अल-मोमिनुन · 43/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
مَا تَسْبِقُ مِنْ أُمَّةٍ أَجَلَهَا وَمَا يَسْتَأْخِرُونَ ۝٤٣
Maa tasbiqu min ummatin ajalahaa wa maa yastaakhiroon
📖 हिंदी अर्थ
कोई उम्मत अपने वक्त मुर्करर से न आगे बढ़ सकती है न (उससे) पीछे हट सकती है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تَسْبِقُ – आगे बढ़ जाना, समय से पहले आ जाना।
  • أَجَلَهَا – उसका निर्धारित समय, वह मुहलत या अवधि जो उसके लिए लिखी गई है।
  • يَسْتَأْخِرُونَ – पीछे हटना, देर करना, विलंबित होना।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में बताते हैं कि हर उम्मत (समुदाय) के लिए एक निश्चित समय और अवधि लिखी गई है, जो अल्लाह के इल्म और हिक्मत के अनुसार तय है। जब वह समय आ जाता है, तो न तो कोई उम्मत उससे आगे बढ़ सकती है और न ही पीछे हट सकती है। चाहे वह उम्मत कितनी भी ताकतवर क्यों न हो, चाहे उसके पास कितने भी साधन और हथियार क्यों न हों, अल्लाह के फैसले के आगे सब बेबस हैं। यह बात उन झुठलाने वाली उम्मतों के संदर्भ में कही गई है, जिन्होंने अपने पैग़म्बरों को झुठलाया और अल्लाह के अज़ाब को दूर समझा। अल्लाह फरमाता है कि जिस क़ौम के लिए अज़ाब का वक़्त मुक़र्रर है, वह न तो उससे पहले आएगा और न ही बाद में। यह अल्लाह की क़ुदरत और उसके इल्म की निशानी है कि वह हर चीज़ का एक अंदाज़ा (माप) रखता है, और उसके फैसले में कोई तब्दीली नहीं होती।

दावती पहलू:

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह का हुक्म और उसकी तक़दीर अटल है। जिस तरह अल्लाह ने हर उम्मत के लिए एक समय निर्धारित किया है, उसी तरह हर इंसान की ज़िंदगी की मुहलत भी तय है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी के हर लम्हे को अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा में गुज़ारें, और यह न समझें कि हमें हमेशा के लिए छोड़ दिया गया है। अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और वह किसी को भी उसके अमल का बदला देने में देर नहीं करता। यह आयत हमें डराती भी है और उम्मीद भी देती है – डर इस बात का कि हम अल्लाह के अज़ाब से बेखबर न हों, और उम्मीद इस बात की कि अल्लाह की रहमत और माफ़ी का दरवाज़ा तब तक खुला है जब तक हमारा वक़्त नहीं आ जाता। आइए, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह के हुक्मों के मुताबिक ढालें, क्योंकि सच्ची कामयाबी उसी में है जो अल्लाह और उसके रसूल ﷺ के रास्ते पर चले।



📜 आयत 41-45 — अल-मोमिनुन

41فَأَخَذَتْهُمُ الصَّيْحَةُ بِالْحَقِّ فَجَعَلْنَاهُمْ غُثَاءً ۚ فَبُعْدًا لِّلْقَوْمِ الظَّالِمِينَ
ग़रज़ उन्हें यक़ीनन एक सख्त चिंघाड़ ने ले डाला तो हमने उन्हें कूडे क़रकट (का ढेर) बना छोड़ा पस ज़ालिमों पर (खुदा की) लानत है
42ثُمَّ أَنشَأْنَا مِن بَعْدِهِمْ قُرُونًا آخَرِينَ
फिर हमने उनके बाद दूसरी क़ौमों को पैदा किया
43مَا تَسْبِقُ مِنْ أُمَّةٍ أَجَلَهَا وَمَا يَسْتَأْخِرُونَ
कोई उम्मत अपने वक्त मुर्करर से न आगे बढ़ सकती है न (उससे) पीछे हट सकती है
44ثُمَّ أَرْسَلْنَا رُسُلَنَا تَتْرَىٰ ۖ كُلَّ مَا جَاءَ أُمَّةً رَّسُولُهَا كَذَّبُوهُ ۚ فَأَتْبَعْنَا بَعْضَهُم بَعْضًا وَجَعَلْنَاهُمْ أَحَادِيثَ ۚ فَبُعْدًا لِّقَوْمٍ لَّا يُؤْمِنُونَ
फिर हमने लगातार बहुत से पैग़म्बर भेजे (मगर) जब जब किसी उम्मत का पैग़म्बर उन के पास आता तो ये लोग उसको झुठलाते थे तो हम थी (आगे पीछे) एक को दूसरे के बाद (हलाक) करते गए और हमने उन्हें (नेस्त व नाबूद करके) अफसाना बना दिया तो ईमान न लाने वालो पर ख़ुदा की लानत है
45ثُمَّ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ وَأَخَاهُ هَارُونَ بِآيَاتِنَا وَسُلْطَانٍ مُّبِينٍ
फिर हमने मूसा और उनके भाई हारुन को अपनी निशानियों और वाज़ेए व रौशन दलील के साथ फिरऔन और उसके दरबार के उमराओ के पास रसूल बना कर भेजा
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीRevelation
43आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 43

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Tuesday, August 18, 2026

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