अश-शुआरा · 39/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
وَقِيلَ لِلنَّاسِ هَلْ أَنتُم مُّجْتَمِعُونَ ۝٣٩
Wa qeela linnaasi hal antum mujtami`oon
📖 हिंदी अर्थ
और लोगों में मुनादी करा दी गयी कि तुम लोग अब भी जमा होगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَقِيلَ لِلنَّاسِ: और लोगों से कहा गया
  • هَلْ أَنتُم مُّجْتَمِعُونَ: क्या तुम लोग इकट्ठा होने वाले हो?

विस्तृत तफ़सीर:

जब फ़िरऔन और उसके दरबारियों ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) के साथ मुक़ाबले का फ़ैसला किया, तो उन्होंने जादूगरों को इकट्ठा किया और उनके लिए एक ख़ास दिन और वक़्त मुक़र्रर किया — यानी ईद के दिन चाश्त (सुबह के वक़्त) का समय। यह दिन उनके हिसाब से बड़ी अहमियत रखता था, क्योंकि उस दिन लोग अपने काम-काज से फ़ारिग़ होकर जश्न मनाते थे और बड़ी तादाद में इकट्ठा होते थे।

फिर लोगों से कहा गया: "क्या तुम सब इकट्ठा होते हो?" — यानी लोगों को जमा होने की तरग़ीब दी गई, ताकि वे सब इस ऐतिहासिक मुक़ाबले को देखें। फ़िरऔन चाहता था कि पूरी क़ौम के सामने मूसा (अलैहिस्सलाम) को शिकस्त दी जाए, ताकि उसका दबदबा और रुतबा क़ायम रहे और लोग उसकी बात मानते रहें। उसे पूरा यक़ीन था कि उसके जादूगर मूसा (अलैहिस्सलाम) पर ग़ालिब आ जाएँगे, इसलिए उसने लोगों को इकट्ठा होने की तरग़ीब दी ताकि वे उसकी ताक़त का नज़ारा करें और उसका ख़ौफ़ उनके दिलों में और बढ़ जाए।

इस आयत में हमें यह सबक़ मिलता है कि बातिल (झूठ) की ताक़तें चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, वह हमेशा अपनी नुमाइश करने की कोशिश करती है, लेकिन अल्लाह का फ़ैसला हमेशा सच्चाई के पक्ष में होता है। फ़िरऔन ने सोचा था कि वह इस मुक़ाबले से अपनी बादशाहत मज़बूत कर लेगा, लेकिन अल्लाह ने इसी मुक़ाबले को उसकी बर्बादी और हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की फ़तह का ज़रिया बनाया।

यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हमें कभी भी बातिल की ताक़त से डरना नहीं चाहिए। चाहे दुनिया भर के लोग किसी नाजायज़ काम पर इकट्ठा हो जाएँ, अल्लाह की मदद सच्चे लोगों के साथ होती है। जैसे उस दिन फ़िरऔन ने लोगों को इकट्ठा किया ताकि मूसा (अलैहिस्सलाम) को शर्मिंदा करे, लेकिन अल्लाह ने सच्चाई को बुलंद किया और झूठ को मिट्टी में मिला दिया। आज भी जब हम सच्चाई पर क़ायम रहते हैं, तो अल्लाह हमारी मदद करता है, चाहे मुख़ालिफ़ीन की तादाद कितनी ही ज़्यादा क्यों न हो।



📜 आयत 37-41 — सूरा अश-शुआरा

37يَأْتُوكَ بِكُلِّ سَحَّارٍ عَلِيمٍ
और तमाम शहरों में जादूगरों के जमा करने को हरकारे रवाना कीजिए कि वह लोग तमाम बड़े बड़े खिलाड़ी जादूगरों की आपके सामने ला हाज़िर करें
38فَجُمِعَ السَّحَرَةُ لِمِيقَاتِ يَوْمٍ مَّعْلُومٍ
ग़रज़ वक्ते मुकर्रर हुआ सब जादूगर उस मुक़र्रर के वायदे पर जमा किए गए
39وَقِيلَ لِلنَّاسِ هَلْ أَنتُم مُّجْتَمِعُونَ
और लोगों में मुनादी करा दी गयी कि तुम लोग अब भी जमा होगे
40لَعَلَّنَا نَتَّبِعُ السَّحَرَةَ إِن كَانُوا هُمُ الْغَالِبِينَ
या नहीं ताकि अगर जादूगर ग़ालिब और वर है तो हम लोग उनकी पैरवी करें
41فَلَمَّا جَاءَ السَّحَرَةُ قَالُوا لِفِرْعَوْنَ أَئِنَّ لَنَا لَأَجْرًا إِن كُنَّا نَحْنُ الْغَالِبِينَ
अलग़रज जब सब जादूगर आ गये तो जादूगरों ने फिरऔन से कहा कि अगर हम ग़ालिब आ गए तो हमको यक़ीनन कुछ इनाम (सरकार से) मिलेगा
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
39आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 39

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Friday, October 2, 2026

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