आल-इमरान · 162/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
أَفَمَنِ اتَّبَعَ رِضْوَانَ اللَّهِ كَمَن بَاءَ بِسَخَطٍ مِّنَ اللَّهِ وَمَأْوَاهُ جَهَنَّمُ ۚ وَبِئْسَ الْمَصِيرُ ۝١٦٢
Afamanit taba`a Ridwaanal laahi kamam baaa`a bisakhatim minal laahi wa maawaahu Jahannam; wa bi`sal maseer
📖 हिंदी अर्थ
भला जो शख्स ख़ुदा की ख़ुशनूदी का पाबन्द हो क्या वह उस शख्स के बराबर हो सकता है जो ख़ुदा के गज़ब में गिरफ्तार हो और जिसका ठिकाना जहन्नुम है और वह क्या बुरा ठिकाना है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رِضْوَانَ اللَّهِ: अल्लाह की प्रसन्नता और उसकी खुशी।
  • بَاءَ: लौटा, वापस हुआ, या उसने अपने ऊपर लाद लिया।
  • بِسَخَطٍ: अल्लाह के क्रोध और गज़ब के साथ।
  • مَأْوَاهُ: उसका ठिकाना और निवास स्थान।
  • بِئْسَ الْمَصِيرُ: कितना बुरा अंजाम और कितनी बुरी जगह है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत दो तरह के लोगों के बीच स्पष्ट तुलना पेश करती है। क्या वह व्यक्ति जो अल्लाह की रज़ा और खुशी का पालन करता है—यानी ईमान लाता है, अच्छे कर्म करता है, और अपने जीवन को अल्लाह के आदेशों के अनुसार ढालता है—उस व्यक्ति के बराबर हो सकता है जो अल्लाह के क्रोध का शिकार हुआ? हरगिज़ नहीं! दूसरे व्यक्ति ने अपने कुकर्मों और अवज्ञा से अल्लाह का क्रोध अपने ऊपर लाद लिया, और उसका अंतिम ठिकाना जहन्नम (नरक) है। यह कितना बुरा अंजाम है और कितनी बुरी जगह है! यह आयत बताती है कि दोनों के बीच कोई समानता नहीं है—एक जन्नत की ओर जा रहा है और दूसरा जहन्नम की ओर। अल्लाह के यहाँ दोनों की मंज़िलें बिल्कुल अलग हैं, और यही न्याय और हिकमत है।


फ़ायदे (सबक):

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि इंसान का असली लक्ष्य अल्लाह की रज़ा और खुशी हासिल करना होना चाहिए, न कि दुनिया के मोहताज बनना। जो व्यक्ति अल्लाह की रज़ा के पीछे चलता है, उसकी मंज़िल जन्नत है।
  2. यह आयत हमें डराती है कि अल्लाह की नाराज़गी और क्रोध से बचना चाहिए। जो लोग उसकी अवज्ञा करते हैं और गुनाहों में डूबे रहते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा है।
  3. यहाँ न्याय का सिद्धांत स्पष्ट होता है—अच्छे और बुरे लोगों को एक समान नहीं ठहराया जा सकता। अल्लाह का इन्साफ़ यही है कि हर किसी को उसके कर्मों का फल मिले।
  4. यह आयत मुसलमान को प्रेरित करती है कि वह अपने जीवन को अल्लाह की प्रसन्नता के अनुसार बनाए, क्योंकि यही सच्ची कामयाबी है। दुनिया की अस्थायी चीज़ों के पीछे भागने के बजाय, आख़िरत की स्थायी भलाई को प्राथमिकता देनी चाहिए।
  5. यहाँ से हमें यह भी पता चलता है कि अल्लाह का रास्ता साफ़ और सीधा है—जो उसकी रज़ा चाहेगा, उसे वह मिलेगी; और जो उसके क्रोध को भड़काएगा, उसे उसका सामना करना पड़ेगा। यही अल्लाह की रहमत और अदालत का तकाज़ा है।
🎧 सुनें

📜 आयत 160-164 — आल-इमरान

160إِن يَنصُرْكُمُ اللَّهُ فَلَا غَالِبَ لَكُمْ ۖ وَإِن يَخْذُلْكُمْ فَمَن ذَا الَّذِي يَنصُرُكُم مِّن بَعْدِهِ ۗ وَعَلَى اللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُؤْمِنُونَ
(मुसलमानों याद रखो) अगर ख़ुदा ने तुम्हारी मदद की तो फिर कोई तुमपर ग़ालिब नहीं आ सकता और अगर ख़ुदा तुमको छोड़ दे तो फिर कौन ऐसा है जो उसके बाद तुम्हारी मदद को खड़ा हो और मोमिनीन को चाहिये कि ख़ुदा ही पर भरोसा रखें
161وَمَا كَانَ لِنَبِيٍّ أَن يَغُلَّ ۚ وَمَن يَغْلُلْ يَأْتِ بِمَا غَلَّ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۚ ثُمَّ تُوَفَّىٰ كُلُّ نَفْسٍ مَّا كَسَبَتْ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
और (तुम्हारा गुमान बिल्कुल ग़लत है) किसी नबी की (हरगिज़) ये शान नहीं कि ख्यानत करे और ख्यानत करेगा तो जो चीज़ ख्यानत की है क़यामत के दिन वही चीज़ (बिलकुल वैसा ही) ख़ुदा के सामने लाना होगा फिर हर शख्स अपने किए का पूरा पूरा बदला पाएगा और उनकी किसी तरह हक़तल्फ़ी नहीं की जाएगी
162أَفَمَنِ اتَّبَعَ رِضْوَانَ اللَّهِ كَمَن بَاءَ بِسَخَطٍ مِّنَ اللَّهِ وَمَأْوَاهُ جَهَنَّمُ ۚ وَبِئْسَ الْمَصِيرُ
भला जो शख्स ख़ुदा की ख़ुशनूदी का पाबन्द हो क्या वह उस शख्स के बराबर हो सकता है जो ख़ुदा के गज़ब में गिरफ्तार हो और जिसका ठिकाना जहन्नुम है और वह क्या बुरा ठिकाना है
163هُمْ دَرَجَاتٌ عِندَ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ بَصِيرٌ بِمَا يَعْمَلُونَ
वह लोग खुदा के यहॉ मुख्तलिफ़ दरजों के हैं और जो कुछ वह करते हैं ख़ुदा देख रहा है
164لَقَدْ مَنَّ اللَّهُ عَلَى الْمُؤْمِنِينَ إِذْ بَعَثَ فِيهِمْ رَسُولًا مِّنْ أَنفُسِهِمْ يَتْلُو عَلَيْهِمْ آيَاتِهِ وَيُزَكِّيهِمْ وَيُعَلِّمُهُمُ الْكِتَابَ وَالْحِكْمَةَ وَإِن كَانُوا مِن قَبْلُ لَفِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
ख़ुदा ने तो ईमानदारों पर बड़ा एहसान किया कि उनके वास्ते उन्हीं की क़ौम का एक रसूल भेजा जो उन्हें खुदा की आयतें पढ़ पढ़ के सुनाता है और उनकी तबीयत को पाकीज़ा करता है और उन्हें किताबे (ख़ुदा) और अक्ल की बातें सिखाता है अगरचे वह पहले खुली हुई गुमराही में पडे थे
आल-इमरानकुरान सूची
200आयत
मदनीRevelation
162आयत

अनुवाद — आल-इमरान 162

सूरा आल-इमरान आयत 162 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : भला जो शख्स ख़ुदा की ख़ुशनूदी का पाबन्द हो क्या…

सूरा आयत 162/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 160–164. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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