अल-मोमिनुन · 40/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
قَالَ عَمَّا قَلِيلٍ لَّيُصْبِحُنَّ نَادِمِينَ ۝٤٠
Qaala `ammaa qaleelil la yusbihunna naadimeen
📖 हिंदी अर्थ
अनक़रीब ही ये लोग नादिम व परेशान हो जाएँगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • عَمَّا قَلِيلٍ – अर्थात बहुत थोड़े समय के बाद, निकट भविष्य में।
  • لَيُصْبِحُنَّ نَادِمِينَ – वे अवश्य ही पछतावे की स्थिति में सुबह करेंगे, अर्थात पछताएँगे।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब नबी हूद (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को अल्लाह के अज़ाब से डराया और वे मज़ाक़ उड़ाते रहे, तो अल्लाह ने अपने नबी को जवाब दिया: "बहुत थोड़े समय के बाद ये लोग सुबह करेंगे और उस वक़्त ये अपने किए पर पछताएँगे।" यानी जब अज़ाब उन पर आ जाएगा और वे अपनी आँखों से उसे देख लेंगे, तो उन्हें अपने कुफ़्र और तकज़ीब (झुठलाने) पर सख्त पछतावा होगा, लेकिन वह पछतावा उनके किसी काम न आएगा।

यह अल्लाह की सुन्नत (रीति) है कि जब कोई क़ौम हद से गुज़र जाती है और नबियों को झुठलाती है, तो अज़ाब अचानक आ जाता है और फिर पछतावे का कोई फ़ायदा नहीं होता। यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की पकड़ बहुत करीब है, और इंसान को चाहिए कि वह दुनिया में रहते हुए ही अपने कर्मों की जाँच कर ले, ताकि उसे आख़िरत में पछताना न पड़े।

दावती पहलू:

यह आयत हर उस इंसान के लिए एक चेतावनी है जो अल्लाह के दीन से मुँह मोड़ता है और नबियों की शिक्षाओं का मज़ाक उड़ाता है। अल्लाह की रहमत बहुत विस्तृत है, लेकिन उसका अज़ाब भी बहुत सख्त है। जो लोग आज सच्चाई को सुनकर भी उसे नहीं मानते, वे कल जब सच्चाई सामने आएगी तो पछताएँगे, लेकिन तब पछतावा बेकार होगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह की तरफ़ लौटें, अपने गुनाहों से तौबा करें और नेक अमल अपनाएँ, क्योंकि अल्लाह का वादा सच्चा है और उसका अज़ाब किसी को छोड़ता नहीं। यही वह मौक़ा है जब हम अपनी ज़िंदगी को सही दिशा दे सकते हैं और उस पछतावे से बच सकते हैं जो क़यामत के दिन हर गुनाहगार को होगा।



📜 आयत 38-42 — सूरा अल-मोमिनुन

38إِنْ هُوَ إِلَّا رَجُلٌ افْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا وَمَا نَحْنُ لَهُ بِمُؤْمِنِينَ
और हम तो कभी उस पर ईमान लाने वाले नहीं (ये हालत देखकर) सालेह ने दुआ की ऐ मेरे पालने वाले चूँकि इन लोगों ने मुझे झुठला दिया
39قَالَ رَبِّ انصُرْنِي بِمَا كَذَّبُونِ
तू मेरी मदद कर ख़ुदा ने फरमाया (एक ज़रा ठहर जाओ)
40قَالَ عَمَّا قَلِيلٍ لَّيُصْبِحُنَّ نَادِمِينَ
अनक़रीब ही ये लोग नादिम व परेशान हो जाएँगे
41فَأَخَذَتْهُمُ الصَّيْحَةُ بِالْحَقِّ فَجَعَلْنَاهُمْ غُثَاءً ۚ فَبُعْدًا لِّلْقَوْمِ الظَّالِمِينَ
ग़रज़ उन्हें यक़ीनन एक सख्त चिंघाड़ ने ले डाला तो हमने उन्हें कूडे क़रकट (का ढेर) बना छोड़ा पस ज़ालिमों पर (खुदा की) लानत है
42ثُمَّ أَنشَأْنَا مِن بَعْدِهِمْ قُرُونًا آخَرِينَ
फिर हमने उनके बाद दूसरी क़ौमों को पैदा किया
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
40आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 40

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Monday, September 28, 2026

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