अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَفَبِعَذَابِنَا – क्या हमारे अज़ाब (यातना) के साथ
- يَسْتَعْجِلُونَ – वे जल्दी मांग रहे हैं
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन काफ़िरों की उस हालत पर अचरज और इस्तिफ़हाम (प्रश्नवाचक अंदाज़) से पर्दा उठाती है जो नबी करीम ﷺ की धमकी पर मज़ाक़ उड़ाते हुए कहते थे: “ये अज़ाब कब आएगा? हमें जल्दी दिखाओ!” गोया वे अपनी नादानी और सरकशी में अल्लाह के अज़ाब को दूर समझकर उसका मज़ाक़ उड़ा रहे थे।
अल्लाह तआला फ़रमाता है: क्या ये लोग हमारे अज़ाब की जल्दी मचा रहे हैं? यानी उन्हें अपनी इस जल्दबाज़ी पर शर्म आनी चाहिए, क्योंकि अल्लाह का अज़ाब कोई खिलौना नहीं कि जब चाहें बुला लें। यह उनकी नादानी की इंतिहा है कि वे उस चीज़ की माँग कर रहे हैं जो उनके लिए तबाही और बर्बादी का सबब बनेगी।
अल्लाह की रहमत और उसका इंसाफ़ यह है कि वह जल्दी अज़ाब नहीं भेजता, बल्कि लोगों को मौका देता है कि वे तौबा कर लें और अपनी ग़लतियों से बाज़ आ जाएँ। लेकिन ये लोग उसी मोहलत (ढील) को अपनी कमज़ोरी समझ बैठे और माँगने लगे कि अज़ाब जल्दी लाओ।
अगर वे ज़रा सोचते तो समझ जाते कि अज़ाब की जल्दी माँगना अपनी मौत को बुलाना है। क़ुरआन हमें सिखाता है कि हमें अल्लाह की रहमत की तरफ़ दौड़ना चाहिए, उसकी मग़फ़िरत तलब करनी चाहिए, और उसके अज़ाब से डरना चाहिए। अल्लाह का अज़ाब जब आता है तो किसी को नहीं बख्शता, और फिर पछतावा किसी काम नहीं आता।
यह आयत हर उस शख्स के लिए नसीहत है जो अल्लाह की नाफ़रमानी पर मुड़ा हुआ है और उसकी पकड़ को दूर समझता है। अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और उसका अज़ाब दर्दनाक है। हमें चाहिए कि हम अपने रब की रहमत के भूखे रहें, उसके अज़ाब से डरें, और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक़ ढालें — क्योंकि सच्ची कामयाबी यही है कि हम उसकी रहमत के साये में जीएँ और उसके अज़ाब से महफ़ूज़ रहें।
📜 आयत 202-206 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 204
सूरा अश-शुआरा आयत 204 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो क्या ये लोग हमारे अज़ाब की जल्दी कर रहे…सूरा आयत 204/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 202–206. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








