अन-नमल · 87/93
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नमल
وَيَوْمَ يُنفَخُ فِي الصُّورِ فَفَزِعَ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَمَن فِي الْأَرْضِ إِلَّا مَن شَاءَ اللَّهُ ۚ وَكُلٌّ أَتَوْهُ دَاخِرِينَ ۝٨٧
Wa Yawma yunfakhu fis Soori fafazi`a man fis samaawaati wa man fil ardi illaa man shaaa`al laah; wa kullun atawhu daakhireen
📖 हिंदी अर्थ
और (उस दिन याद करो) जिस दिन सूर फूँका जाएगा तो जितने लोग आसमानों मे हैं और जितने लोग ज़मीन में हैं (ग़रज़ सब के सब) दहल जाएंगें मगर जिस शख्स को ख़ुदा चाहे (वो अलबत्ता मुतमइन रहेगा) और सब लोग उसकी बारगाह में ज़िल्लत व आजिज़ी की हालत में हाज़िर होगें

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الصُّور (सूर): एक विशेष सींग (नरसिंगा) जिसमें इसराफील (अलैहिस्सलाम) फूँक मारेंगे।
  • فَزِعَ (फ़ज़िआ): अत्यधिक भयभीत होना, घबरा जाना।
  • دَاخِرِينَ (दाख़िरीन): अपमानित, वशीभूत, पूर्ण रूप से आज्ञाकारी होकर झुके हुए।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! उस दिन को याद करो जब इसराफील (अलैहिस्सलाम) सूर (नरसिंगा) में फूँक मारेंगे। यह फूँक इतनी भयावह होगी कि आसमानों और ज़मीन में जितने भी प्राणी हैं, सभी पर अत्यधिक भय और घबराहट छा जाएगी। हर कोई इस हौलनाक मंज़र से काँप उठेगा। हालाँकि, अल्लाह तआला ने जिन्हें अपनी विशेष रहमत से इस भय से बचा लिया — जैसे कुछ फ़रिश्ते, हूरें और विशेष बंदे — वे इस भय से محفوظ रहेंगे। यह अल्लाह का विशेष अनुग्रह और कृपा होगी।

फिर उसी दिन सभी प्राणी — आसमान वाले और ज़मीन वाले — अपने रब की ओर इस हालत में हाज़िर होंगे कि वे पूरी तरह वशीभूत, झुके हुए और अपमानित होंगे। कोई भी अपनी तरफ़ से कोई बात कहने की हिम्मत नहीं करेगा। हर कोई अल्लाह के हुक्म के आगे सर झुकाए खड़ा होगा।

यह दिन हमें याद दिलाता है कि इस दुनिया की ज़िंदगी अस्थायी है। जिस अल्लाह ने हमें पैदा किया, उसी की तरफ़ हमें लौटना है। इसलिए हमें चाहिए कि आज ही अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढालें, उसकी इबादत करें और उसके हुक्मों का पालन करें। जो लोग आज अल्लाह के आगे झुकेंगे और उसकी आज्ञा मानेंगे, वे उस भयानक दिन अल्लाह की पनाह में होंगे और उस भय से محفوظ रहेंगे। यही सच्ची कामयाबी है — कि हम अपने रब के सामने आज भी वैसे ही झुके रहें, जैसे उस दिन सबको झुकना ही है।



📜 आयत 85-89 — सूरा अन-नमल

85وَوَقَعَ الْقَوْلُ عَلَيْهِم بِمَا ظَلَمُوا فَهُمْ لَا يَنطِقُونَ
इन पर (अज़ाब का) वायदा पूरा हो गया फिर ये लोग कुछ बोल भी तो न सकेंगें
86أَلَمْ يَرَوْا أَنَّا جَعَلْنَا اللَّيْلَ لِيَسْكُنُوا فِيهِ وَالنَّهَارَ مُبْصِرًا ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ
क्या इन लोगों ने ये भी न देखा कि हमने रात को इसलिए बनाया कि ये लोग इसमे चैन करें और दिन को रौशन (ताकि देखभाल करे) बेशक इसमें ईमान लाने वालों के लिए (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
87وَيَوْمَ يُنفَخُ فِي الصُّورِ فَفَزِعَ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَمَن فِي الْأَرْضِ إِلَّا مَن شَاءَ اللَّهُ ۚ وَكُلٌّ أَتَوْهُ دَاخِرِينَ
और (उस दिन याद करो) जिस दिन सूर फूँका जाएगा तो जितने लोग आसमानों मे हैं और जितने लोग ज़मीन में हैं (ग़रज़ सब के सब) दहल जाएंगें मगर जिस शख्स को ख़ुदा चाहे (वो अलबत्ता मुतमइन रहेगा) और सब लोग उसकी बारगाह में ज़िल्लत व आजिज़ी की हालत में हाज़िर होगें
88وَتَرَى الْجِبَالَ تَحْسَبُهَا جَامِدَةً وَهِيَ تَمُرُّ مَرَّ السَّحَابِ ۚ صُنْعَ اللَّهِ الَّذِي أَتْقَنَ كُلَّ شَيْءٍ ۚ إِنَّهُ خَبِيرٌ بِمَا تَفْعَلُونَ
और तुम पहाड़ों को देखकर उन्हें मज़बूर जमे हुए समझतें हो हालाकि ये (क़यामत के दिन) बादल की तरह उड़े उडे फ़िरेगें (ये भी) ख़ुदा की कारीगरी है कि जिसने हर चीज़ को ख़ूब मज़बूत बनाया है बेशक जो कुछ तुम लोग करते हो उससे वह ख़ूब वाक़िफ़ है
89مَن جَاءَ بِالْحَسَنَةِ فَلَهُ خَيْرٌ مِّنْهَا وَهُم مِّن فَزَعٍ يَوْمَئِذٍ آمِنُونَ
जो शख्स नेक काम करेगा उसके लिए उसकी जज़ा उससे कहीं बेहतर है ओर ये लोग उस दिन ख़ौफ व ख़तरे से महफूज़ रहेंगे
अन-नमलकुरान सूची
93आयत
मक्कीअवतरण स्थान
87आयत

अनुवाद — अन-नमल 87

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Monday, September 28, 2026

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