Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- आयत: निशानी, चिह्न
- रम्ज़: इशारा, संकेत
- अशिय्य: दोपहर ढलने से सूर्यास्त तक का समय
- इब्कार: सुबह की शुरुआत, फज्र से लेकर चाश्त तक का समय
तफसीर:
हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) ने जब यह खुशखबरी सुनी कि उन्हें एक बेटा होगा, तो उन्होंने अल्लाह से एक निशानी माँगी ताकि उनका दिल और अधिक मुत्मइन्न हो और वे इस परिवर्तन को महसूस कर सकें। उन्होंने कहा: "ऐ मेरे रब! मुझे एक निशानी दे दे।" यह निशानी माँगना अल्लाह की क़ुदरत पर शक की वजह से नहीं था, बल्कि यह एक इंसानी फ़ितरत है कि जब कोई बड़ी खुशखबरी मिलती है तो दिल चाहता है कि उसकी कोई ज़ाहिरी दलील भी देख ली जाए।
अल्लाह तआला ने फ़रमाया: "तेरी निशानी यह है कि तू तीन दिनों तक लोगों से बात नहीं कर पाएगा, सिवाय इशारे के।" यानी उनकी ज़बान बंद हो जाएगी, लेकिन वे बीमार या कमज़ोर नहीं होंगे, बल्कि पूरी तरह सही-सलामत रहेंगे। यह एक मोजिज़ा था कि इंसान स्वस्थ होते हुए भी तीन दिन तक बोलने से क़ासिर रहे। इस दौरान उनका दिल और दिमाग़ पूरी तरह काम करता रहेगा, लेकिन ज़बान से बोलना मुमकिन नहीं होगा।
इसी के साथ अल्लाह ने उन्हें नसीहत फ़रमाई: "और तू अपने रब का बहुत ज़्यादा ज़िक्र कर और सुबह-शाम उसकी तस्बीह कर।" यानी जब तुम लोगों से बात नहीं कर सकते, तो इस वक़्त को अल्लाह की इबादत और ज़िक्र में बिताओ। यह नसीहत सिर्फ़ हज़रत ज़करिय्या के लिए नहीं, बल्कि हर मोमिन के लिए एक सबक़ है कि जब भी हम किसी मुसीबत या परेशानी में हों, या हमारे पास खाली वक़्त हो, तो हमें अल्लाह का ज़िक्र करना चाहिए। ज़िक्र से दिल को सुकून मिलता है और इंसान अल्लाह के और क़रीब होता है।
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को मुश्किल वक़्त में भी नहीं भूलता। जब हज़रत ज़करिय्या ने अल्लाह से दुआ माँगी, तो अल्लाह ने उन्हें न सिर्फ़ बेटे की खुशखबरी दी, बल्कि उन्हें अपनी याद में और अधिक मशगूल रहने की तौफ़ीक़ भी दी। यह हमारे लिए भी एक प्रेरणा है कि हम अपनी ज़िंदगी के हर हाल में अल्लाह का शुक्र अदा करें और उसका ज़िक्र करते रहें। जब हम अल्लाह को याद करते हैं, तो अल्लाह हमें और अधिक नेमतें देता है और हमारे दिलों को सुकून अता फ़रमाता है।
📜 आयत 39-43 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 41
सूरा आल-इमरान आयत 41 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ज़करिया ने अर्ज़ की परवरदिगार मेरे इत्मेनान के लिए कोई…सूरा आयत 41/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 39–43. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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