अश-शुआरा · 95/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
وَجُنُودُ إِبْلِيسَ أَجْمَعُونَ ۝٩٥
Wa junoodu Ibleesa ajma`oon
📖 हिंदी अर्थ
(ग़रज़ सबके सब) जहन्नुम में औधें मुँह ढकेल दिए जाएँगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • जुनूदे इब्लीस: इब्लीस (शैतान) के सैनिक और उसके अनुयायी।
  • अजमऊन: सभी, सम्पूर्ण, कोई भी बाकी न छूटे।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उस भयानक दृश्य का चित्रण करती है जो क़ियामत के दिन घटित होगा। जब अल्लाह तआला अपने इनकार करने वाले बंदों को जहन्नम में डालने का आदेश देगा, तो उनके साथ इब्लीस और उसकी पूरी फ़ौज को भी जहन्नम में झोंक दिया जाएगा। इब्लीस के सैनिकों से मुराद वे सभी शैतान हैं जो इंसानों को गुमराह करते हैं, और वे सभी इंसान और जिन्न भी हैं जिन्होंने इब्लीस की आज्ञा का पालन किया और उसके रास्ते पर चले।

यहाँ अल्लाह तआला ने "अजमऊन" (सभी) शब्द से यह स्पष्ट कर दिया कि इब्लीस की फ़ौज में से कोई भी व्यक्ति बच नहीं पाएगा। चाहे वह कोई भी हो, चाहे उसने कितनी भी ताकत या चालाकी क्यों न इकट्ठा की हो — सभी को एक साथ जहन्नम में डाल दिया जाएगा। यह अल्लाह की उस अदालत का प्रमाण है जो बिल्कुल न्यायपूर्ण है — जिसने भी सत्य का विरोध किया और शैतान का साथ दिया, वह अपनी सज़ा से बच नहीं सकेगा।

इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी नसीहत है। यह हमें आगाह करती है कि शैतान का रास्ता अपनाने वालों का अंजाम क्या होगा। जो लोग शैतान के बहकावे में आकर अल्लाह की इबादत छोड़ देते हैं और बुराई पर चलते हैं, वे इसी भयानक अंजाम की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन जो लोग अल्लाह की राह पर चलते हैं, वे इस फ़ौज से अलग हैं और उनके लिए जन्नत की खुशखबरी है।

आओ हम अपने जीवन को देखें — क्या हम अल्लाह की फ़ौज में हैं या इब्लीस की फ़ौज में? जो व्यक्ति नमाज़ पढ़ता है, सच बोलता है, अमानतदार है, माँ-बाप का आदर करता है और लोगों के साथ भलाई करता है — वह अल्लाह का सिपाही है। और जो झूठ, धोखा, बुराई और अल्लाह की नाफ़रमानी पर चलता है — वह इब्लीस की फ़ौज का हिस्सा बन रहा है। अल्लाह हमें शैतान की फ़ौज से बचाकर अपनी फ़ौज में शामिल करे। आमीन।



📜 आयत 93-97 — सूरा अश-शुआरा

93مِن دُونِ اللَّهِ هَلْ يَنصُرُونَكُمْ أَوْ يَنتَصِرُونَ
क्या वह तुम्हारी कुछ मदद कर सकते हैं या वह ख़ुद अपनी आप बाहम मदद कर सकते हैं
94فَكُبْكِبُوا فِيهَا هُمْ وَالْغَاوُونَ
फिर वह (माबूद) और गुमराह लोग और शैतान का लशकर
95وَجُنُودُ إِبْلِيسَ أَجْمَعُونَ
(ग़रज़ सबके सब) जहन्नुम में औधें मुँह ढकेल दिए जाएँगे
96قَالُوا وَهُمْ فِيهَا يَخْتَصِمُونَ
और ये लोग जहन्नुम में बाहम झगड़ा करेंगे और अपने माबूद से कहेंगे
97تَاللَّهِ إِن كُنَّا لَفِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
ख़ुदा की क़सम हम लोग तो यक़ीनन सरीही गुमराही में थे
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
95आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 95

सूरा अश-शुआरा आयत 95 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ग़रज़ सबके सब) जहन्नुम में औधें मुँह ढकेल दिए जाएँगे

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Thursday, October 1, 2026

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