Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- रुसुलुना – हमारे भेजे हुए फ़रिश्ते
- बिल-बुश्रा – खुशखबरी के साथ
- मुह्लिकू – विनाश करने वाले हैं
- अहले हाज़िहिल क़र्याह – इस बस्ती (बस्ती) के निवासी
- ज़ालिमीन – अत्याचारी (अपने ऊपर ज़ुल्म करने वाले)
तफ़सीर (व्याख्या):
जब अल्लाह के भेजे हुए फ़रिश्ते हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के पास खुशखबरी लेकर आए — यह खुशखबरी यह थी कि उन्हें एक पुत्र (इसहाक) मिलेगा और उसके बाद उनके वंश में याक़ूब (अलैहिस्सलाम) पैदा होंगे — तो उन्होंने हज़रत इब्राहीम को यह भी बताया कि हमें इस बस्ती (सदूम) के निवासियों को विनाश के लिए भेजा गया है। यह वही बस्ती थी जहाँ हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) रहते थे, और यहाँ के लोग अत्याचारी थे — वे अल्लाह की अवज्ञा करते थे, कुफ़्र और घोर पापों में लिप्त थे, और ऐसे जघन्य कर्म करते थे जो उनसे पहले किसी ने नहीं किए थे। उनका अत्याचार केवल दूसरों पर नहीं था, बल्कि सबसे पहले उन्होंने अपनी आत्माओं पर ज़ुल्म किया था, क्योंकि उन्होंने अल्लाह की रहमत और हिदायत को ठुकरा दिया और अपने नफ़्स को गुनाहों में डुबो दिया।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की यातना कभी भी बिना कारण नहीं आती। जब कोई समाज हद से आगे बढ़ जाता है, अल्लाह के नबियों को झुठलाता है और पापों में डूब जाता है, तो अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त होती है। लेकिन साथ ही, यह भी सबक है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को खुशखबरी देता है और उन्हें अपनी योजनाओं से अवगत कराता है, जैसे उसने हज़रत इब्राहीम को फ़रिश्तों के माध्यम से सूचित किया।
इस क़िस्से से हमें यह भी सीख मिलती है कि हमें हमेशा अल्लाह की नाफ़रमानी से बचना चाहिए और अपने समाज में अच्छाई को बढ़ावा देना चाहिए। अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए है जो उसकी ओर रुजू करते हैं, और उसका अज़ाब उनके लिए है जो ज़ुल्म और गुनाह पर अड़े रहते हैं। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह के हुक्मों के अनुसार ढालें, ताकि हम उसकी रहमत के हक़दार बनें और उसके अज़ाब से महफूज़ रहें।
📜 आयत 29-33 — सूरा अल-अंकबूत
अनुवाद — अल-अंकबूत 31
सूरा अल-अंकबूत आयत 31 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (उस वक्त अज़ाब की तैयारी हुई) और जब हमारे भेजे…सूरा आयत 31/69 — सूरा अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अंकबूत सुनें, सूरा अल-अंकबूत अनुवाद, सूरा अल-अंकबूत mp3, सूरा अल-अंकबूत pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अंकबूत
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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