अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَئِن لَّمْ تَنتَهِ – यदि तुम रुके नहीं / बाज़ नहीं आए
- يَا نُوحُ – ऐ नूह!
- لَتَكُونَنَّ مِنَ الْمَرْجُومِينَ – तो तुम निश्चित रूप से पत्थर मारकर मारे जाने वालों में से हो जाओगे
तफ़सीर:
जब हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम ने देखा कि वे अपनी दावत और नसीहत से बाज़ नहीं आ रहे हैं, और न ही वे उनकी धमकियों से डरते हैं, तो उन्होंने बातचीत और मुनाज़रा छोड़कर खुली धमकी का रास्ता अपनाया। उन्होंने कहा: "ऐ नूह! यदि तुमने अपनी इस बात से और इस दावत से तौबा नहीं किया और हमारे माबूदों को बुरा कहने से बाज़ नहीं आए, तो हम तुम्हें पत्थर मारकर क़त्ल कर देंगे।"
यह धमकी सिर्फ़ जान से मारने की नहीं थी, बल्कि उसमें अपमान और रुसवाई भी शामिल थी। वे चाहते थे कि नूह (अलैहिस्सलाम) को इस तरह सज़ा दें कि दूसरे लोगों के लिए वह एक सबक़ बन जाए। यह उनकी सख़्त दिली, हठधर्मिता और सत्य के प्रति अंधी दुश्मनी का सबूत था।
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हक़ (सत्य) के दावेदारों को हमेशा मुख़ालिफ़ों की धमकियों और डराने-धमकाने का सामना करना पड़ता है। लेकिन अल्लाह के नबी और उनके सच्चे पैरोकार कभी भी इन धमकियों से डरकर अपने रास्ते से नहीं हटते। हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने 950 साल तक अपनी क़ौम को दावत दी, और जब वे धमकियों पर उतर आए, तो भी वे डटे रहे और अल्लाह पर भरोसा किया।
यह हमारे लिए भी एक बड़ी सीख है कि जब हम सच्चाई और नेकी की राह पर चलते हैं, तो मुख़ालिफ़त और धमकियाँ आएंगी ही, लेकिन हमें अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और अपने ईमान और अमल पर क़ायम रहना चाहिए। अल्लाह अपने नेक बंदों की मदद करता है और उन्हें कामयाबी देता है, चाहे दुश्मन कितनी भी कोशिशें कर लें।
📜 आयत 114-118 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 116
सूरा अश-शुआरा आयत 116 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह लोग कहने लगे ऐ नूह अगर तुम अपनी हरकत…सूरा आयत 116/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 114–118. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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