अल-मोमिनुन · 90/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
بَلْ أَتَيْنَاهُم بِالْحَقِّ وَإِنَّهُمْ لَكَاذِبُونَ ۝٩٠
Bal atainaahum bil haqqi wa innahum lakaaziboon
📖 हिंदी अर्थ
बात ये है कि हमने उनके पास हक़ बात पहुँचा दी और ये लोग यक़ीनन झूठे हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • بِالْحَقِّ: सत्य के साथ, पूर्ण सत्यता और यथार्थता के साथ।
  • لَكَاذِبُونَ: निश्चय ही वे झूठे हैं।

तफ़सीर:

यानी हालात कुछ और ही हैं, जैसा वे (मक्का के मुशरिकीन) समझते या दावा करते हैं। सच्चाई यह है कि हमने उनके पास सत्य (हक़) भेजा — यानी मुहम्मद (ﷺ) को सच्चे दीन और स्पष्ट सत्य के साथ भेजा, जिसमें कोई संदेह नहीं। यह सत्य उनके मिथ्या विचारों, झूठे देवताओं और बातिल अक़ीदों का खंडन करता है। और वे जो अल्लाह के लिए साझीदार (शिर्क) ठहराते हैं, या यह दावा करते हैं कि अल्लाह की कोई संतान है, या पुनरुत्थान (आख़िरत) को झुठलाते हैं — ये सब उनके झूठ हैं। वे अपने इन दावों में बिल्कुल झूठे हैं, क्योंकि अल्लाह इन सब से पाक और उच्च है।

यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य हमेशा स्पष्ट और प्रमाणित होता है, और असत्य चाहे कितना भी प्रबल क्यों न दिखे, अंततः वह मिथ्या ही होता है। जो लोग सत्य को ठुकराते हैं, वे वास्तव में अपने ही झूठ में उलझे रहते हैं। अल्लाह ने अपने रसूल (ﷺ) को जो सत्य दिया, वही सच्चाई है, और उसके आगे हर झूठ बेबस है। यह हमारे लिए एक बड़ी शिक्षा है कि हम सत्य को अपनाएँ, उस पर दृढ़ रहें, और किसी भी प्रकार के शिर्क या झूठे विश्वास से बचें। सत्य का मार्ग ही कल्याण का मार्ग है, और अल्लाह का दीन ही सच्चा दीन है। जो इस सत्य को स्वीकार कर ले, वह सफल है, और जो इसे झुठलाए, वह घाटे में रहेगा। अल्लाह हमें सत्य को समझने और उस पर चलने की तौफ़ीक़ दे।



📜 आयत 88-92 — सूरा अल-मोमिनुन

88قُلْ مَن بِيَدِهِ مَلَكُوتُ كُلِّ شَيْءٍ وَهُوَ يُجِيرُ وَلَا يُجَارُ عَلَيْهِ إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
(ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो कि भला अगर तुम कुछ जानते हो (तो बताओ) कि वह कौन शख्स है- जिसके एख्तेयार में हर चीज़ की बादशाहत है वह (जिसे चाहता है) पनाह देता है और उस (के अज़ाब) से पनाह नहीं दी जा सकती
89سَيَقُولُونَ لِلَّهِ ۚ قُلْ فَأَنَّىٰ تُسْحَرُونَ
तो ये लोग फौरन बोल उठेंगे कि (सब एख्तेयार) ख़ुदा ही को है- अब तुम कह दो कि तुम पर जादू कहाँ किया जाता है
90بَلْ أَتَيْنَاهُم بِالْحَقِّ وَإِنَّهُمْ لَكَاذِبُونَ
बात ये है कि हमने उनके पास हक़ बात पहुँचा दी और ये लोग यक़ीनन झूठे हैं
91مَا اتَّخَذَ اللَّهُ مِن وَلَدٍ وَمَا كَانَ مَعَهُ مِنْ إِلَٰهٍ ۚ إِذًا لَّذَهَبَ كُلُّ إِلَٰهٍ بِمَا خَلَقَ وَلَعَلَا بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ ۚ سُبْحَانَ اللَّهِ عَمَّا يَصِفُونَ
न तो अल्लाह ने किसी को (अपना) बेटा बनाया है और न उसके साथ कोई और ख़ुदा है (अगर ऐसा होता) उस वक्त हर खुदा अपने अपने मख़लूक़ को लिए लिए फिरता और यक़ीनन एक दूसरे पर चढ़ाई करता
92عَالِمِ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ فَتَعَالَىٰ عَمَّا يُشْرِكُونَ
(और ख़ूब जंग होती) जो जो बाते ये लोग (ख़ुदा की निस्बत) बयान करते हैं उस से ख़ुदा पाक व पाकीज़ा है वह पोशीदा और हाज़िर (सबसे) खुदा वाक़िफ है ग़रज़ वह उनके शिर्क से (बिल्कुल पाक और) बालातर है
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
90आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 90

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Thursday, October 1, 2026

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