अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَجْحَدُ: इनकार करना, अस्वीकार करना, जानबूझकर सत्य को छिपाना।
- آيَاتِنَا: हमारी निशानियाँ, हमारे प्रमाण, हमारी आयतें (कुरआन की आयतें और अल्लाह के स्पष्ट चिन्ह)।
- الْكَافِرُونَ: वे लोग जो सत्य को जानते हुए भी उसे ठुकरा दें, हठधर्मी और विद्रोह के कारण उसे न मानें।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! जिस प्रकार हमने आपसे पहले आने वाले पैग़म्बरों पर किताबें उतारीं, ठीक उसी प्रकार हमने आप पर यह किताब (कुरआन) उतारी है। यह किताब अपने से पहले की सभी दिव्य पुस्तकों की सत्यता की पुष्टि करती है और उन्हीं मूल सत्यों को प्रस्तुत करती है जो पहले की किताबों में थे।
जिन लोगों को हमने पहले किताब (तौरात, इंजील) दी थी—जैसे अब्दुल्लाह बिन सलाम और उनके साथी—जब वे इस कुरआन को पढ़ते और सुनते हैं, तो वे इस पर ईमान लाते हैं, क्योंकि उन्हें अपनी किताबों में इस नबी और इस किताब के लक्षण मिले हुए हैं। वे इसे पहचानते हैं जैसे कोई अपने बेटे को पहचानता है।
इसी प्रकार, इन मक्का के कुछ लोगों (क़ुरैश और अन्य अरबों) में से भी कुछ ऐसे हैं जो इस कुरआन पर ईमान लाते हैं और इसे सत्य मानते हैं। यह ईमान उनके दिलों में अल्लाह की ओर से दिया गया मार्गदर्शन है।
और हमारी आयतों और हमारे स्पष्ट प्रमाणों को कोई इनकार नहीं करता, सिवाय उन काफ़िरों के जिनकी आदत ही हठधर्मिता और विद्रोह है। वे सत्य को भली-भाँति जानते हैं, फिर भी अहंकार और जिद के कारण उसे अस्वीकार कर देते हैं। यहूदियों में से कुछ लोगों ने मुहम्मद ﷺ को पैग़म्बर के रूप में पहचान लिया था, लेकिन फिर भी उन्होंने इनकार किया—यही सबसे बड़ा अन्याय और अज्ञानता है।
प्रिय पाठकों! यह आयत हमें बताती है कि कुरआन कोई नई किताब नहीं है, बल्कि यह उसी सत्य का निरंतरता है जो अल्लाह ने हर युग में अपने पैग़म्बरों के माध्यम से भेजा। जो लोग सच्चे दिल से सत्य की खोज करते हैं, वे इसे पहचान लेते हैं और ईमान लाते हैं। यह किताब हर उस व्यक्ति के लिए रहनुमा है जो सत्य को स्वीकार करने का साहस रखता है। अल्लाह ने इस किताब को हमारे लिए आसान बना दिया है—इसमें कोई विरोधाभास नहीं, कोई कमी नहीं। यह पूर्ण मार्गदर्शन है।
आइए! हम उन लोगों में से बनें जो इस किताब पर ईमान लाते हैं, इसे पढ़ते हैं, समझते हैं और इस पर अमल करते हैं। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत की सफलता तक पहुँचाता है। अल्लाह हमें सत्य को स्वीकार करने की तौफ़ीक़ दे और हमें उन लोगों में से न बनाए जो जानते हुए भी इनकार करते हैं। आमीन।
📜 आयत 45-49 — अल-अंकबूत
अनुवाद — अल-अंकबूत 47
सूरा अल-अंकबूत आयत 47 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल जिस तरह अगले पैग़म्बरों पर किताबें उतारी)…सूरा आयत 47/69 — अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंकबूत सुनें, अल-अंकबूत अनुवाद, अल-अंकबूत mp3, अल-अंकबूत pdf. आयत 45–49. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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