अन-नमल · 86/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
أَلَمْ يَرَوْا أَنَّا جَعَلْنَا اللَّيْلَ لِيَسْكُنُوا فِيهِ وَالنَّهَارَ مُبْصِرًا ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ ۝٨٦
Alam yaraw annaa ja`alnal laila li yaskunoo feehi wannahaara mubsiraa; inna fee zaalika la Aayaatil liqaw miny-yu`minoon
📖 हिंदी अर्थ
क्या इन लोगों ने ये भी न देखा कि हमने रात को इसलिए बनाया कि ये लोग इसमे चैन करें और दिन को रौशन (ताकि देखभाल करे) बेशक इसमें ईमान लाने वालों के लिए (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لِيَسْكُنُوا فِيهِ – ताकि तुम उसमें आराम पाओ (सुकून हासिल करो)।
  • مُبْصِرًا – रोशन, चमकीला, जिसमें चीज़ें साफ़ दिखाई दें।
  • لَآيَاتٍ – निशानियाँ, सबूत, दलीलें।

तफ़सीर (व्याख्या):

क्या इन लोगों ने कभी अपनी आँखें खोलकर नहीं देखा कि हमने रात को क्यों बनाया और दिन को क्यों बनाया? यह कोई इत्तफ़ाक़ नहीं है, बल्कि हमारी गहरी हिकमत (बुद्धिमत्ता) और रहमत का नमूना है। रात को हमने इसलिए बनाया कि इंसान उसमें सुकून पाए, उसकी थकान दूर हो, उसका बदन आराम करे, और उसकी नींद पूरी हो ताकि वह अगले दिन के काम के लिए तैयार हो सके। और दिन को हमने रोशन बनाया ताकि इंसान उसमें देख सके, अपने काम-काज कर सके, रोज़ी कमा सके और ज़िंदगी की ज़रूरतें पूरी कर सके।

यह रात और दिन का यह सिलसिला, इनका बदलना, इनका एक के बाद एक आना — यह सब कुदरत की एक ज़िंदा निशानी है। जो लोग ईमान रखते हैं, वे इन निशानियों से सबक़ लेते हैं। वे समझते हैं कि जिसने रात और दिन को बनाया, वही हमारी मौत और ज़िंदगी का भी मालिक है। जिस तरह रात के बाद दिन आता है, उसी तरह मौत के बाद ज़िंदगी आएगी। जिस तरह नींद में इंसान सुकून पाता है और फिर जागता है, उसी तरह क़ब्र की नींद के बाद वह दोबारा उठेगा।

यह कोई साधारण बात नहीं है। यह उस ख़ुदा की क़ुदरत का सबूत है जो हर चीज़ पर क़ादिर है। जो लोग इन निशानियों पर ग़ौर करते हैं, उनका ईमान मज़बूत होता है, उनका यक़ीन पक्का होता है, और वे अपने रब की नेमतों के लिए शुक्र अदा करते हैं। क्या हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि जो ख़ुदा रात और दिन को बदलता है, वह हमारी ज़रूरतों को भली-भाँति जानता है? वह हमें सुकून देता है, हमें रोशनी देता है, हमें काम करने का मौक़ा देता है — क्या यह उसकी मुहब्बत और रहमत का सबूत नहीं?

इसलिए ऐ इंसान! अपनी आँखें खोल, अपने दिल को जगा, और इन निशानियों से अपने रब को पहचान। यह क़ुरआन हमें बार-बार यही सिखाता है कि कुदरत की हर चीज़ में ख़ुदा की याद है, और जो दिल ईमान से धड़कता है, वह इन निशानियों में अपने रब की महानता देखता है। क्या हम उस ख़ुदा को नहीं मानेंगे जिसने हमारे लिए रात को सुकून और दिन को रोशनी बनाया? उसका शुक्र अदा करें, उसकी इबादत करें, और उसके हुक्मों पर चलें — यही हमारी कामयाबी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 84-88 — अन-नमल

84حَتَّىٰ إِذَا جَاءُوا قَالَ أَكَذَّبْتُم بِآيَاتِي وَلَمْ تُحِيطُوا بِهَا عِلْمًا أَمَّاذَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
यहाँ तक कि जब वह सब (ख़ुदा के सामने) आएँगें और ख़ुदा उनसे कहेगा क्या तुम ने हमारी आयतों को बगैर अच्छी तरह समझे बूझे झुठलाया-भला तुम क्या क्या करते थे और चूँकि ये लोग ज़ुल्म किया करते थे
85وَوَقَعَ الْقَوْلُ عَلَيْهِم بِمَا ظَلَمُوا فَهُمْ لَا يَنطِقُونَ
इन पर (अज़ाब का) वायदा पूरा हो गया फिर ये लोग कुछ बोल भी तो न सकेंगें
86أَلَمْ يَرَوْا أَنَّا جَعَلْنَا اللَّيْلَ لِيَسْكُنُوا فِيهِ وَالنَّهَارَ مُبْصِرًا ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ
क्या इन लोगों ने ये भी न देखा कि हमने रात को इसलिए बनाया कि ये लोग इसमे चैन करें और दिन को रौशन (ताकि देखभाल करे) बेशक इसमें ईमान लाने वालों के लिए (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
87وَيَوْمَ يُنفَخُ فِي الصُّورِ فَفَزِعَ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَمَن فِي الْأَرْضِ إِلَّا مَن شَاءَ اللَّهُ ۚ وَكُلٌّ أَتَوْهُ دَاخِرِينَ
और (उस दिन याद करो) जिस दिन सूर फूँका जाएगा तो जितने लोग आसमानों मे हैं और जितने लोग ज़मीन में हैं (ग़रज़ सब के सब) दहल जाएंगें मगर जिस शख्स को ख़ुदा चाहे (वो अलबत्ता मुतमइन रहेगा) और सब लोग उसकी बारगाह में ज़िल्लत व आजिज़ी की हालत में हाज़िर होगें
88وَتَرَى الْجِبَالَ تَحْسَبُهَا جَامِدَةً وَهِيَ تَمُرُّ مَرَّ السَّحَابِ ۚ صُنْعَ اللَّهِ الَّذِي أَتْقَنَ كُلَّ شَيْءٍ ۚ إِنَّهُ خَبِيرٌ بِمَا تَفْعَلُونَ
और तुम पहाड़ों को देखकर उन्हें मज़बूर जमे हुए समझतें हो हालाकि ये (क़यामत के दिन) बादल की तरह उड़े उडे फ़िरेगें (ये भी) ख़ुदा की कारीगरी है कि जिसने हर चीज़ को ख़ूब मज़बूत बनाया है बेशक जो कुछ तुम लोग करते हो उससे वह ख़ूब वाक़िफ़ है
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अनुवाद — अन-नमल 86

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Tuesday, August 18, 2026

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