आल-इमरान · 40/200
अनुवाद उच्चारण — सूरा आल-इमरान
قَالَ رَبِّ أَنَّىٰ يَكُونُ لِي غُلَامٌ وَقَدْ بَلَغَنِيَ الْكِبَرُ وَامْرَأَتِي عَاقِرٌ ۖ قَالَ كَذَٰلِكَ اللَّهُ يَفْعَلُ مَا يَشَاءُ ۝٤٠
Qaala Rabbi annaa yakoonu lee ghulaamunw wa qad balaghaniyal kibaru wamraatee `aaqirun qaala kazaalikal laahu yaf`alu maa yashaaa
📖 हिंदी अर्थ
ज़करिया ने अर्ज़ की परवरदिगार मुझे लड़का क्योंकर हो सकता है हालॉकि मेरा बुढ़ापा आ पहुंचा और (उसपर) मेरी बीवी बॉझ है (ख़ुदा ने) फ़रमाया इसी तरह ख़ुदा जो चाहता है करता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَنَّى: कैसे, किस प्रकार।
  • بَلَغَنِيَ الْكِبَرُ: बुढ़ापा मुझ तक पहुँच गया, अर्थात् मुझ पर बुढ़ापा छा गया।
  • عَاقِرٌ: बाँझ, जो संतान को जन्म न दे सके।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब फ़रिश्तों ने हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) को उनके बेटे यहया की जन्म की शुभ सूचना दी, तो वे आश्चर्य और खुशी के साथ बोले: "ऐ मेरे पालनहार! मेरे लिए लड़का कैसे पैदा हो सकता है, जबकि मैं अत्यधिक वृद्धावस्था को पहुँच चुका हूँ और मेरी पत्नी भी बाँझ है?" यह प्रश्न अविश्वास या इनकार के कारण नहीं था, बल्कि यह अत्यधिक आश्चर्य और यह जानने की इच्छा थी कि यह किस प्रकार घटित होगा। इस पर अल्लाह की ओर से उत्तर आया: "ऐसा ही होगा, अल्लाह जो चाहता है वही करता है।" अर्थात् जिस प्रकार अल्लाह ने बिना किसी सामान्य कारण के अपनी क़ुदरत से यह कार्य करने का फ़ैसला किया है, वह उसे अवश्य पूरा करेगा। अल्लाह के लिए कुछ भी असंभव नहीं है; वह अपनी इच्छा और हिकमत के अनुसार प्राकृतिक नियमों से परे भी कार्य कर सकता है। यह घटना अल्लाह की असीम शक्ति का प्रमाण है कि वह वृद्ध और बाँझ माता-पिता से भी संतान उत्पन्न कर सकता है।

लाभ एवं शिक्षाएँ:

  1. अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) असीम है; वह हर चीज़ पर पूर्ण सामर्थ्य रखता है और प्राकृतिक नियमों से बंधा नहीं है।
  2. अल्लाह से प्रार्थना करते समय विनम्रता और आश्चर्य का भाव होना चाहिए, जैसा कि हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) ने किया।
  3. जब अल्लाह किसी कार्य का फ़ैसला कर लेता है, तो उसे पूरा करके ही रहता है, चाहे वह कितना भी असंभव क्यों न लगे।
  4. यह घटना हमें सिखाती है कि अल्लाह पर पूर्ण भरोसा रखना चाहिए और उसकी रहमत से कभी निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि वह हर मुश्किल को आसान कर सकता है।
  5. अल्लाह की हिकमत (बुद्धिमत्ता) के आगे सिर झुकाना चाहिए; वह जो करता है, उसमें भलाई ही होती है, भले ही हमें वह समझ न आए।


📜 आयत 38-42 — सूरा आल-इमरान

38هُنَالِكَ دَعَا زَكَرِيَّا رَبَّهُ ۖ قَالَ رَبِّ هَبْ لِي مِن لَّدُنكَ ذُرِّيَّةً طَيِّبَةً ۖ إِنَّكَ سَمِيعُ الدُّعَاءِ
(ये माजरा देखते ही) उसी वक्त ज़करिया ने अपने परवरदिगार से दुआ कि और अर्ज क़ी ऐ मेरे पालने वाले तू मुझको (भी) अपनी बारगाह से पाकीज़ा औलाद अता फ़रमा बेशक तू ही दुआ का सुनने वाला है
39فَنَادَتْهُ الْمَلَائِكَةُ وَهُوَ قَائِمٌ يُصَلِّي فِي الْمِحْرَابِ أَنَّ اللَّهَ يُبَشِّرُكَ بِيَحْيَىٰ مُصَدِّقًا بِكَلِمَةٍ مِّنَ اللَّهِ وَسَيِّدًا وَحَصُورًا وَنَبِيًّا مِّنَ الصَّالِحِينَ
अभी ज़करिया हुजरे में खड़े (ये) दुआ कर ही रहे थे कि फ़रिश्तों ने उनको आवाज़ दी कि ख़ुदा तुमको यहया (के पैदा होने) की खुशख़बरी देता है जो जो कलेमतुल्लाह (ईसा) की तस्दीक़ करेगा और (लोगों का) सरदार होगा और औरतों की तरफ़ रग़बत न करेगा और नेको कार नबी होगा
40قَالَ رَبِّ أَنَّىٰ يَكُونُ لِي غُلَامٌ وَقَدْ بَلَغَنِيَ الْكِبَرُ وَامْرَأَتِي عَاقِرٌ ۖ قَالَ كَذَٰلِكَ اللَّهُ يَفْعَلُ مَا يَشَاءُ
ज़करिया ने अर्ज़ की परवरदिगार मुझे लड़का क्योंकर हो सकता है हालॉकि मेरा बुढ़ापा आ पहुंचा और (उसपर) मेरी बीवी बॉझ है (ख़ुदा ने) फ़रमाया इसी तरह ख़ुदा जो चाहता है करता है
41قَالَ رَبِّ اجْعَل لِّي آيَةً ۖ قَالَ آيَتُكَ أَلَّا تُكَلِّمَ النَّاسَ ثَلَاثَةَ أَيَّامٍ إِلَّا رَمْزًا ۗ وَاذْكُر رَّبَّكَ كَثِيرًا وَسَبِّحْ بِالْعَشِيِّ وَالْإِبْكَارِ
ज़करिया ने अर्ज़ की परवरदिगार मेरे इत्मेनान के लिए कोई निशानी मुक़र्रर फ़रमा इरशाद हुआ तुम्हारी निशानी ये है तुम तीन दिन तक लोगों से बात न कर सकोगे मगर इशारे से और (उसके शुक्रिये में) अपने परवरदिगार की अक्सर याद करो और रात को और सुबह तड़के (हमारी) तसबीह किया करो
42وَإِذْ قَالَتِ الْمَلَائِكَةُ يَا مَرْيَمُ إِنَّ اللَّهَ اصْطَفَاكِ وَطَهَّرَكِ وَاصْطَفَاكِ عَلَىٰ نِسَاءِ الْعَالَمِينَ
और वह वाक़िया भी याद करो जब फ़रिश्तों ने मरियम से कहा, ऐ मरियम तुमको ख़ुदा ने बरगुज़ीदा किया और (तमाम) गुनाहों और बुराइयों से पाक साफ़ रखा और सारे दुनिया जहॉन की औरतों में से तुमको मुन्तख़िब किया है
आल-इमरानकुरान सूची
200आयत
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अनुवाद — आल-इमरान 40

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Wednesday, September 30, 2026

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