अल-मोमिनुन · 41/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
فَأَخَذَتْهُمُ الصَّيْحَةُ بِالْحَقِّ فَجَعَلْنَاهُمْ غُثَاءً ۚ فَبُعْدًا لِّلْقَوْمِ الظَّالِمِينَ ۝٤١
Fa akhazat humus saihatu bilhaqqi faja`alnaahum ghusaaa`aa; fabu;dal lilqaw miz zaalimeen
📖 हिंदी अर्थ
ग़रज़ उन्हें यक़ीनन एक सख्त चिंघाड़ ने ले डाला तो हमने उन्हें कूडे क़रकट (का ढेर) बना छोड़ा पस ज़ालिमों पर (खुदा की) लानत है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الصَّيْحَةُ: भयानक चीत्कार, एक प्रचंड आवाज़ जो विनाश का कारण बनी।
  • غُثَاءً: वह सूखा हुआ कूड़ा-कचरा और घास-फूस जो बाढ़ के पानी की सतह पर तैरता हुआ दिखाई देता है, जिसका कोई उपयोग नहीं होता।
  • فَبُعْدًا: विनाश और रहमत से दूरी।

तफ़सीर:

जब उस ज़ालिम क़ौम ने अपने नबी की नसीहत को ठुकरा दिया और हठधर्मी पर अड़े रहे, तो अल्लाह का अज़ाब उन पर आ पहुंचा। एक ऐसी भयानक चीत्कार (सैहा) ने उन्हें आ घेरा, जो सच्चाई और इंसाफ़ पर आधारित थी—यानी उन्होंने जो कुछ भी किया था, उसका पूरा-पूरा बदला उन्हें मिला। यह आवाज़ इतनी प्रचंड थी कि उनकी सांसें थम गईं, दिल फट गए और वे सब के सब मर गए।

फिर अल्लाह ने उन्हें ऐसा बर्बाद किया कि वे उस कूड़े-कचरे की तरह हो गए जो बाढ़ के पानी पर तैरता है—बेकार, बेजान और तुच्छ। उनकी शक्ति, उनकी ताकत और उनकी शानो-शौकत सब कुछ मिट्टी में मिल गया। कोई उन्हें याद नहीं करता, कोई उनके लिए आंसू नहीं बहाता।

यही है उन ज़ालिमों का अंजाम जो अल्लाह की आयतों को झुठलाते हैं और अपने नबियों का मज़ाक उड़ाते हैं। उनके लिए अल्लाह की रहमत से दूरी और विनाश है। यह केवल एक खबर नहीं, बल्कि एक चेतावनी है—हर उस इंसान के लिए जो अल्लाह के हुक्म को नज़रअंदाज़ करता है और ज़ुल्म पर कायम रहता है।

दीनी पैग़ाम:

यह क़िस्सा हमारे लिए एक ज़िंदा सबक़ है। अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन वह ढील देता है ताकि बंदे तौबा कर लें। जो लोग अल्लाह के रसूलों की बात नहीं मानते और अपनी ज़िद पर अड़े रहते हैं, उनका अंजाम यही होता है—बर्बादी और रहमत से दूरी।

आज भी अल्लाह हमें मौका दे रहा है कि हम अपनी गलतियों से तौबा करें, अपने नबी ﷺ की सुन्नत पर चलें और ज़ुल्म से बचें। याद रखिए, अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए है जो उसकी तरफ लौटते हैं, और उसका अज़ाब उनके लिए है जो हक़ को ठुकराते हैं। आइए, हम उन ज़ालिमों की तरह न बनें, बल्कि नेक बंदों की तरह जिएं, ताकि अल्लाह की रहमत और उसकी मगफिरत हमारे नसीब हो।



📜 आयत 39-43 — सूरा अल-मोमिनुन

39قَالَ رَبِّ انصُرْنِي بِمَا كَذَّبُونِ
तू मेरी मदद कर ख़ुदा ने फरमाया (एक ज़रा ठहर जाओ)
40قَالَ عَمَّا قَلِيلٍ لَّيُصْبِحُنَّ نَادِمِينَ
अनक़रीब ही ये लोग नादिम व परेशान हो जाएँगे
41فَأَخَذَتْهُمُ الصَّيْحَةُ بِالْحَقِّ فَجَعَلْنَاهُمْ غُثَاءً ۚ فَبُعْدًا لِّلْقَوْمِ الظَّالِمِينَ
ग़रज़ उन्हें यक़ीनन एक सख्त चिंघाड़ ने ले डाला तो हमने उन्हें कूडे क़रकट (का ढेर) बना छोड़ा पस ज़ालिमों पर (खुदा की) लानत है
42ثُمَّ أَنشَأْنَا مِن بَعْدِهِمْ قُرُونًا آخَرِينَ
फिर हमने उनके बाद दूसरी क़ौमों को पैदा किया
43مَا تَسْبِقُ مِنْ أُمَّةٍ أَجَلَهَا وَمَا يَسْتَأْخِرُونَ
कोई उम्मत अपने वक्त मुर्करर से न आगे बढ़ सकती है न (उससे) पीछे हट सकती है
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
41आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 41

सूरा अल-मोमिनुन आयत 41 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ग़रज़ उन्हें यक़ीनन एक सख्त चिंघाड़ ने ले डाला तो…

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Monday, September 28, 2026

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