अल-क़सस · 81/88
अनुवाद उच्चारण — अल-क़सस
فَخَسَفْنَا بِهِ وَبِدَارِهِ الْأَرْضَ فَمَا كَانَ لَهُ مِن فِئَةٍ يَنصُرُونَهُ مِن دُونِ اللَّهِ وَمَا كَانَ مِنَ الْمُنتَصِرِينَ ۝٨١
Fakhasafnaa bihee wa bidaarihil arda famaa kaana laho min fi`atiny yansuroo nahoo min doonil laahi wa maa kaana minal muntasireen
📖 हिंदी अर्थ
और हमने क़ारुन और उसके घर बार को ज़मीन में धंसा दिया फिर ख़ुदा के सिवा कोई जमाअत ऐसी न थी कि उसकी मदद करती और न खुद आप अपनी मदद आप कर सका

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَخَسَفْنَا: हमने धरती में धँसा दिया।
  • بِهِ وَبِدَارِهِ: उसे और उसके घर को।
  • فِئَةٍ: समूह या साथी।
  • يَنصُرُونَهُ: जो उसकी सहायता करते।
  • مِنَ الْمُنتَصِرِينَ: अपनी रक्षा करने वालों में से।

तफसीर (व्याख्या):

जब क़ारून ने अपने धन और ऐश्वर्य पर घमंड किया और अल्लाह के आदेशों की अवहेलना की, तो अल्लाह तआला ने उसे उसके घर सहित धरती में धँसा दिया। यह अल्लाह की उस शक्ति का प्रत्यक्ष प्रमाण है जो किसी भी घमंडी और सरकश इंसान को उसके ठिकाने पर ला सकती है। धरती ने उसे और उसके पूरे घर को अपने अंदर समेट लिया, और वह अपने धन, अपनी ताकत और अपने साथियों के बावजूद बिल्कुल असमर्थ हो गया। उसके पास न कोई ऐसा समूह था जो अल्लाह की पकड़ से उसे बचा सके, और न ही वह स्वयं अपनी कोई रक्षा कर सका। यहाँ अल्लाह तआला यह सबक सिखा रहे हैं कि धन, ऐश्वर्य, और सामाजिक स्थिति किसी को अल्लाह की पकड़ से नहीं बचा सकती। जब अल्लाह की यातना आती है, तो सारे साधन बेकार हो जाते हैं। यह घटना हर उस इंसान के लिए एक चेतावनी है जो अपनी ताकत, धन या पद पर घमंड करता है और अल्लाह के हुक्मों को भूल जाता है। अल्लाह तआला अपने बंदों को इस क़िस्से के माध्यम से सीधे रास्ते पर चलने की तरग़ीब देते हैं, ताकि वे दुनिया के धोखे में न पड़ें और अल्लाह की रहमत और उसकी पनाह को अपना सबसे बड़ा सहारा बनाएँ। याद रखें, अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन उसकी रहमत उन लोगों के लिए है जो उसकी ओर झुकते हैं और उसके आदेशों का पालन करते हैं।



📜 आयत 79-83 — अल-क़सस

79فَخَرَجَ عَلَىٰ قَوْمِهِ فِي زِينَتِهِ ۖ قَالَ الَّذِينَ يُرِيدُونَ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا يَا لَيْتَ لَنَا مِثْلَ مَا أُوتِيَ قَارُونُ إِنَّهُ لَذُو حَظٍّ عَظِيمٍ
ग़रज़ (एक दिन क़ारुन) अपनी क़ौम के सामने बड़ी आराइश और ठाठ के साथ निकला तो जो लोग दुनिया को (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी के तालिब थे (इस शान से देख कर) कहने लगे जो माल व दौलत क़ारुन को अता हुई है काश मेरे लिए भी होती इसमें शक नहीं कि क़ारुन बड़ा नसीब वर था
80وَقَالَ الَّذِينَ أُوتُوا الْعِلْمَ وَيْلَكُمْ ثَوَابُ اللَّهِ خَيْرٌ لِّمَنْ آمَنَ وَعَمِلَ صَالِحًا وَلَا يُلَقَّاهَا إِلَّا الصَّابِرُونَ
और जिन लोगों को (हमारी बारगाह में) इल्म अता हुआ था कहनें लगे तुम्हारा नास हो जाए (अरे) जो शख्स ईमान लाए और अच्छे काम करे उसके लिए तो ख़ुदा का सवाब इससे कही बेहतर है और वह तो अब सब्र करने वालों के सिवा दूसरे नहीं पा सकते
81فَخَسَفْنَا بِهِ وَبِدَارِهِ الْأَرْضَ فَمَا كَانَ لَهُ مِن فِئَةٍ يَنصُرُونَهُ مِن دُونِ اللَّهِ وَمَا كَانَ مِنَ الْمُنتَصِرِينَ
और हमने क़ारुन और उसके घर बार को ज़मीन में धंसा दिया फिर ख़ुदा के सिवा कोई जमाअत ऐसी न थी कि उसकी मदद करती और न खुद आप अपनी मदद आप कर सका
82وَأَصْبَحَ الَّذِينَ تَمَنَّوْا مَكَانَهُ بِالْأَمْسِ يَقُولُونَ وَيْكَأَنَّ اللَّهَ يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ وَيَقْدِرُ ۖ لَوْلَا أَن مَّنَّ اللَّهُ عَلَيْنَا لَخَسَفَ بِنَا ۖ وَيْكَأَنَّهُ لَا يُفْلِحُ الْكَافِرُونَ
और जिन लोगों ने कल उसके जाह व मरतबे की तमन्ना की थी वह (आज ये तमाशा देखकर) कहने लगे अरे माज़अल्लाह ये तो ख़ुदा ही अपने बन्दों से जिसकी रोज़ी चाहता है कुशादा कर देता है और जिसकी रोज़ी चाहता है तंग कर देता है और अगर (कहीं) ख़ुदा हम पर मेहरबानी न करता (और इतना माल दे देता) तो उसकी तरह हमको भी ज़रुर धॅसा देता-और माज़अल्लाह (सच है) हरगिज़ कुफ्फार अपनी मुरादें न पाएँगें
83تِلْكَ الدَّارُ الْآخِرَةُ نَجْعَلُهَا لِلَّذِينَ لَا يُرِيدُونَ عُلُوًّا فِي الْأَرْضِ وَلَا فَسَادًا ۚ وَالْعَاقِبَةُ لِلْمُتَّقِينَ
ये आख़िरत का घर तो हम उन्हीं लोगों के लिए ख़ास कर देगें जो रुए ज़मीन पर न सरकशी करना चाहते हैं और न फसाद-और (सच भी यूँ ही है कि) फिर अन्जाम तो परहेज़गारों ही का है
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अनुवाद — अल-क़सस 81

सूरा अल-क़सस आयत 81 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने क़ारुन और उसके घर बार को ज़मीन में…

सूरा आयत 81/88 — अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़सस सुनें, अल-क़सस अनुवाद, अल-क़सस mp3, अल-क़सस pdf. आयत 79–83. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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