Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَخْلُقُ: मैं आकार देता हूँ, बनाता हूँ।
- كَهَيْئَةِ الطَّيْرِ: पक्षी के आकार जैसा।
- فَأَنفُخُ: फिर मैं फूँक मारता हूँ।
- الْأَكْمَهَ: वह व्यक्ति जो अंधा पैदा हुआ हो।
- الْأَبْرَصَ: कोढ़ (जिल्द की बीमारी) से पीड़ित व्यक्ति।
- تُدَّخِرُونَ: तुम छिपाकर रखते हो, संचय करते हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत हमें हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) के उस महान मिशन से परिचित कराती है, जब अल्लाह ने उन्हें बनी इसराइल की ओर रसूल बनाकर भेजा। उन्होंने अपनी क़ौम से कहा: "मैं तुम्हारे पास तुम्हारे रब की ओर से एक निशानी (चमत्कार) लेकर आया हूँ, जो इस बात का प्रमाण है कि मैं अल्लाह का भेजा हुआ हूँ।"
फिर उन्होंने अपने चमत्कारों का उल्लेख किया: वे मिट्टी से पक्षी के आकार की एक मूर्ति बनाते, उसमें फूँक मारते और अल्लाह की इजाज़त से वह सचमुच एक जीवित पक्षी बन जाती। यह कोई जादू नहीं था, बल्कि अल्लाह की क़ुदरत का प्रत्यक्ष प्रमाण था, क्योंकि यह किसी इंसान के बस की बात नहीं कि वह निर्जीव मिट्टी में जान डाल दे।
इसके अलावा, वे अल्लाह की इजाज़त से जन्म से अंधे व्यक्ति की आँखें ठीक कर देते थे, कोढ़ के रोगी को शिफ़ा देते थे, और अल्लाह की इजाज़त से मुर्दों को ज़िंदा कर देते थे। ये सब वे काम थे जो केवल अल्लाह की ताक़त से हो सकते थे, और यही उनकी सच्चाई की सबसे बड़ी गवाही थी।
एक और अद्भुत बात यह थी कि वे लोगों को बता देते थे कि तुमने घर में क्या खाया और क्या छिपाकर रखा है। यह उनके नबी होने का एक और सबूत था, क्योंकि यह ज्ञान केवल अल्लाह ही दे सकता है।
अल्लाह ने ये सारे चमत्कार हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) को इसलिए दिए ताकि बनी इसराइल बिना किसी संदेह के यक़ीन कर लें कि वे अल्लाह के सच्चे रसूल हैं। इन चमत्कारों में उन लोगों के लिए बड़ी निशानी थी जो सच्चे दिल से ईमान लाना चाहते थे।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने प्यारे नबियों को ऐसे चमत्कार देता है जो इंसानी समझ से बाहर होते हैं, ताकि लोग सीधे रास्ते पर आएँ। हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) की ये करामातें उनकी नबुव्वत की सच्चाई की गवाह हैं, और हम मुसलमान उन्हें अल्लाह के नबी के रूप में मानते हैं। यह हमारे लिए सबक है कि हम अल्लाह की क़ुदरत पर पूरा यक़ीन रखें, क्योंकि वही जीवन और मृत्यु का मालिक है। जिस अल्लाह ने मिट्टी से पक्षी बनाए और मुर्दों को ज़िंदा किया, वही हमारी हर मुश्किल को आसान कर सकता है। हमें अपने जीवन में अल्लाह के दीन को अपनाना चाहिए और उसके रसूलों पर ईमान लाना चाहिए, क्योंकि यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है।
📜 आयत 47-51 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 49
सूरा आल-इमरान आयत 49 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और बनी इसराइल का रसूल (क़रार देगा और वह उनसे…सूरा आयत 49/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 47–51. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


