अल-अंकबूत · 31/69
अनुवाद उच्चारण — अल-अंकबूत
وَلَمَّا جَاءَتْ رُسُلُنَا إِبْرَاهِيمَ بِالْبُشْرَىٰ قَالُوا إِنَّا مُهْلِكُو أَهْلِ هَٰذِهِ الْقَرْيَةِ ۖ إِنَّ أَهْلَهَا كَانُوا ظَالِمِينَ ۝٣١
Wa lammaa jaaa`at Rusulunaaa Ibraaheema bil bushraa qaalooo innaa muhlikoo ahli haazihil qaryati inna ahlahaa kaanoo zaalimeen
📖 हिंदी अर्थ
(उस वक्त अज़ाब की तैयारी हुई) और जब हमारे भेजे हुए फ़रिश्ते इबराहीम के पास (बुढ़ापे में बेटे की) खुशखबरी लेकर आए तो (इबराहीम से) बोले हम लोग अनक़रीब इस गाँव के रहने वालों को हलाक करने वाले हैं (क्योंकि) इस बस्ती के रहने वाले यक़ीनी (बड़े) सरकश है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • रुसुलुना – हमारे भेजे हुए फ़रिश्ते
  • बिल-बुश्रा – खुशखबरी के साथ
  • मुह्लिकू – विनाश करने वाले हैं
  • अहले हाज़िहिल क़र्याह – इस बस्ती (बस्ती) के निवासी
  • ज़ालिमीन – अत्याचारी (अपने ऊपर ज़ुल्म करने वाले)

तफ़सीर (व्याख्या):

जब अल्लाह के भेजे हुए फ़रिश्ते हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के पास खुशखबरी लेकर आए — यह खुशखबरी यह थी कि उन्हें एक पुत्र (इसहाक) मिलेगा और उसके बाद उनके वंश में याक़ूब (अलैहिस्सलाम) पैदा होंगे — तो उन्होंने हज़रत इब्राहीम को यह भी बताया कि हमें इस बस्ती (सदूम) के निवासियों को विनाश के लिए भेजा गया है। यह वही बस्ती थी जहाँ हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) रहते थे, और यहाँ के लोग अत्याचारी थे — वे अल्लाह की अवज्ञा करते थे, कुफ़्र और घोर पापों में लिप्त थे, और ऐसे जघन्य कर्म करते थे जो उनसे पहले किसी ने नहीं किए थे। उनका अत्याचार केवल दूसरों पर नहीं था, बल्कि सबसे पहले उन्होंने अपनी आत्माओं पर ज़ुल्म किया था, क्योंकि उन्होंने अल्लाह की रहमत और हिदायत को ठुकरा दिया और अपने नफ़्स को गुनाहों में डुबो दिया।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की यातना कभी भी बिना कारण नहीं आती। जब कोई समाज हद से आगे बढ़ जाता है, अल्लाह के नबियों को झुठलाता है और पापों में डूब जाता है, तो अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त होती है। लेकिन साथ ही, यह भी सबक है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को खुशखबरी देता है और उन्हें अपनी योजनाओं से अवगत कराता है, जैसे उसने हज़रत इब्राहीम को फ़रिश्तों के माध्यम से सूचित किया।

इस क़िस्से से हमें यह भी सीख मिलती है कि हमें हमेशा अल्लाह की नाफ़रमानी से बचना चाहिए और अपने समाज में अच्छाई को बढ़ावा देना चाहिए। अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए है जो उसकी ओर रुजू करते हैं, और उसका अज़ाब उनके लिए है जो ज़ुल्म और गुनाह पर अड़े रहते हैं। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह के हुक्मों के अनुसार ढालें, ताकि हम उसकी रहमत के हक़दार बनें और उसके अज़ाब से महफूज़ रहें।

🎧 सुनें

📜 आयत 29-33 — अल-अंकबूत

29أَئِنَّكُمْ لَتَأْتُونَ الرِّجَالَ وَتَقْطَعُونَ السَّبِيلَ وَتَأْتُونَ فِي نَادِيكُمُ الْمُنكَرَ ۖ فَمَا كَانَ جَوَابَ قَوْمِهِ إِلَّا أَن قَالُوا ائْتِنَا بِعَذَابِ اللَّهِ إِن كُنتَ مِنَ الصَّادِقِينَ
तुम लोग (औरतों को छोड़कर कज़ाए शहवत के लिए) मर्दों की तरफ गिरते हो और (मुसाफिरों की) रहजनी करते हो और तुम लोग अपनी महफिलों में बुरी बुरी हरकते करते हो तो (इन सब बातों का) लूत की क़ौम के पास इसके सिवा कोई जवाब न था कि वह लोग कहने लगे कि भला अगर तुम सच्चे हो तो हम पर ख़ुदा का अज़ाब तो ले आओ
30قَالَ رَبِّ انصُرْنِي عَلَى الْقَوْمِ الْمُفْسِدِينَ
तब लूत ने दुआ की कि परवरदिगार इन मुफ़सिद लोगों के मुक़ाबले में मेरी मदद कर
31وَلَمَّا جَاءَتْ رُسُلُنَا إِبْرَاهِيمَ بِالْبُشْرَىٰ قَالُوا إِنَّا مُهْلِكُو أَهْلِ هَٰذِهِ الْقَرْيَةِ ۖ إِنَّ أَهْلَهَا كَانُوا ظَالِمِينَ
(उस वक्त अज़ाब की तैयारी हुई) और जब हमारे भेजे हुए फ़रिश्ते इबराहीम के पास (बुढ़ापे में बेटे की) खुशखबरी लेकर आए तो (इबराहीम से) बोले हम लोग अनक़रीब इस गाँव के रहने वालों को हलाक करने वाले हैं (क्योंकि) इस बस्ती के रहने वाले यक़ीनी (बड़े) सरकश है
32قَالَ إِنَّ فِيهَا لُوطًا ۚ قَالُوا نَحْنُ أَعْلَمُ بِمَن فِيهَا ۖ لَنُنَجِّيَنَّهُ وَأَهْلَهُ إِلَّا امْرَأَتَهُ كَانَتْ مِنَ الْغَابِرِينَ
(ये सुन कर) इबराहीम ने कहा कि इस बस्ती में तो लूत भी है वह फरिश्ते बोले जो लोग इस बस्ती में हैं हम लोग उनसे खूब वाक़िफ़ हैं हम तो उनको और उनके लड़के बालों को यक़ीनी बचा लेंगे मगर उनकी बीबी को वह (अलबता) पीछे रह जाने वालों में होगीं
33وَلَمَّا أَن جَاءَتْ رُسُلُنَا لُوطًا سِيءَ بِهِمْ وَضَاقَ بِهِمْ ذَرْعًا وَقَالُوا لَا تَخَفْ وَلَا تَحْزَنْ ۖ إِنَّا مُنَجُّوكَ وَأَهْلَكَ إِلَّا امْرَأَتَكَ كَانَتْ مِنَ الْغَابِرِينَ
और जब हमारे भेजे हुए फरिश्ते लूत के पास आए लूत उनके आने से ग़मग़ीन हुए और उन (की मेहमानी) से दिल तंग हुए (क्योंकि वह नौजवान खूबसूरत मर्दों की सरूत में आए थे) फरिश्तों ने कहा आप ख़ौफ न करें और कुढ़े नही हम आपको और आपके लड़के बालों को बचा लेगें मगर आपकी बीबी (क्योंकि वह पीछे रह जाने वालो से होगी)
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अनुवाद — अल-अंकबूत 31

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Tuesday, August 18, 2026

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