अश-शुआरा · 206/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
ثُمَّ جَاءَهُم مَّا كَانُوا يُوعَدُونَ ۝٢٠٦
Summa jaaa`ahum maa kaanoo yoo`adoon
📖 हिंदी अर्थ
उसके बाद जिस (अज़ाब) का उनसे वायदा किया जाता है उनके पास आ पहुँचे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ثُمَّ – फिर, इसके बाद
  • جَاءَهُم – उनके पास आया
  • مَا كَانُوا يُوعَدُونَ – वह (अज़ाब) जिसका उनसे वादा किया गया था

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में उन काफ़िरों की हालत बयान कर रहे हैं जिन्हें दुनिया में लंबी उम्र और ढेर सारी नेअमतें दी गईं, लेकिन उन्होंने इन नेअमतों का शुक्र अदा नहीं किया और नबी की दावत को झुठलाते रहे। अल्लाह फ़रमाता है कि जब उन्हें दुनिया में खूब मौज-मस्ती और आराम की ज़िंदगी दी गई, और उनके अज़ाब में देर की गई, तो क्या उन्होंने यह समझा कि यही सब कुछ है? हरगिज़ नहीं! फिर अचानक उनके पास वह अज़ाब आ पहुँचा जिसका उनसे वादा किया गया था — यानी वह यातना और सज़ा जो अल्लाह की तरफ़ से उनके इनकार और ज़ुल्म की वजह से मुक़द्दर थी।

यह अज़ाब क़यामत के दिन भी हो सकता है और दुनिया में आने वाली मुसीबतें भी। जब यह अज़ाब आ जाता है, तो न तो उनका माल काम आता है और न उनकी औलाद, न उनकी ताक़त और न ही उनके झूठे माबूद। वे बिल्कुल बेबस और लाचार हो जाते हैं, और समझ जाते हैं कि जो कुछ उन्हें दिया गया था वह सिर्फ़ एक मोहलत थी, और अब सज़ा का वक़्त आ गया है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी हक़ीक़त की तरफ़ इशारा करती है — कि अल्लाह की मोहलत (ढील) को उसकी ग़ाफ़िल होना नहीं समझना चाहिए। जब अल्लाह किसी को दुनिया में नेअमतें देता है और उसे अज़ाब में देर करता है, तो यह उसकी रहमत और इन्साफ़ की वजह से होता है, ताकि वह तौबा कर ले। लेकिन जो लोग इस मोहलत से फ़ायदा नहीं उठाते, उनके लिए अज़ाब ज़रूर आएगा — चाहे वह कितनी ही देर से क्यों न आए।

इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी के हर लम्हे को अल्लाह की इताअत में गुज़ारें, और यह न समझें कि हमें जो मोहलत मिली है वह हमेशा के लिए है। अल्लाह की तरफ़ से वादा किया गया इनाम — जन्नत — उन लोगों के लिए है जो ईमान लाए और नेक अमल करते रहे। और अज़ाब उनके लिए है जो हक़ को झुठलाते रहे। आओ, हम उन लोगों में से बनें जो अल्लाह के वादे पर यक़ीन रखते हैं और उसकी राह में दौड़ते हैं, क्योंकि अल्लाह का वादा सच्चा है और उसका अज़ाब भी सच्चा है।

🎧 सुनें

📜 आयत 204-208 — अश-शुआरा

204أَفَبِعَذَابِنَا يَسْتَعْجِلُونَ
तो क्या ये लोग हमारे अज़ाब की जल्दी कर रहे हैं
205أَفَرَأَيْتَ إِن مَّتَّعْنَاهُمْ سِنِينَ
तो क्या तुमने ग़ौर किया कि अगर हम उनको सालो साल चैन करने दे
206ثُمَّ جَاءَهُم مَّا كَانُوا يُوعَدُونَ
उसके बाद जिस (अज़ाब) का उनसे वायदा किया जाता है उनके पास आ पहुँचे
207مَا أَغْنَىٰ عَنْهُم مَّا كَانُوا يُمَتَّعُونَ
तो जिन चीज़ों से ये लोग चैन किया करते थे कुछ भी काम न आएँगी
208وَمَا أَهْلَكْنَا مِن قَرْيَةٍ إِلَّا لَهَا مُنذِرُونَ
और हमने किसी बस्ती को बग़ैर उसके हलाक़ नहीं किया कि उसके समझाने को (पहले से) डराने वाले (पैग़म्बर भेज दिए) थे
अश-शुआराकुरान सूची
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अनुवाद — अश-शुआरा 206

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Tuesday, August 18, 2026

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