अल-क़सस · 69/88
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़सस
وَرَبُّكَ يَعْلَمُ مَا تُكِنُّ صُدُورُهُمْ وَمَا يُعْلِنُونَ ۝٦٩
Wa Rabbuka ya`lamu maa tukinnu sudooruhum wa maa yu`linoon
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) ये लोग जो बातें अपने दिलों में छिपाते हैं और जो कुछ ज़ाहिर करते हैं तुम्हारा परवरदिगार खूब जानता है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تُكِنُّ — छिपाना, दिल में छुपाना
  • صُدُورُهُمْ — उनके सीने (दिल)
  • يُعْلِنُونَ — प्रकट करना, ज़ाहिर करना

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आपका रब हर उस चीज़ को जानता है जो इन लोगों के दिलों में छिपी होती है—चाहे वह अच्छाई हो या बुराई, ईमान हो या कुफ़्र, नेक इरादे हों या बुरी नीयतें। और वह उन सब बातों को भी जानता है जो ये लोग अपनी ज़ुबान से बोलते हैं और अपने अमल से ज़ाहिर करते हैं। उसके इल्म से कोई चीज़ छिपी नहीं है—न वह जो सीने में पनपती है और न वह जो ज़ाहिर होती है।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला का इल्म हर चीज़ पर हावी है। वह जानता है कि किसके दिल में सच्चाई के लिए जगह है और किसका दिल झूठ और हठ पर अड़ा हुआ है। यही वजह है कि वह हर इंसान को उसकी नीयत और अमल के हिसाब से बदला देगा। जो लोग दिल में छिपाकर बुराई करते हैं और ज़ाहिर में अच्छे बनते हैं, उनकी पोल अल्लाह के सामने खुली हुई है। और जो लोग दिल में ईमान और सच्चाई छिपाए हुए हैं, अल्लाह उनके इस हाल को भी जानता है और उन्हें उसका अच्छा बदला देगा।

यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है कि हम अपने दिलों को साफ़ रखें, क्योंकि अल्लाह तो दिलों का हाल जानता है। हमें चाहिए कि हमारा ज़ाहिर और बातिन एक जैसा हो—जो हम दिल में रखते हैं, वही ज़ुबान पर लाएं और वही अमल में लाएं। अल्लाह से कुछ छिपा नहीं है, इसलिए उसकी निगरानी का एहसास हमें हर वक़्त सच्चाई और नेकी पर चलने की ताक़त देता है।

और यह भी याद रखें कि यही रब हमारा मालिक है—वह हमारे दिल की हर धड़कन से वाक़िफ़ है। जब हम उससे दुआ करते हैं, तो वह हमारी ज़रूरत को पहले से जानता है। जब हम गुनाह करते हैं और पछताते हैं, तो वह हमारे दिल के पश्चाताप को देखता है। यही वह रब है जो अपने बंदों पर सबसे ज़्यादा मेहरबान है। आइए, हम अपने दिलों को उसकी याद से रोशन करें और अपनी ज़ुबान को उसके ज़िक्र से पाक करें, ताकि हम उन लोगों में शामिल हों जिनके दिल और ज़ुबान दोनों अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ चलते हैं।



📜 आयत 67-71 — सूरा अल-क़सस

67فَأَمَّا مَن تَابَ وَآمَنَ وَعَمِلَ صَالِحًا فَعَسَىٰ أَن يَكُونَ مِنَ الْمُفْلِحِينَ
मगर हाँ जिस शख्स ने तौबा कर ली और ईमान लाया और अच्छे अच्छे काम किए तो क़रीब है कि ये लोग अपनी मुरादें पाने वालों से होंगे
68وَرَبُّكَ يَخْلُقُ مَا يَشَاءُ وَيَخْتَارُ ۗ مَا كَانَ لَهُمُ الْخِيَرَةُ ۚ سُبْحَانَ اللَّهِ وَتَعَالَىٰ عَمَّا يُشْرِكُونَ
और तुम्हारा परवरदिगार जो चाहता है पैदा करता है और (जिसे चाहता है) मुन्तख़िब करता है और ये इन्तिख़ाब लोगों के एख्तियार में नहीं है और जिस चीज़ को ये लोग ख़ुदा का शरीक बनाते हैं उससे ख़ुदा पाक और (कहीं) बरतर है
69وَرَبُّكَ يَعْلَمُ مَا تُكِنُّ صُدُورُهُمْ وَمَا يُعْلِنُونَ
और (ऐ रसूल) ये लोग जो बातें अपने दिलों में छिपाते हैं और जो कुछ ज़ाहिर करते हैं तुम्हारा परवरदिगार खूब जानता है
70وَهُوَ اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ لَهُ الْحَمْدُ فِي الْأُولَىٰ وَالْآخِرَةِ ۖ وَلَهُ الْحُكْمُ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
और वही ख़ुदा है उसके सिवा कोई क़ाबिले परसतिश नहीं दुनिया और आख़िरत में उस की तारीफ़ है और उसकी हुकूमत है और तुम लोग (मरने के बाद) उसकी तरफ लौटाए जाओगे
71قُلْ أَرَأَيْتُمْ إِن جَعَلَ اللَّهُ عَلَيْكُمُ اللَّيْلَ سَرْمَدًا إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ مَنْ إِلَٰهٌ غَيْرُ اللَّهِ يَأْتِيكُم بِضِيَاءٍ ۖ أَفَلَا تَسْمَعُونَ
(ऐ रसूल इन लोगों से) कहो कि भला तुमने देखा कि अगर ख़ुदा हमेशा के लिए क़यामत तक तुम्हारे सरों पर रात को छाए रहता तो अल्लाह के सिवा कौन ख़ुदा है जो तुम्हारे पास रौशनी ले आता तो क्या तुम सुनते नहीं हो
अल-क़ससकुरान सूची
88आयत
मक्कीअवतरण स्थान
69आयत

अनुवाद — अल-क़सस 69

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Thursday, October 1, 2026

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