अल-मोमिनुन · 89/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
سَيَقُولُونَ لِلَّهِ ۚ قُلْ فَأَنَّىٰ تُسْحَرُونَ ۝٨٩
Sa yaqooloona lillaah; qul fa annaa tus haroon
📖 हिंदी अर्थ
तो ये लोग फौरन बोल उठेंगे कि (सब एख्तेयार) ख़ुदा ही को है- अब तुम कह दो कि तुम पर जादू कहाँ किया जाता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تُسْحَرُونَ — तुम पर जादू कर दिया जाता है, अर्थात तुम्हारी अक्ल मारी जाती है और तुम धोखे में पड़ जाते हो।

व्याख्या:

जब उन अविश्वासियों से पूछा जाता है कि धरती और आसमान का मालिक कौन है, और इन सब चीज़ों का स्वामी कौन है, तो वे अपनी फ़ितरत (स्वाभाविक प्रवृत्ति) के कारण बिना किसी हिचकिचाहट के कह देते हैं: "यह सब अल्लाह ही का है।" वे इस सच्चाई को जानते हुए भी मानते हैं कि सृष्टि का स्वामी और मालिक केवल अल्लाह है।

तो अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ से कहता है कि उनसे पूछो: "जब तुम खुद यह स्वीकार करते हो कि सब कुछ अल्लाह का है, तो फिर तुम पर कैसा जादू कर दिया गया है? तुम्हारी अक्लें कहाँ चली गईं? तुम उसे छोड़कर दूसरों की इबादत क्यों करते हो? तुम उसी अल्लाह की इबादत क्यों नहीं करते जिसके हाथ में सब कुछ है? तुम उसके रसूल को क्यों झुठलाते हो और उसके बताए रास्ते पर क्यों नहीं चलते?"

यानी जब तुम मानते हो कि सारी कायनात का मालिक अल्लाह है, तो फिर उसकी इबादत क्यों नहीं करते? उसके हुक्म को क्यों नहीं मानते? उसके दीन को क्यों नहीं अपनाते? क्या तुम पर कोई जादू कर दिया गया है जो साफ सच्चाई को देखते हुए भी उसे नहीं मान रहे? तुम्हारी समझ पर ऐसा पर्दा क्यों पड़ गया है कि सच्चाई को झूठ और झूठ को सच्चा समझ रहे हो?

यह एक बहुत ही सशक्त दलील है जो उन्हें उनके अपने कहे हुए शब्दों से ही जवाब देती है। जब वे खुद गवाही देते हैं कि सब कुछ अल्लाह का है, तो फिर उनका दूसरों की इबादत करना, उनका रसूलों को झुठलाना, उनका क़यामत के दिन को न मानना — यह सब उनकी अपनी बात के खिलाफ जाता है।

दावत और नसीहत:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि हर इंसान की फ़ितरत में यह बात बसी हुई है कि अल्लाह ही इस कायनात का मालिक है। कोई भी इंसान चाहे वह कितना ही बड़ा मुनकिर (इनकार करने वाला) क्यों न हो, जब उससे पूछा जाता है कि यह आसमान, यह ज़मीन, ये पहाड़, ये समंदर, ये सितारे — इन सबका मालिक कौन है? तो वह बिना किसी झिझक के कहता है: "अल्लाह।" यह उसकी फ़ितरत की आवाज़ है।

तो फिर हमें चाहिए कि हम उसी अल्लाह की इबादत करें, उसी के बताए रास्ते पर चलें, उसी के हुक्मों को मानें। जब हम खुद यह मानते हैं कि सब कुछ अल्लाह का है, तो हमारी ज़िंदगी भी अल्लाह के हुक्म के मुताबिक होनी चाहिए। यही सच्ची ईमानदारी है, और यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों की कामयाबी तक पहुँचाता है।

अल्लाह तआला हम सबको सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 87-91 — अल-मोमिनुन

87سَيَقُولُونَ لِلَّهِ ۚ قُلْ أَفَلَا تَتَّقُونَ
अब तुम कहो तो क्या तुम अब भी (उससे) नहीं डरोगे
88قُلْ مَن بِيَدِهِ مَلَكُوتُ كُلِّ شَيْءٍ وَهُوَ يُجِيرُ وَلَا يُجَارُ عَلَيْهِ إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
(ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो कि भला अगर तुम कुछ जानते हो (तो बताओ) कि वह कौन शख्स है- जिसके एख्तेयार में हर चीज़ की बादशाहत है वह (जिसे चाहता है) पनाह देता है और उस (के अज़ाब) से पनाह नहीं दी जा सकती
89سَيَقُولُونَ لِلَّهِ ۚ قُلْ فَأَنَّىٰ تُسْحَرُونَ
तो ये लोग फौरन बोल उठेंगे कि (सब एख्तेयार) ख़ुदा ही को है- अब तुम कह दो कि तुम पर जादू कहाँ किया जाता है
90بَلْ أَتَيْنَاهُم بِالْحَقِّ وَإِنَّهُمْ لَكَاذِبُونَ
बात ये है कि हमने उनके पास हक़ बात पहुँचा दी और ये लोग यक़ीनन झूठे हैं
91مَا اتَّخَذَ اللَّهُ مِن وَلَدٍ وَمَا كَانَ مَعَهُ مِنْ إِلَٰهٍ ۚ إِذًا لَّذَهَبَ كُلُّ إِلَٰهٍ بِمَا خَلَقَ وَلَعَلَا بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ ۚ سُبْحَانَ اللَّهِ عَمَّا يَصِفُونَ
न तो अल्लाह ने किसी को (अपना) बेटा बनाया है और न उसके साथ कोई और ख़ुदा है (अगर ऐसा होता) उस वक्त हर खुदा अपने अपने मख़लूक़ को लिए लिए फिरता और यक़ीनन एक दूसरे पर चढ़ाई करता
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अनुवाद — अल-मोमिनुन 89

सूरा अल-मोमिनुन आयत 89 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो ये लोग फौरन बोल उठेंगे कि (सब एख्तेयार) ख़ुदा…

सूरा आयत 89/118 — अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मोमिनुन सुनें, अल-मोमिनुन अनुवाद, अल-मोमिनुन mp3, अल-मोमिनुन pdf. आयत 87–91. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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