمْ وَعَهْدِهِمْ رَاعُونَ
और जो अपनी अमानतों और अपने एहद का लिहाज़ रखते हैं
9وَالَّذِينَ هُمْ عَلَىٰ صَلَوَاتِهِمْ يُحَافِظُونَ
और जो अपनी नमाज़ों की पाबन्दी करते हैं
10أُولَٰئِكَ هُمُ الْوَارِثُونَ
(आदमी की औलाद में) यही लोग सच्चे वारिस है
11الَّذِينَ يَرِثُونَ الْفِرْدَوْسَ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
जो बेहश्त बरी का हिस्सा लेंगे (और) यही लोग इसमें हमेशा (जिन्दा) रहेंगे
12وَلَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنسَانَ مِن سُلَالَةٍ مِّن طِينٍ
और हमने आदमी को गीली मिट्टी के जौहर से पैदा किया
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
10आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 10

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Saturday, October 3, 2026

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