आल-इमरान · 49/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
وَرَسُولًا إِلَىٰ بَنِي إِسْرَائِيلَ أَنِّي قَدْ جِئْتُكُم بِآيَةٍ مِّن رَّبِّكُمْ ۖ أَنِّي أَخْلُقُ لَكُم مِّنَ الطِّينِ كَهَيْئَةِ الطَّيْرِ فَأَنفُخُ فِيهِ فَيَكُونُ طَيْرًا بِإِذْنِ اللَّهِ ۖ وَأُبْرِئُ الْأَكْمَهَ وَالْأَبْرَصَ وَأُحْيِي الْمَوْتَىٰ بِإِذْنِ اللَّهِ ۖ وَأُنَبِّئُكُم بِمَا تَأْكُلُونَ وَمَا تَدَّخِرُونَ فِي بُيُوتِكُمْ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لَّكُمْ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ ۝٤٩
Wa Rasoolan ilaa Baneee Israaa`eela annee qad ji`tukum bi Aayatim mir Rabbikum annee akhluqu lakum minatteeni kahai `atittairi fa anfukhu feehi fayakoonu tairam bi iznil laahi wa ubri`ul akmaha wal abrasa wa uhyil mawtaa bi iznil laahi wa unabbi`ukum bimaa taakuloona wa maa taddakhiroona fee buyootikum; inna fee zaalika la Aayatal lakum in kuntum mu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
और बनी इसराइल का रसूल (क़रार देगा और वह उनसे यूं कहेगा कि) मैं तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से (अपनी नबूवत की) यह निशानी लेकर आया हूं कि मैं गुंधीं हुई मिट्टी से एक परिन्दे की सूरत बनाऊॅगा फ़िर उस पर (कुछ) दम करूंगा तो वो ख़ुदा के हुक्म से उड़ने लगेगा और मैं ख़ुदा ही के हुक्म से मादरज़ाद (पैदायशी) अंधे और कोढ़ी को अच्छा करूंगा और मुर्दो को ज़िन्दा करूंगा और जो कुछ तुम खाते हो और अपने घरों में जमा करते हो मैं (सब) तुमको बता दूंगा अगर तुम ईमानदार हो तो बेशक तुम्हारे लिये इन बातों में (मेरी नबूवत की) बड़ी निशानी है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَخْلُقُ: मैं आकार देता हूँ, बनाता हूँ।
  • كَهَيْئَةِ الطَّيْرِ: पक्षी के आकार जैसा।
  • فَأَنفُخُ: फिर मैं फूँक मारता हूँ।
  • الْأَكْمَهَ: वह व्यक्ति जो अंधा पैदा हुआ हो।
  • الْأَبْرَصَ: कोढ़ (जिल्द की बीमारी) से पीड़ित व्यक्ति।
  • تُدَّخِرُونَ: तुम छिपाकर रखते हो, संचय करते हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हमें हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) के उस महान मिशन से परिचित कराती है, जब अल्लाह ने उन्हें बनी इसराइल की ओर रसूल बनाकर भेजा। उन्होंने अपनी क़ौम से कहा: "मैं तुम्हारे पास तुम्हारे रब की ओर से एक निशानी (चमत्कार) लेकर आया हूँ, जो इस बात का प्रमाण है कि मैं अल्लाह का भेजा हुआ हूँ।"

फिर उन्होंने अपने चमत्कारों का उल्लेख किया: वे मिट्टी से पक्षी के आकार की एक मूर्ति बनाते, उसमें फूँक मारते और अल्लाह की इजाज़त से वह सचमुच एक जीवित पक्षी बन जाती। यह कोई जादू नहीं था, बल्कि अल्लाह की क़ुदरत का प्रत्यक्ष प्रमाण था, क्योंकि यह किसी इंसान के बस की बात नहीं कि वह निर्जीव मिट्टी में जान डाल दे।

इसके अलावा, वे अल्लाह की इजाज़त से जन्म से अंधे व्यक्ति की आँखें ठीक कर देते थे, कोढ़ के रोगी को शिफ़ा देते थे, और अल्लाह की इजाज़त से मुर्दों को ज़िंदा कर देते थे। ये सब वे काम थे जो केवल अल्लाह की ताक़त से हो सकते थे, और यही उनकी सच्चाई की सबसे बड़ी गवाही थी।

एक और अद्भुत बात यह थी कि वे लोगों को बता देते थे कि तुमने घर में क्या खाया और क्या छिपाकर रखा है। यह उनके नबी होने का एक और सबूत था, क्योंकि यह ज्ञान केवल अल्लाह ही दे सकता है।

अल्लाह ने ये सारे चमत्कार हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) को इसलिए दिए ताकि बनी इसराइल बिना किसी संदेह के यक़ीन कर लें कि वे अल्लाह के सच्चे रसूल हैं। इन चमत्कारों में उन लोगों के लिए बड़ी निशानी थी जो सच्चे दिल से ईमान लाना चाहते थे।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने प्यारे नबियों को ऐसे चमत्कार देता है जो इंसानी समझ से बाहर होते हैं, ताकि लोग सीधे रास्ते पर आएँ। हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) की ये करामातें उनकी नबुव्वत की सच्चाई की गवाह हैं, और हम मुसलमान उन्हें अल्लाह के नबी के रूप में मानते हैं। यह हमारे लिए सबक है कि हम अल्लाह की क़ुदरत पर पूरा यक़ीन रखें, क्योंकि वही जीवन और मृत्यु का मालिक है। जिस अल्लाह ने मिट्टी से पक्षी बनाए और मुर्दों को ज़िंदा किया, वही हमारी हर मुश्किल को आसान कर सकता है। हमें अपने जीवन में अल्लाह के दीन को अपनाना चाहिए और उसके रसूलों पर ईमान लाना चाहिए, क्योंकि यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है।



📜 आयत 47-51 — आल-इमरान

47قَالَتْ رَبِّ أَنَّىٰ يَكُونُ لِي وَلَدٌ وَلَمْ يَمْسَسْنِي بَشَرٌ ۖ قَالَ كَذَٰلِكِ اللَّهُ يَخْلُقُ مَا يَشَاءُ ۚ إِذَا قَضَىٰ أَمْرًا فَإِنَّمَا يَقُولُ لَهُ كُن فَيَكُونُ
(ये सुनकर मरियम ताज्जुब से) कहने लगी परवरदिगार मुझे लड़का क्योंकर होगा हालॉकि मुझे किसी मर्द ने छुआ तक नहीं इरशाद हुआ इसी तरह ख़ुदा जो चाहता है करता है जब वह किसी काम का करना ठान लेता है तो बस कह देता है 'हो जा' तो वह हो जाता है
48وَيُعَلِّمُهُ الْكِتَابَ وَالْحِكْمَةَ وَالتَّوْرَاةَ وَالْإِنجِيلَ
और (ऐ मरयिम) ख़ुदा उसको (तमाम) किताबे आसमानी और अक्ल की बातें और (ख़ासकर) तौरेत व इन्जील सिखा देगा
49وَرَسُولًا إِلَىٰ بَنِي إِسْرَائِيلَ أَنِّي قَدْ جِئْتُكُم بِآيَةٍ مِّن رَّبِّكُمْ ۖ أَنِّي أَخْلُقُ لَكُم مِّنَ الطِّينِ كَهَيْئَةِ الطَّيْرِ فَأَنفُخُ فِيهِ فَيَكُونُ طَيْرًا بِإِذْنِ اللَّهِ ۖ وَأُبْرِئُ الْأَكْمَهَ وَالْأَبْرَصَ وَأُحْيِي الْمَوْتَىٰ بِإِذْنِ اللَّهِ ۖ وَأُنَبِّئُكُم بِمَا تَأْكُلُونَ وَمَا تَدَّخِرُونَ فِي بُيُوتِكُمْ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لَّكُمْ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
और बनी इसराइल का रसूल (क़रार देगा और वह उनसे यूं कहेगा कि) मैं तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से (अपनी नबूवत की) यह निशानी लेकर आया हूं कि मैं गुंधीं हुई मिट्टी से एक परिन्दे की सूरत बनाऊॅगा फ़िर उस पर (कुछ) दम करूंगा तो वो ख़ुदा के हुक्म से उड़ने लगेगा और मैं ख़ुदा ही के हुक्म से मादरज़ाद (पैदायशी) अंधे और कोढ़ी को अच्छा करूंगा और मुर्दो को ज़िन्दा करूंगा और जो कुछ तुम खाते हो और अपने घरों में जमा करते हो मैं (सब) तुमको बता दूंगा अगर तुम ईमानदार हो तो बेशक तुम्हारे लिये इन बातों में (मेरी नबूवत की) बड़ी निशानी है
50وَمُصَدِّقًا لِّمَا بَيْنَ يَدَيَّ مِنَ التَّوْرَاةِ وَلِأُحِلَّ لَكُم بَعْضَ الَّذِي حُرِّمَ عَلَيْكُمْ ۚ وَجِئْتُكُم بِآيَةٍ مِّن رَّبِّكُمْ فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ
और तौरेत जो मेरे सामने मौजूद है मैं उसकी तसदीक़ करता हूं और (मेरे आने की) एक ग़रज़ यह (भी) है कि जो चीजे तुम पर हराम है उनमें से बाज़ को (हुक्मे ख़ुदा से) हलाल कर दूं और मैं तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से (अपनी नबूवत की) निशानी लेकर तुम्हारे पास आया हूं
51إِنَّ اللَّهَ رَبِّي وَرَبُّكُمْ فَاعْبُدُوهُ ۗ هَٰذَا صِرَاطٌ مُّسْتَقِيمٌ
पस तुम ख़ुदा से डरो और मेरी इताअत करो बेशक ख़ुदा ही मेरा और तुम्हारा परवरदिगार है
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अनुवाद — आल-इमरान 49

सूरा आल-इमरान आयत 49 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और बनी इसराइल का रसूल (क़रार देगा और वह उनसे…

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Tuesday, August 18, 2026

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