अश-शुआरा · 32/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
فَأَلْقَىٰ عَصَاهُ فَإِذَا هِيَ ثُعْبَانٌ مُّبِينٌ ۝٣٢
Fa alqaa `asaahu fa izaaa hiya su`baanum mubeen
📖 हिंदी अर्थ
बस (ये सुनते ही) मूसा ने अपनी छड़ी (ज़मीन पर) डाल दी फिर तो यकायक वह एक सरीही अज़दहा बन गया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَأَلْقَىٰ عَصَاهُ: उन्होंने (मूसा अलैहिस्सलाम) ने अपनी लाठी डाली।
  • ثُعْبَانٌ مُّبِينٌ: एक स्पष्ट (बड़ा) साँप, जो देखने वालों के लिए बिल्कुल ज़ाहिर हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब मूसा अलैहिस्सलाम ने फ़िरऔन के सामने अपनी लाठी ज़मीन पर डाली, तो वह लाठी अचानक एक विशाल और स्पष्ट साँप में बदल गई। यह कोई जादू या तमाशा नहीं था, बल्कि अल्लाह तआला की क़ुदरत का एक ज़िंदा और हक़ीक़ी मुआजिज़ा (चमत्कार) था, जो आँखों के सामने वाक़े हुआ। यह साँप इतना बड़ा और भयानक था कि देखने वालों की आँखें खुली की खुली रह गईं, और सब समझ गए कि यह साधारण जादू नहीं, बल्कि अल्लाह की तरफ़ से एक सच्चा निशान है।

यह मंज़र उन लोगों के लिए एक बड़ी नसीहत और सबक़ है कि अल्लाह की क़ुदरत के आगे हर चीज़ मुत़ी (आज्ञाकारी) है। जिस लाठी पर मूसा अलैहिस्सलाम अपना सहारा रखते थे और अपने जानवरों को हाँकते थे, उसी लाठी को अल्लाह ने अपने हुक्म से एक ज़िंदा साँप बना दिया। यह उन लोगों के लिए एक सख़्त चेतावनी थी जो हक़ को झुठला रहे थे कि अल्लाह जब चाहता है, किसी भी चीज़ को उसकी हक़ीक़त से बदल सकता है।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि अल्लाह तआला अपने नबियों की मदद ऐसे मुआजिज़ात से करता है जो इंसानी समझ से बाहर होते हैं, ताकि लोगों पर हुज्जत क़ायम हो जाए। और यह भी कि हक़ (सच्चाई) हमेशा बुलंद होती है, चाहे बातिल (झूठ) के पास कितनी भी ताक़त और जादू क्यों न हो। जिस तरह मूसा अलैहिस्सलाम की लाठी ने जादूगरों के सारे जादू को मिटा दिया, उसी तरह अल्लाह की मदद से हक़ हमेशा बातिल पर ग़ालिब आता है। यह हमारे लिए इमान की ताक़त और अल्लाह पर भरोसे की दौलत है कि जब हम सच्चे दिल से अल्लाह की तरफ़ रुजू करते हैं, तो वह हमें ऐसे हालात से निकालता है जो हमारी समझ से परे होते हैं।



📜 आयत 30-34 — अश-शुआरा

30قَالَ أَوَلَوْ جِئْتُكَ بِشَيْءٍ مُّبِينٍ
मूसा ने कहा अगरचे मैं आपको एक वाजेए व रौशन मौजिज़ा भी दिखाऊ (तो भी)
31قَالَ فَأْتِ بِهِ إِن كُنتَ مِنَ الصَّادِقِينَ
फिरऔन ने कहा (अच्छा) तो तुम अगर (अपने दावे में) सच्चे हो तो ला दिखाओ
32فَأَلْقَىٰ عَصَاهُ فَإِذَا هِيَ ثُعْبَانٌ مُّبِينٌ
बस (ये सुनते ही) मूसा ने अपनी छड़ी (ज़मीन पर) डाल दी फिर तो यकायक वह एक सरीही अज़दहा बन गया
33وَنَزَعَ يَدَهُ فَإِذَا هِيَ بَيْضَاءُ لِلنَّاظِرِينَ
और (जेब से) अपना हाथ बाहर निकाला तो यकायक देखने वालों के वास्ते बहुत सफेद चमकदार था
34قَالَ لِلْمَلَإِ حَوْلَهُ إِنَّ هَٰذَا لَسَاحِرٌ عَلِيمٌ
(इस पर) फिरऔन अपने दरबारियों से जो उसके गिर्द (बैठे) थे कहने लगा
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अनुवाद — अश-शुआरा 32

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Tuesday, August 18, 2026

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