अश-शुआरा · 116/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
قَالُوا لَئِن لَّمْ تَنتَهِ يَا نُوحُ لَتَكُونَنَّ مِنَ الْمَرْجُومِينَ ۝١١٦
Qaaloo la`il lam tantahi yaa Noohu latakoonanna minal marjoomeen
📖 हिंदी अर्थ
वह लोग कहने लगे ऐ नूह अगर तुम अपनी हरकत से बाज़ न आओगे तो ज़रुर संगसार कर दिए जाओगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لَئِن لَّمْ تَنتَهِ – यदि तुम रुके नहीं / बाज़ नहीं आए
  • يَا نُوحُ – ऐ नूह!
  • لَتَكُونَنَّ مِنَ الْمَرْجُومِينَ – तो तुम निश्चित रूप से पत्थर मारकर मारे जाने वालों में से हो जाओगे

तफ़सीर:

जब हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम ने देखा कि वे अपनी दावत और नसीहत से बाज़ नहीं आ रहे हैं, और न ही वे उनकी धमकियों से डरते हैं, तो उन्होंने बातचीत और मुनाज़रा छोड़कर खुली धमकी का रास्ता अपनाया। उन्होंने कहा: "ऐ नूह! यदि तुमने अपनी इस बात से और इस दावत से तौबा नहीं किया और हमारे माबूदों को बुरा कहने से बाज़ नहीं आए, तो हम तुम्हें पत्थर मारकर क़त्ल कर देंगे।"

यह धमकी सिर्फ़ जान से मारने की नहीं थी, बल्कि उसमें अपमान और रुसवाई भी शामिल थी। वे चाहते थे कि नूह (अलैहिस्सलाम) को इस तरह सज़ा दें कि दूसरे लोगों के लिए वह एक सबक़ बन जाए। यह उनकी सख़्त दिली, हठधर्मिता और सत्य के प्रति अंधी दुश्मनी का सबूत था।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हक़ (सत्य) के दावेदारों को हमेशा मुख़ालिफ़ों की धमकियों और डराने-धमकाने का सामना करना पड़ता है। लेकिन अल्लाह के नबी और उनके सच्चे पैरोकार कभी भी इन धमकियों से डरकर अपने रास्ते से नहीं हटते। हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने 950 साल तक अपनी क़ौम को दावत दी, और जब वे धमकियों पर उतर आए, तो भी वे डटे रहे और अल्लाह पर भरोसा किया।

यह हमारे लिए भी एक बड़ी सीख है कि जब हम सच्चाई और नेकी की राह पर चलते हैं, तो मुख़ालिफ़त और धमकियाँ आएंगी ही, लेकिन हमें अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और अपने ईमान और अमल पर क़ायम रहना चाहिए। अल्लाह अपने नेक बंदों की मदद करता है और उन्हें कामयाबी देता है, चाहे दुश्मन कितनी भी कोशिशें कर लें।

🎧 सुनें

📜 आयत 114-118 — अश-शुआरा

114وَمَا أَنَا بِطَارِدِ الْمُؤْمِنِينَ
काश तुम (इतनी) समझ रखते और मै तो ईमानदारों को अपने पास से निकालने वाला नहीं
115إِنْ أَنَا إِلَّا نَذِيرٌ مُّبِينٌ
मै तो सिर्फ (अज़ाबे ख़ुदा से) साफ साफ डराने वाला हूँ
116قَالُوا لَئِن لَّمْ تَنتَهِ يَا نُوحُ لَتَكُونَنَّ مِنَ الْمَرْجُومِينَ
वह लोग कहने लगे ऐ नूह अगर तुम अपनी हरकत से बाज़ न आओगे तो ज़रुर संगसार कर दिए जाओगे
117قَالَ رَبِّ إِنَّ قَوْمِي كَذَّبُونِ
नूह ने अर्ज की परवरदिगार मेरी क़ौम ने यक़ीनन मुझे झुठलाया
118فَافْتَحْ بَيْنِي وَبَيْنَهُمْ فَتْحًا وَنَجِّنِي وَمَن مَّعِيَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ
तो अब तू मेरे और इन लोगों के दरमियान एक क़तई फैसला कर दे और मुझे और जो मोमिनीन मेरे साथ हें उनको नजात दे
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीRevelation
116आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 116

सूरा अश-शुआरा आयत 116 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह लोग कहने लगे ऐ नूह अगर तुम अपनी हरकत…

सूरा आयत 116/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 114–118. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए