आल-इमरान · 82/200
अनुवाद उच्चारण — सूरा आल-इमरान
فَمَن تَوَلَّىٰ بَعْدَ ذَٰلِكَ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْفَاسِقُونَ ۝٨٢
Faman tawallaa ba`da zaalika fa ulaaa`ika humul faasiqoon
📖 हिंदी अर्थ
और तुम्हारे साथ मैं भी एक गवाह हूं फिर उसके बाद जो शख्स (अपने क़ौल से) मुंह फेरे तो वही लोग बदचलन हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تَوَلَّىٰ: मुँह मोड़ लिया, विमुख हो गया, इस्लाम की दावत को छोड़ दिया।
  • الْفَاسِقُونَ: आज्ञा का उल्लंघन करने वाले, ईमान के दायरे से बाहर निकल जाने वाले, अवज्ञाकारी।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिसने इस स्पष्ट घोषणा और पुख्ता अहद (वचन) के बाद — जो अल्लाह ने अपने नबियों से लिया था कि वे मुहम्मद (ﷺ) पर ईमान लाएँगे और उनकी मदद करेंगे — इस दावत से मुँह मोड़ लिया और उसे ठुकरा दिया, तो ऐसे लोग ही असली फ़ासिक़ (अवज्ञाकारी) हैं। यानी वे अल्लाह के दीन (इस्लाम) से बाहर निकल गए और अपने रब की आज्ञा का उल्लंघन करके गुनाहगार बन गए। उनका यह विमुख होना उनके ईमान के दावे को झुठलाता है, क्योंकि सच्चा ईमान उस अहद को निभाने का नाम है जो अल्लाह ने अपने बन्दों से लिया है। यह चेतावनी उन सबके लिए है जो हक़ (सत्य) को जानने के बाद उससे विमुख हो जाते हैं।

फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह का दीन स्पष्ट और सच्चा है, और जो इसे जानने के बाद भी छोड़ देता है, वह अपने नुक़सान का ज़िम्मेदार खुद है।
  2. ईमान सिर्फ़ ज़ुबानी दावा नहीं, बल्कि अल्लाह से किए गए वचन को निभाना है; जो वचन तोड़ता है, वह फ़ासिक़ कहलाता है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि हक़ को पहचानने के बाद उस पर साबित क़दम रहना चाहिए, क्योंकि हक़ से मुँह मोड़ना इंसान को अल्लाह की रहमत से दूर कर देता है।
  4. इस्लाम की दावत ही सच्ची नजात (मुक्ति) का रास्ता है, और इस पर अमल करना ही इंसान को फ़ासिक़ी (अवज्ञा) से बचाता है।


📜 आयत 80-84 — सूरा आल-इमरान

80وَلَا يَأْمُرَكُمْ أَن تَتَّخِذُوا الْمَلَائِكَةَ وَالنَّبِيِّينَ أَرْبَابًا ۗ أَيَأْمُرُكُم بِالْكُفْرِ بَعْدَ إِذْ أَنتُم مُّسْلِمُونَ
और वह तुमसे ये तो (कभी) न कहेगा कि फ़रिश्तों और पैग़म्बरों को ख़ुदा बना लो भला (कहीं ऐसा हो सकता है कि) तुम्हारे मुसलमान हो जाने के बाद तुम्हें कुफ़्र का हुक्म करेगा
81وَإِذْ أَخَذَ اللَّهُ مِيثَاقَ النَّبِيِّينَ لَمَا آتَيْتُكُم مِّن كِتَابٍ وَحِكْمَةٍ ثُمَّ جَاءَكُمْ رَسُولٌ مُّصَدِّقٌ لِّمَا مَعَكُمْ لَتُؤْمِنُنَّ بِهِ وَلَتَنصُرُنَّهُ ۚ قَالَ أَأَقْرَرْتُمْ وَأَخَذْتُمْ عَلَىٰ ذَٰلِكُمْ إِصْرِي ۖ قَالُوا أَقْرَرْنَا ۚ قَالَ فَاشْهَدُوا وَأَنَا مَعَكُم مِّنَ الشَّاهِدِينَ
(और ऐ रसूल वह वक्त भी याद दिलाओ) जब ख़ुदा ने पैग़म्बरों से इक़रार लिया कि हम तुमको जो कुछ किताब और हिकमत (वगैरह) दे उसके बाद तुम्हारे पास कोई रसूल आए और जो किताब तुम्हारे पास उसकी तसदीक़ करे तो (देखो) तुम ज़रूर उस पर ईमान लाना, और ज़रूर उसकी मदद करना (और) ख़ुदा ने फ़रमाया क्या तुमने इक़रार लिया तुमने मेरे (एहद का) बोझ उठा लिया सबने अर्ज़ की हमने इक़रार किया इरशाद हुआ (अच्छा) तो आज के क़ौल व (क़रार के) आपस में एक दूसरे के गवाह रहना
82فَمَن تَوَلَّىٰ بَعْدَ ذَٰلِكَ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْفَاسِقُونَ
और तुम्हारे साथ मैं भी एक गवाह हूं फिर उसके बाद जो शख्स (अपने क़ौल से) मुंह फेरे तो वही लोग बदचलन हैं
83أَفَغَيْرَ دِينِ اللَّهِ يَبْغُونَ وَلَهُ أَسْلَمَ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ طَوْعًا وَكَرْهًا وَإِلَيْهِ يُرْجَعُونَ
तो क्या ये लोग ख़ुदा के दीन के सिवा (कोई और दीन) ढूंढते हैं हालॉकि जो (फ़रिश्ते) आसमानों में हैं और जो (लोग) ज़मीन में हैं सबने ख़ुशी ख़ुशी या ज़बरदस्ती उसके सामने अपनी गर्दन डाल दी है और (आख़िर सब) उसकी तरफ़ लौट कर जाएंगे
84قُلْ آمَنَّا بِاللَّهِ وَمَا أُنزِلَ عَلَيْنَا وَمَا أُنزِلَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَإِسْمَاعِيلَ وَإِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ وَالْأَسْبَاطِ وَمَا أُوتِيَ مُوسَىٰ وَعِيسَىٰ وَالنَّبِيُّونَ مِن رَّبِّهِمْ لَا نُفَرِّقُ بَيْنَ أَحَدٍ مِّنْهُمْ وَنَحْنُ لَهُ مُسْلِمُونَ
(ऐ रसूल उन लोगों से) कह दो कि हम तो ख़ुदा पर ईमान लाए और जो किताब हम पर नाज़िल हुई और जो (सहीफ़े) इबराहीम और इस्माईल और इसहाक़ और याकूब और औलादे याकूब पर नाज़िल हुये और मूसा और ईसा और दूसरे पैग़म्बरों को जो (जो किताब) उनके परवरदिगार की तरफ़ से इनायत हुई(सब पर ईमान लाए) हम तो उनमें से किसी एक में भी फ़र्क़ नहीं करते
आल-इमरानकुरान सूची
200आयत
मदनीअवतरण स्थान
82आयत

अनुवाद — आल-इमरान 82

सूरा आल-इमरान आयत 82 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तुम्हारे साथ मैं भी एक गवाह हूं फिर उसके…

सूरा आयत 82/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 80–84. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Tuesday, September 29, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए