अन-नमल · 58/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِم مَّطَرًا ۖ فَسَاءَ مَطَرُ الْمُنذَرِينَ ۝٥٨
Wa amtarnaa `alaihimm mataran fasaaa`a matarul munzareen
📖 हिंदी अर्थ
और (फिर तो) हमने उन लोगों पर (पत्थर का) मेंह बरसाया तो जो लोग डराए जा चुके थे उन पर क्या बुरा मेंह बरसा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • अमतरना – हमने बरसाया
  • मतरन – वर्षा (यहाँ आज़ाब की वर्षा)
  • फ़साअ – बहुत बुरा है
  • मुंज़रीन – वे लोग जिन्हें डराया गया था (चेतावनी दी गई थी)

तफ़सीर:

जब हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) की क़ौम ने हद से गुज़रकर अश्लील कर्मों को जारी रखा और अपने नबी की चेतावनी को झुठला दिया, तो अल्लाह तआला का अज़ाब उन पर नाज़िल हुआ। अल्लाह ने उन पर आसमान से पत्थरों की बारिश बरसाई — ये मिट्टी के पके हुए पत्थर (सिज्जील) थे जो उन्हें हर तरफ से घेरकर तबाह करने के लिए भेजे गए। यह वर्षा उनके लिए अत्यंत बुरी साबित हुई, क्योंकि यह रहमत की बारिश नहीं थी, बल्कि अज़ाब और तबाही का ज़रिया बनी।

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी सीख देती है कि अल्लाह की चेतावनी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। जिन लोगों को नबियों के ज़रिए आगाह किया गया और उन्होंने फिर भी अपनी सरकशी और गुनाह पर अड़े रहे, उनका अंजाम क्या हुआ — यह इतिहास का गवाह है। आज भी अल्लाह हमें क़ुरआन के ज़रिए आगाह कर रहा है कि उसकी नाफ़रमानी से बचें। यह हमारे लिए रहमत है कि हमें मौका मिला है कि हम तौबा कर लें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक ढाल लें।

अल्लाह तआला की रहमत का तक़ाज़ा है कि वह गुनाहगारों को फौरन पकड़ नहीं लेता, बल्कि उन्हें मौका देता है। लेकिन जब अज़ाब आ जाता है, तो कोई उसे टाल नहीं सकता। हमें चाहिए कि हम अपने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सुन्नत पर चलें, क़ुरआन की हिदायात पर अमल करें और उन बुराइयों से दूर रहें जो अल्लाह के ग़ज़ब का सबब बनती हैं। यही हमारी कामयाबी और नजात की राह है।



📜 आयत 56-60 — अन-नमल

56۞ فَمَا كَانَ جَوَابَ قَوْمِهِ إِلَّا أَن قَالُوا أَخْرِجُوا آلَ لُوطٍ مِّن قَرْيَتِكُمْ ۖ إِنَّهُمْ أُنَاسٌ يَتَطَهَّرُونَ
कि वह लोग बोल उठे कि लूत के खानदान को अपनी बस्ती (सदूम) से निकाल बाहर करो ये लोग बड़े पाक साफ बनना चाहते हैं
57فَأَنجَيْنَاهُ وَأَهْلَهُ إِلَّا امْرَأَتَهُ قَدَّرْنَاهَا مِنَ الْغَابِرِينَ
ग़रज हमने लूत को और उनके ख़ानदान को बचा लिया मगर उनकी बीवी कि हमने उसकी तक़दीर में पीछे रह जाने वालों में लिख दिया था
58وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِم مَّطَرًا ۖ فَسَاءَ مَطَرُ الْمُنذَرِينَ
और (फिर तो) हमने उन लोगों पर (पत्थर का) मेंह बरसाया तो जो लोग डराए जा चुके थे उन पर क्या बुरा मेंह बरसा
59قُلِ الْحَمْدُ لِلَّهِ وَسَلَامٌ عَلَىٰ عِبَادِهِ الَّذِينَ اصْطَفَىٰ ۗ آللَّهُ خَيْرٌ أَمَّا يُشْرِكُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो (उनके हलाक़ होने पर) खुदा का शुक्र और उसके बरगुज़ीदा बन्दों पर सलाम भला ख़ुदा बेहतर है या वह चीज़ जिसे ये लोग शरीके ख़ुदा कहते हैं
60أَمَّنْ خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَأَنزَلَ لَكُم مِّنَ السَّمَاءِ مَاءً فَأَنبَتْنَا بِهِ حَدَائِقَ ذَاتَ بَهْجَةٍ مَّا كَانَ لَكُمْ أَن تُنبِتُوا شَجَرَهَا ۗ أَإِلَٰهٌ مَّعَ اللَّهِ ۚ بَلْ هُمْ قَوْمٌ يَعْدِلُونَ
भला वह कौन है जिसने आसमान और ज़मीन को पैदा किया और तुम्हारे वास्ते आसमान से पानी बरसाया फिर हम ही ने पानी से दिल चस्प (ख़ुशनुमा) बाग़ उठाए तुम्हारे तो ये बस की बात न थी कि तुम उनके दरख्तों को उगा सकते तो क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद भी है (हरगिज़ नहीं) बल्कि ये लोग खुद अपने जी से गढ़ के बुतो को उसके बराबर बनाते हैं
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अनुवाद — अन-नमल 58

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Tuesday, August 18, 2026

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