Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَقِيلَ لِلنَّاسِ: और लोगों से कहा गया
- هَلْ أَنتُم مُّجْتَمِعُونَ: क्या तुम लोग इकट्ठा होने वाले हो?
विस्तृत तफ़सीर:
जब फ़िरऔन और उसके दरबारियों ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) के साथ मुक़ाबले का फ़ैसला किया, तो उन्होंने जादूगरों को इकट्ठा किया और उनके लिए एक ख़ास दिन और वक़्त मुक़र्रर किया — यानी ईद के दिन चाश्त (सुबह के वक़्त) का समय। यह दिन उनके हिसाब से बड़ी अहमियत रखता था, क्योंकि उस दिन लोग अपने काम-काज से फ़ारिग़ होकर जश्न मनाते थे और बड़ी तादाद में इकट्ठा होते थे।
फिर लोगों से कहा गया: "क्या तुम सब इकट्ठा होते हो?" — यानी लोगों को जमा होने की तरग़ीब दी गई, ताकि वे सब इस ऐतिहासिक मुक़ाबले को देखें। फ़िरऔन चाहता था कि पूरी क़ौम के सामने मूसा (अलैहिस्सलाम) को शिकस्त दी जाए, ताकि उसका दबदबा और रुतबा क़ायम रहे और लोग उसकी बात मानते रहें। उसे पूरा यक़ीन था कि उसके जादूगर मूसा (अलैहिस्सलाम) पर ग़ालिब आ जाएँगे, इसलिए उसने लोगों को इकट्ठा होने की तरग़ीब दी ताकि वे उसकी ताक़त का नज़ारा करें और उसका ख़ौफ़ उनके दिलों में और बढ़ जाए।
इस आयत में हमें यह सबक़ मिलता है कि बातिल (झूठ) की ताक़तें चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, वह हमेशा अपनी नुमाइश करने की कोशिश करती है, लेकिन अल्लाह का फ़ैसला हमेशा सच्चाई के पक्ष में होता है। फ़िरऔन ने सोचा था कि वह इस मुक़ाबले से अपनी बादशाहत मज़बूत कर लेगा, लेकिन अल्लाह ने इसी मुक़ाबले को उसकी बर्बादी और हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की फ़तह का ज़रिया बनाया।
यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हमें कभी भी बातिल की ताक़त से डरना नहीं चाहिए। चाहे दुनिया भर के लोग किसी नाजायज़ काम पर इकट्ठा हो जाएँ, अल्लाह की मदद सच्चे लोगों के साथ होती है। जैसे उस दिन फ़िरऔन ने लोगों को इकट्ठा किया ताकि मूसा (अलैहिस्सलाम) को शर्मिंदा करे, लेकिन अल्लाह ने सच्चाई को बुलंद किया और झूठ को मिट्टी में मिला दिया। आज भी जब हम सच्चाई पर क़ायम रहते हैं, तो अल्लाह हमारी मदद करता है, चाहे मुख़ालिफ़ीन की तादाद कितनी ही ज़्यादा क्यों न हो।
📜 आयत 37-41 — सूरा अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 39
सूरा अश-शुआरा आयत 39 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और लोगों में मुनादी करा दी गयी कि तुम लोग…सूरा आयत 39/227 — सूरा अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शुआरा सुनें, सूरा अश-शुआरा अनुवाद, सूरा अश-शुआरा mp3, सूरा अश-शुआरा pdf. आयत 37–41. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अश-शुआरा
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


