अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَفَرَأَيْتَ — क्या आपने देखा / क्या आपने ग़ौर किया?
- مَتَّعْنَاهُمْ — हमने उन्हें आराम-आसाइश दी, सुख-सुविधाएँ प्रदान कीं
- سِنِينَ — कई वर्षों तक, लंबी अवधि
तफ़सीर:
ऐ नबी! क्या आपने इस बात पर ग़ौर किया है कि अगर हम इन काफ़िरों को — जो आपके लाए हुए ईमान से मुँह मोड़ रहे हैं — कई वर्षों तक दुनिया की नेअमतों से भरपूर ज़िंदगी दे दें, उनकी उम्रें लंबी कर दें, उन्हें खूब सुख-चैन से जीने दें, और उन पर अज़ाब को टालते रहें, तो क्या इस लंबी मोहलत और दुनियावी आराम का उन्हें कोई फ़ायदा पहुँचेगा?
हरगिज़ नहीं! क्योंकि जब हमारा अज़ाब आ जाएगा — चाहे वह कितनी भी देर से आए — तो यह सारी नेअमतें और लंबी उम्रें उनके किसी काम न आएँगी। यह सिर्फ़ उनकी आज़माइश और इम्तिहान है। अल्लाह तआला उन्हें मोहलत इसलिए दे रहा है ताकि वह अपनी ग़लतियों से बाज़ आएँ, तौबा करें और ईमान लाएँ।
लेकिन अफ़सोस! यह लोग इस मोहलत को अपनी ताक़त और बड़ाई समझ बैठते हैं। वह यह नहीं समझते कि अल्लाह की पकड़ कितनी सख्त है। जब अज़ाब आ जाएगा, तो न तो लंबी उम्रें काम आएँगी, न दौलत, न औलाद, न ताक़त।
यह आयत हम सबके लिए एक बड़ी नसीहत है कि दुनिया की चमक-दमक और लंबी उम्र पर हमें नाज़ नहीं करना चाहिए। असली कामयाबी उसी की है जो अल्लाह की राह में अपनी ज़िंदगी गुज़ारे, उसके हुक्मों पर अमल करे और उसकी रहमत का हक़दार बने। अल्लाह तआला की रहमत और जन्नत की नेअमतें उन लोगों के लिए हैं जो ईमान लाते हैं और नेक अमल करते हैं।
याद रखिए! दुनिया की ज़िंदगी चाहे कितनी भी लंबी हो, एक दिन खत्म होनी है। और उसके बाद का जीवन ही असली जीवन है — जो हमेशा रहने वाला है। इसलिए हमें चाहिए कि इस छोटी सी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा में गुज़ारें, ताकि आख़िरत में हमें कामयाबी मिले।
📜 आयत 203-207 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 205
सूरा अश-शुआरा आयत 205 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो क्या तुमने ग़ौर किया कि अगर हम उनको सालो…सूरा आयत 205/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 203–207. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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