Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- नذير: डराने वाला, सचेत करने वाला
- मुबीन: स्पष्ट, प्रत्यक्ष, खुला हुआ
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने अपने नबी हज़रत शुऐब अलैहिस्सलाम की ज़ुबान से ये बात बयान की है। यहाँ नबी अपनी उम्मत को साफ़-साफ़ बता रहे हैं कि मैं कोई ऐसा व्यक्ति नहीं हूँ जो अपनी मर्ज़ी से कुछ करूँ या अपनी तरफ़ से कोई बात कहूँ। मेरा काम सिर्फ़ और सिर्फ़ एक है — और वो है अल्लाह का पैग़ाम पहुँचाना और लोगों को उसके अज़ाब से डराना। मैं एक स्पष्ट और खुला हुआ डराने वाला हूँ।
इस आयत में नबी शुऐब अलैहिस्सलाम अपनी क़ौम के उन लोगों को जवाब दे रहे हैं जो माँग कर रहे थे कि आप उन ग़रीब और कमज़ोर ईमान वालों को अपने पास से दूर कर दें, ताकि हम आपके पास आएँ और आपकी बात मानें। नबी ने साफ़ इनकार कर दिया कि मैं ऐसा नहीं कर सकता। मेरा काम सिर्फ़ अल्लाह का पैग़ाम पहुँचाना है — चाहे वो अमीर सुने या ग़रीब, चाहे वो ऊँचे दर्जे वाला हो या नीचे। अल्लाह के दीन में किसी को इसलिए दूर नहीं किया जा सकता कि वो ग़रीब है या कमज़ोर है। ईमान की दौलत सबसे बड़ी दौलत है, और ये किसी ज़ात या मर्तबे की मोहताज नहीं।
ये आयत हमें एक बहुत बड़ी सीख देती है कि इस्लाम में बराबरी है। अल्लाह के नबी किसी को छोटा नहीं समझते। जो भी ईमान लाए, वो उनके लिए अज़ीज़ है। और ये भी सीख मिलती है कि एक दाई (पैग़ाम पहुँचाने वाले) का काम सिर्फ़ सच्चाई बयान करना है, लोगों की ख़्वाहिशों के मुताबिक़ अपने पैग़ाम को नहीं बदलना।
प्यारे भाइयों और बहनों! ये आयत हमें बताती है कि अल्लाह के रास्ते पर चलने वालों को किसी की परवाह नहीं करनी चाहिए — न अमीरों की ख़ुशामद करनी है, न ग़रीबों को हक़ीर समझना है। सच्चाई पर क़ायम रहना ही असली इम्तिहान है। और जो शख्स अल्लाह के दीन की दावत देता है, उसे सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा का दरमियानी (मध्यस्थ) होना चाहिए, न कि लोगों की रज़ा का। याद रखिए, क़यामत के दिन हमसे पूछा जाएगा कि हमने अल्लाह का पैग़ाम सुनाया या नहीं — ये नहीं पूछा जाएगा कि कितने लोगों ने माना। दावत का काम हमारा है, हिदायत अल्लाह के हाथ में है।
📜 आयत 113-117 — सूरा अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 115
सूरा अश-शुआरा आयत 115 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मै तो सिर्फ (अज़ाबे ख़ुदा से) साफ साफ डराने वाला…सूरा आयत 115/227 — सूरा अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शुआरा सुनें, सूरा अश-शुआरा अनुवाद, सूरा अश-शुआरा mp3, सूरा अश-शुआरा pdf. आयत 113–117. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अश-शुआरा
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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