अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لِيَسْكُنُوا فِيهِ – ताकि तुम उसमें आराम पाओ (सुकून हासिल करो)।
- مُبْصِرًا – रोशन, चमकीला, जिसमें चीज़ें साफ़ दिखाई दें।
- لَآيَاتٍ – निशानियाँ, सबूत, दलीलें।
तफ़सीर (व्याख्या):
क्या इन लोगों ने कभी अपनी आँखें खोलकर नहीं देखा कि हमने रात को क्यों बनाया और दिन को क्यों बनाया? यह कोई इत्तफ़ाक़ नहीं है, बल्कि हमारी गहरी हिकमत (बुद्धिमत्ता) और रहमत का नमूना है। रात को हमने इसलिए बनाया कि इंसान उसमें सुकून पाए, उसकी थकान दूर हो, उसका बदन आराम करे, और उसकी नींद पूरी हो ताकि वह अगले दिन के काम के लिए तैयार हो सके। और दिन को हमने रोशन बनाया ताकि इंसान उसमें देख सके, अपने काम-काज कर सके, रोज़ी कमा सके और ज़िंदगी की ज़रूरतें पूरी कर सके।
यह रात और दिन का यह सिलसिला, इनका बदलना, इनका एक के बाद एक आना — यह सब कुदरत की एक ज़िंदा निशानी है। जो लोग ईमान रखते हैं, वे इन निशानियों से सबक़ लेते हैं। वे समझते हैं कि जिसने रात और दिन को बनाया, वही हमारी मौत और ज़िंदगी का भी मालिक है। जिस तरह रात के बाद दिन आता है, उसी तरह मौत के बाद ज़िंदगी आएगी। जिस तरह नींद में इंसान सुकून पाता है और फिर जागता है, उसी तरह क़ब्र की नींद के बाद वह दोबारा उठेगा।
यह कोई साधारण बात नहीं है। यह उस ख़ुदा की क़ुदरत का सबूत है जो हर चीज़ पर क़ादिर है। जो लोग इन निशानियों पर ग़ौर करते हैं, उनका ईमान मज़बूत होता है, उनका यक़ीन पक्का होता है, और वे अपने रब की नेमतों के लिए शुक्र अदा करते हैं। क्या हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि जो ख़ुदा रात और दिन को बदलता है, वह हमारी ज़रूरतों को भली-भाँति जानता है? वह हमें सुकून देता है, हमें रोशनी देता है, हमें काम करने का मौक़ा देता है — क्या यह उसकी मुहब्बत और रहमत का सबूत नहीं?
इसलिए ऐ इंसान! अपनी आँखें खोल, अपने दिल को जगा, और इन निशानियों से अपने रब को पहचान। यह क़ुरआन हमें बार-बार यही सिखाता है कि कुदरत की हर चीज़ में ख़ुदा की याद है, और जो दिल ईमान से धड़कता है, वह इन निशानियों में अपने रब की महानता देखता है। क्या हम उस ख़ुदा को नहीं मानेंगे जिसने हमारे लिए रात को सुकून और दिन को रोशनी बनाया? उसका शुक्र अदा करें, उसकी इबादत करें, और उसके हुक्मों पर चलें — यही हमारी कामयाबी है।
📜 आयत 84-88 — अन-नमल
अनुवाद — अन-नमल 86
सूरा अन-नमल आयत 86 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या इन लोगों ने ये भी न देखा कि हमने…सूरा आयत 86/93 — अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नमल सुनें, अन-नमल अनुवाद, अन-नमल mp3, अन-नमल pdf. आयत 84–88. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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