Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ثُمَّ – फिर, इसके बाद
- جَاءَهُم – उनके पास आया
- مَا كَانُوا يُوعَدُونَ – वह (अज़ाब) जिसका उनसे वादा किया गया था
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में उन काफ़िरों की हालत बयान कर रहे हैं जिन्हें दुनिया में लंबी उम्र और ढेर सारी नेअमतें दी गईं, लेकिन उन्होंने इन नेअमतों का शुक्र अदा नहीं किया और नबी की दावत को झुठलाते रहे। अल्लाह फ़रमाता है कि जब उन्हें दुनिया में खूब मौज-मस्ती और आराम की ज़िंदगी दी गई, और उनके अज़ाब में देर की गई, तो क्या उन्होंने यह समझा कि यही सब कुछ है? हरगिज़ नहीं! फिर अचानक उनके पास वह अज़ाब आ पहुँचा जिसका उनसे वादा किया गया था — यानी वह यातना और सज़ा जो अल्लाह की तरफ़ से उनके इनकार और ज़ुल्म की वजह से मुक़द्दर थी।
यह अज़ाब क़यामत के दिन भी हो सकता है और दुनिया में आने वाली मुसीबतें भी। जब यह अज़ाब आ जाता है, तो न तो उनका माल काम आता है और न उनकी औलाद, न उनकी ताक़त और न ही उनके झूठे माबूद। वे बिल्कुल बेबस और लाचार हो जाते हैं, और समझ जाते हैं कि जो कुछ उन्हें दिया गया था वह सिर्फ़ एक मोहलत थी, और अब सज़ा का वक़्त आ गया है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें एक बहुत बड़ी हक़ीक़त की तरफ़ इशारा करती है — कि अल्लाह की मोहलत (ढील) को उसकी ग़ाफ़िल होना नहीं समझना चाहिए। जब अल्लाह किसी को दुनिया में नेअमतें देता है और उसे अज़ाब में देर करता है, तो यह उसकी रहमत और इन्साफ़ की वजह से होता है, ताकि वह तौबा कर ले। लेकिन जो लोग इस मोहलत से फ़ायदा नहीं उठाते, उनके लिए अज़ाब ज़रूर आएगा — चाहे वह कितनी ही देर से क्यों न आए।
इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी के हर लम्हे को अल्लाह की इताअत में गुज़ारें, और यह न समझें कि हमें जो मोहलत मिली है वह हमेशा के लिए है। अल्लाह की तरफ़ से वादा किया गया इनाम — जन्नत — उन लोगों के लिए है जो ईमान लाए और नेक अमल करते रहे। और अज़ाब उनके लिए है जो हक़ को झुठलाते रहे। आओ, हम उन लोगों में से बनें जो अल्लाह के वादे पर यक़ीन रखते हैं और उसकी राह में दौड़ते हैं, क्योंकि अल्लाह का वादा सच्चा है और उसका अज़ाब भी सच्चा है।
📜 आयत 204-208 — सूरा अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 206
सूरा अश-शुआरा आयत 206 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उसके बाद जिस (अज़ाब) का उनसे वायदा किया जाता है…सूरा आयत 206/227 — सूरा अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शुआरा सुनें, सूरा अश-शुआरा अनुवाद, सूरा अश-शुआरा mp3, सूरा अश-शुआरा pdf. आयत 204–208. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अश-शुआरा
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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