Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- वैलकुम (ويلكم): यह शब्द मूल रूप से हलाकत (विनाश) की दुआ के लिए आता है, लेकिन यहाँ इसका प्रयोग डाँट-फटकार और सावधान करने के अर्थ में हुआ है।
- सवाबुल्लाह (ثواب الله): अल्लाह का इनाम और प्रतिफल, जो आख़िरत में मोमिनों को मिलेगा।
- ला युलक़्क़ाहा (لا يلقاها): इस वाक्य का अर्थ है कि यह बात (नसीहत) और इस पर अमल करने की तौफ़ीक़ किसी को नहीं मिलती।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब क़ारून अपनी शानो-शौकत और ठाठ-बाठ के साथ निकला, तो कुछ लोगों ने दुनिया की इस चमक-दमक को देखकर दिल ही दिल में तमन्ना की: "काश! हमें भी वह कुछ मिलता जो क़ारून को मिला है।" उनकी यह आरज़ू सिर्फ़ ज़बान पर नहीं थी, बल्कि उनके दिलों में दुनिया की मुहब्बत और आख़िरत से ग़ाफ़िल होने की निशानी थी।
इसी मौके़ पर अल्लाह के दीन और उसकी किताब का इल्म रखने वाले सच्चे विद्वान, जो दुनिया की हक़ीक़त को समझते थे और आख़िरत के इनाम को जानते थे, उन्होंने उन लोगों को नसीहत करते हुए कहा: "तुम पर अफ़सोस! अल्लाह का डर रखो और उसकी नाफ़रमानी से बचो।" उन्होंने उन्हें समझाया कि अल्लाह का इनाम और उसका सवाब, जो उसने अपने मोमिन और नेक बंदों के लिए आख़िरत में तैयार किया है, उस दुनियावी माल से कहीं बेहतर और पाकीज़ा है जो क़ारून को दिया गया। यह इनाम उन लोगों के लिए है जो अल्लाह पर ईमान लाएँ और नेक अमल करें।
फिर अल्लाह तआला ने एक बड़ी हक़ीक़त बयान की कि यह नसीहत कबूल करने और इस पर अमल करने की तौफ़ीक़ सिर्फ़ उन्हीं को मिलती है जो सब्र करने वाले हैं। यानी जो लोग दुनिया की चमक-दमक और लुभावनी चीज़ों से मुँह मोड़कर अल्लाह की इताअत पर डटे रहते हैं, जो अपनी नफ़्स को काबू में रखते हैं और गुनाहों से बचते हैं, वही इस नसीहत से फ़ायदा उठाते हैं।
दावती पहलू:
यह आयत हमें एक अहम सबक़ सिखाती है कि दुनिया का माल और ठाठ-बाठ कितना भी बड़ा क्यों न हो, वह फ़ानी और चंद रोज़ की ज़िंदगी का साज़ो-सामान है। अल्लाह का सवाब और उसकी रज़ा ही असली कामयाबी है। हमें चाहिए कि हम दुनिया की दौलत को अपना निशाना न बनाएँ, बल्कि अपनी निगाहें आख़िरत की तरफ़ रखें। जो लोग इस दुनिया में सब्र करते हैं और अल्लाह की राह पर चलते हैं, उनके लिए ऐसा इनाम है जो किसी भी दुनियावी ख़ज़ाने से बढ़कर है। यही सब्र और परहेज़गारी हमें उस कामयाबी तक पहुँचाती है जो कभी ख़त्म नहीं होती।
📜 आयत 78-82 — सूरा अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 80
सूरा अल-क़सस आयत 80 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिन लोगों को (हमारी बारगाह में) इल्म अता हुआ…सूरा आयत 80/88 — सूरा अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़सस सुनें, सूरा अल-क़सस अनुवाद, सूरा अल-क़सस mp3, सूरा अल-क़सस pdf. आयत 78–82. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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