Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بِطَارِدِ: भगाने वाला, निकाल देने वाला
- الْمُؤْمِنِينَ: ईमान लाने वाले, सच्चे विश्वासी
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की कहानी से संबंधित है, जब उनकी क़ौम के बड़े लोगों ने उनसे कहा था कि जो ग़रीब और कमज़ोर लोग तुम पर ईमान लाए हैं, उन्हें अपने पास से भगा दो, तभी हम तुम्हारी बात मानेंगे। इस पर अल्लाह के नबी ने स्पष्ट और दृढ़ उत्तर दिया कि मैं कभी भी उन सच्चे मोमिनों को अपने से दूर नहीं कर सकता, चाहे उनकी सामाजिक हैसियत कुछ भी हो।
यह आयत हमें एक महत्वपूर्ण शिक्षा देती है कि इस्लाम में किसी भी इंसान की अहमियत उसके धन, पद या जाति से नहीं, बल्कि उसके ईमान और अच्छे आचरण से है। अल्लाह के नबी कभी भी किसी को उसकी दुनियावी हैसियत की वजह से नहीं भगाते, बल्कि वे तो सभी को समान रूप से प्यार करते हैं और उनकी इज़्ज़त करते हैं।
इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि सच्चे दीन की दावत में किसी भी इंसान को कमतर नहीं समझना चाहिए। अल्लाह के पास सबसे प्यारा वही बंदा है जो तक़वा (परहेज़गारी) रखता है, चाहे वह ग़रीब हो या अमीर। रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सीख यही है कि हमें हर इंसान के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए और किसी को उसकी दुनियावी स्थिति के कारण अपने से दूर नहीं करना चाहिए।
यह आयत हमें यह भी बताती है कि ईमान की मज़बूती और अल्लाह के दीन पर साबित क़दम रहने के लिए हमें दुनियावी दबावों और लोगों की माँगों के आगे नहीं झुकना चाहिए। हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम के बड़े लोगों की बात नहीं मानी और सच्चाई पर डटे रहे, यही वजह है कि अल्लाह ने उन्हें कामयाबी अता की।
आज के दौर में भी हमें इसी सीख पर अमल करने की ज़रूरत है। हमें कभी भी किसी इंसान को उसकी ग़रीबी, रंग, नस्ल या सामाजिक दर्जे की वजह से अपमानित नहीं करना चाहिए। इस्लाम की खूबसूरती यही है कि यहाँ हर इंसान को बराबरी का दर्जा दिया गया है और सबसे बेहतर वही है जो अल्लाह का सबसे ज़्यादा पाबंद हो।
📜 आयत 112-116 — सूरा अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 114
सूरा अश-शुआरा आयत 114 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : काश तुम (इतनी) समझ रखते और मै तो ईमानदारों को…सूरा आयत 114/227 — सूरा अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शुआरा सुनें, सूरा अश-शुआरा अनुवाद, सूरा अश-शुआरा mp3, सूरा अश-शुआरा pdf. आयत 112–116. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अश-शुआरा
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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