अश-शुआरा · 96/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
قَالُوا وَهُمْ فِيهَا يَخْتَصِمُونَ ۝٩٦
Qaaloo wa hum feehaa yakkhtasimoon
📖 हिंदी अर्थ
और ये लोग जहन्नुम में बाहम झगड़ा करेंगे और अपने माबूद से कहेंगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَخْتَصِمُونَ: आपस में झगड़ना, विवाद करना, एक-दूसरे पर दोषारोपण करना।

विस्तृत तफ़सीर:

जब अल्लाह तआला ने जहन्नम के अज़ाब का ज़िक्र किया, तो फ़रमाया कि जब काफ़िर और मुशरिक लोग जहन्नम में दाख़िल होंगे, तो वे आपस में झगड़ेंगे और एक-दूसरे को कोसेंगे। वे अपने उन नेताओं और बुज़ुर्गों से जिन्होंने दुनिया में उन्हें गुमराह किया था, लड़ेंगे और कहेंगे कि तुमने हमें सीधे रास्ते से भटकाया। वे अपनी ग़लती का इज़हार करेंगे और कहेंगे कि हम तुम्हें रब्बुल आलमीन के बराबर मानते थे, जबकि अल्लाह ही अकेला इबादत के लायक़ है। यह झगड़ा और विवाद उनके लिए अज़ाब में और इज़ाफ़ा करेगा, क्योंकि वे एक-दूसरे पर दोष डालेंगे और कोई भी ज़िम्मेदारी लेने को तैयार नहीं होगा।

यह वह मौक़ा होगा जब सच्चाई उनके सामने आ जाएगी, लेकिन वहाँ पछतावे का कोई फ़ायदा नहीं होगा। वे समझ जाएँगे कि दुनिया में उन्होंने कितनी बड़ी ग़लती की थी, जब उन्होंने अल्लाह की इबादत छोड़कर दूसरों की इबादत की। यह झगड़ा उनके लिए और अधिक यातना का कारण बनेगा, क्योंकि हर एक दूसरे को कोसेगा और अपनी बेबसी और मजबूरी का इज़हार करेगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी ज़िंदगी में किसकी बात मान रहे हैं और किसके पीछे चल रहे हैं। क़यामत के दिन हमें अपने उन लोगों से झगड़ना पड़ेगा जिन्होंने हमें गुमराह किया, लेकिन वहाँ कोई मदद नहीं मिलेगी। इसलिए आज ही हमें अल्लाह की तरफ़ रुजू करना चाहिए, उसकी इबादत करनी चाहिए और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत पर चलना चाहिए। यही वह रास्ता है जो हमें जहन्नम के झगड़े और अज़ाब से बचाएगा और जन्नत की तरफ ले जाएगा। अल्लाह तआला हम सबको सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 94-98 — सूरा अश-शुआरा

94فَكُبْكِبُوا فِيهَا هُمْ وَالْغَاوُونَ
फिर वह (माबूद) और गुमराह लोग और शैतान का लशकर
95وَجُنُودُ إِبْلِيسَ أَجْمَعُونَ
(ग़रज़ सबके सब) जहन्नुम में औधें मुँह ढकेल दिए जाएँगे
96قَالُوا وَهُمْ فِيهَا يَخْتَصِمُونَ
और ये लोग जहन्नुम में बाहम झगड़ा करेंगे और अपने माबूद से कहेंगे
97تَاللَّهِ إِن كُنَّا لَفِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
ख़ुदा की क़सम हम लोग तो यक़ीनन सरीही गुमराही में थे
98إِذْ نُسَوِّيكُم بِرَبِّ الْعَالَمِينَ
कि हम तुम को सारे जहाँन के पालने वाले (ख़ुदा) के बराबर समझते रहे
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
96आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 96

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Friday, October 2, 2026

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