अश-शुआरा · 40/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
لَعَلَّنَا نَتَّبِعُ السَّحَرَةَ إِن كَانُوا هُمُ الْغَالِبِينَ ۝٤٠
La`allanaa nattabi`us saharata in kaanoo humul ghaalibeen
📖 हिंदी अर्थ
या नहीं ताकि अगर जादूगर ग़ालिब और वर है तो हम लोग उनकी पैरवी करें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَعَلَّنَا – शायद हम, उम्मीद है कि हम
  • نَتَّبِعُ – हम पालन करें, हम अनुसरण करें
  • السَّحَرَةَ – जादूगरों का
  • إِن كَانُوا – यदि वे हों
  • هُمُ الْغَالِبِينَ – वे ही विजयी हों

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस समय का दृश्य प्रस्तुत करती है जब फ़िरऔन (फिरौन) और उसकी क़ौम के लोग मूसा (अलैहिस्सलाम) के मुक़ाबले के लिए जादूगरों को इकट्ठा कर रहे थे। फ़िरऔन के लोगों ने आपस में कहा कि अगर जादूगर मूसा पर ग़ालिब आ गए, तो हम उन्हीं के पीछे चल पड़ेंगे और अपने धर्म (शिर्क) पर क़ायम रहेंगे। उनका यह कहना दरअसल उनके दिलों की हालत को बयान करता है — वे सच्चाई की तलाश में नहीं थे, बल्कि अपनी मनमानी और रिवाजी धर्म को ही सच मानकर चल रहे थे। उन्होंने पहले ही तय कर लिया था कि अगर जादूगर जीत गए तो हम उन्हीं का अनुसरण करेंगे, और अगर मूसा जीत गए तो...? उन्होंने इस पहलू के बारे में सोचा ही नहीं। यह उनकी हठधर्मिता और अंधी परंपरा का प्रमाण है।

इस आयत से हमें सीख मिलती है कि इंसान को सच्चाई को अपनी पसंद और नापसंद से ऊपर रखना चाहिए। हमें हमेशा सच्चाई की तलाश में रहना चाहिए, चाहे वह किसी भी तरफ़ से आए। फ़िरऔन की क़ौम ने पहले से ही फ़ैसला कर लिया था कि वे अपने धर्म पर ही रहेंगे, चाहे सच्चाई कुछ भी हो। यही उनकी गुमराही का कारण बनी। अल्लाह तआला हमें सिखाता है कि हम खुले दिल से सच्चाई को क़बूल करें, और जब सच्चाई सामने आ जाए तो उसे मान लें, चाहे वह हमारी परंपराओं या रिवाजों के ख़िलाफ़ ही क्यों न हो।

यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह की मदद सच्चाई के साथ होती है। मूसा (अलैहिस्सलाम) अकेले थे, लेकिन उनके साथ अल्लाह की ताक़त थी। जादूगरों की तरफ़ पूरी क़ौम और फ़िरऔन की सारी सत्ता थी, लेकिन सच्चाई ने बाज़ी पलट दी। इसलिए हमें कभी भी ताक़त और तादाद पर नज़र नहीं रखनी चाहिए, बल्कि सच्चाई और अल्लाह की रज़ा पर भरोसा रखना चाहिए। अल्लाह तआला अपने नेक बंदों की हमेशा मदद करता है, चाहे दुनिया की ताक़तें कितनी ही बड़ी क्यों न हों।

🎧 सुनें

📜 आयत 38-42 — अश-शुआरा

38فَجُمِعَ السَّحَرَةُ لِمِيقَاتِ يَوْمٍ مَّعْلُومٍ
ग़रज़ वक्ते मुकर्रर हुआ सब जादूगर उस मुक़र्रर के वायदे पर जमा किए गए
39وَقِيلَ لِلنَّاسِ هَلْ أَنتُم مُّجْتَمِعُونَ
और लोगों में मुनादी करा दी गयी कि तुम लोग अब भी जमा होगे
40لَعَلَّنَا نَتَّبِعُ السَّحَرَةَ إِن كَانُوا هُمُ الْغَالِبِينَ
या नहीं ताकि अगर जादूगर ग़ालिब और वर है तो हम लोग उनकी पैरवी करें
41فَلَمَّا جَاءَ السَّحَرَةُ قَالُوا لِفِرْعَوْنَ أَئِنَّ لَنَا لَأَجْرًا إِن كُنَّا نَحْنُ الْغَالِبِينَ
अलग़रज जब सब जादूगर आ गये तो जादूगरों ने फिरऔन से कहा कि अगर हम ग़ालिब आ गए तो हमको यक़ीनन कुछ इनाम (सरकार से) मिलेगा
42قَالَ نَعَمْ وَإِنَّكُمْ إِذًا لَّمِنَ الْمُقَرَّبِينَ
फिरऔन ने कहा हा (ज़रुर मिलेगा) और (इनाम क्या चीज़ है) तुम उस वक्त (मेरे) मुकररेबीन (बारगाह) से हो गए
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अनुवाद — अश-शुआरा 40

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Tuesday, August 18, 2026

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