अल-फुरकान · 61/77
अनुवाद उच्चारण — अल-फुरकान
تَبَارَكَ الَّذِي جَعَلَ فِي السَّمَاءِ بُرُوجًا وَجَعَلَ فِيهَا سِرَاجًا وَقَمَرًا مُّنِيرًا ۝٦١
Tabaarakal lazee ja`ala fis samaaa`i buroojanw wa ja`ala feehaa siraajanw wa qamaram muneeraa
📖 हिंदी अर्थ
बहुत बाबरकत है वह ख़ुदा जिसने आसमान में बुर्ज बनाए और उन बुर्जों में (आफ़ताब का) चिराग़ और जगमगाता चाँद बनाया
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَبَارَكَ: बहुत बरकत वाला, अत्यंत पवित्र और महान।
  • بُرُوجًا: बड़े-बड़े सितारे, आकाश के महल, या राशि चक्र (ज़ोडियाक) के बारह घराने।
  • سِرَاجًا: चमकता हुआ दीपक, यहाँ अर्थ सूर्य से है।
  • مُنِيرًا: रोशनी देने वाला, प्रकाशमान।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला कितना बड़ा बरकतों वाला और महान है! उसकी कुदरत के नज़ारे देखिए—उसने आसमान में बड़े-बड़े सितारों के महल बनाए, जो रात की सजावट हैं और जिनके ज़रिए इंसान अपना रास्ता पहचानता है। ये बारह बुर्ज (राशि चक्र) हैं—हमल, सौर, जौज़ा, सरतान, असद, सुनबुला, मीज़ान, अक़रब, क़ौस, जदी, दलू और हूत—जो सितारों के मुक़ामात हैं और जिनमें सूरज और चाँद की चाल का निज़ाम छिपा है।

फिर उसी आसमान में उसने एक चमकता हुआ दीपक (सूरज) रखा, जो दिन में रोशनी बिखेरता है, और एक चाँद रखा जो रात में ज़मीन को मुलायम रोशनी से नहलाता है। सूरज अपनी तेज़ रोशनी से दिन को उजाला देता है, और चाँद सूरज की रोशनी का अक्स लेकर रात को सुकून और रहमत का ज़रिया बनता है।

इस आयत में अल्लाह ने अपनी कुदरत के दो बड़े नज़ारे दिखाए हैं—एक तो आसमान के सितारों का सिस्टम, जो अद्भुत निज़ाम पर चलता है, और दूसरा सूरज-चाँद का जोड़ा, जो इंसान की ज़िंदगी का आधार है। अगर ये दोनों न हों, तो न दिन का पता चले, न रात का, न मौसम बदलें, न फ़सलें उगें।

ये नज़ारे सिर्फ़ देखने के लिए नहीं हैं, बल्कि इनमें अल्लाह की तौहीद (एकता) और कुदरत की निशानियाँ हैं। जो इंसान इन पर ग़ौर करे, वह समझ जाता है कि यह सब किसी बड़े कारीगर का काम है। यही सोच इंसान को अल्लाह के करीब लाती है और उसके दिल में शुक्र और मुहब्बत पैदा करती है।

तो जब आप रात को आसमान की तरफ़ देखें, तो याद करें कि ये सितारे, ये चाँद, ये सूरज—सब उसी ज़ात के इशारे पर चल रहे हैं जो सबसे बरकत वाला और सबसे महान है। उसकी तारीफ़ करें, उसकी नेमतों का शुक्र अदा करें, और उसकी कुदरत से सबक़ लें कि जो इतनी बड़ी कायनात का मालिक है, वही हमारी छोटी-छोटी ज़रूरतों का भी ख़याल रखता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 59-63 — अल-फुरकान

59الَّذِي خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا فِي سِتَّةِ أَيَّامٍ ثُمَّ اسْتَوَىٰ عَلَى الْعَرْشِ ۚ الرَّحْمَٰنُ فَاسْأَلْ بِهِ خَبِيرًا
जिसने सारे आसमान व ज़मीन और जो कुछ उन दोनों में है छह: दिन में पैदा किया फिर अर्श (के बनाने) पर आमादा हुआ और वह बड़ा मेहरबान है तो तुम उसका हाल किसी बाख़बर ही से पूछना
60وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ اسْجُدُوا لِلرَّحْمَٰنِ قَالُوا وَمَا الرَّحْمَٰنُ أَنَسْجُدُ لِمَا تَأْمُرُنَا وَزَادَهُمْ نُفُورًا ۩
और जब उन कुफ्फारों से कहा जाता है कि रहमान (ख़ुदा) को सजदा करो तो कहते हैं कि रहमान क्या चीज़ है तुम जिसके लिए कहते हो हम उस का सजदा करने लगें और (इससे) उनकी नफरत और बढ़ जाती है (60) सजदा
61تَبَارَكَ الَّذِي جَعَلَ فِي السَّمَاءِ بُرُوجًا وَجَعَلَ فِيهَا سِرَاجًا وَقَمَرًا مُّنِيرًا
बहुत बाबरकत है वह ख़ुदा जिसने आसमान में बुर्ज बनाए और उन बुर्जों में (आफ़ताब का) चिराग़ और जगमगाता चाँद बनाया
62وَهُوَ الَّذِي جَعَلَ اللَّيْلَ وَالنَّهَارَ خِلْفَةً لِّمَنْ أَرَادَ أَن يَذَّكَّرَ أَوْ أَرَادَ شُكُورًا
और वही तो वह (ख़ुदा) है जिसने रात और दिन (एक) को (एक का) जानशीन बनाया (ये) उस के (समझने के) लिए है जो नसीहत हासिल करना चाहे या शुक्र गुज़ारी का इरादा करें
63وَعِبَادُ الرَّحْمَٰنِ الَّذِينَ يَمْشُونَ عَلَى الْأَرْضِ هَوْنًا وَإِذَا خَاطَبَهُمُ الْجَاهِلُونَ قَالُوا سَلَامًا
और (ख़ुदाए) रहमान के ख़ास बन्दे तो वह हैं जो ज़मीन पर फिरौतनी के साथ चलते हैं और जब जाहिल उनसे (जिहालत) की बात करते हैं तो कहते हैं कि सलाम (तुम सलामत रहो)
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अनुवाद — अल-फुरकान 61

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Tuesday, August 18, 2026

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