Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَبْغُونَ: चाहते हैं, खोजते हैं।
- أَسْلَمَ: आज्ञाकारी हुआ, समर्पित हुआ।
- طَوْعًا: स्वेच्छा से, अपनी इच्छा से।
- कَرْهًا: विवश होकर, अनिच्छा से।
तफ़सीर (व्याख्या):
क्या ये लोग, जो अहले-किताब में से हैं और सत्य से भटक गए हैं, अल्लाह के दीन (इस्लाम) के अलावा किसी और दीन की तलाश कर रहे हैं? जबकि अल्लाह ही वह है जिसने इस्लाम को अपने बंदों के लिए चुना है। यह वही दीन है जिसे अल्लाह ने अपने आख़िरी नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर उतारा।
सच्चाई यह है कि आसमानों और ज़मीन में जो भी है—चाहे वह फ़रिश्ते हों, इंसान हों, जिन्नात हों या अन्य सृष्टियाँ—सभी अल्लाह के सामने समर्पित और आज्ञाकारी हैं। मोमिन लोग अपनी इच्छा और खुशी से उसकी आज्ञा का पालन करते हैं, जबकि काफ़िर और मुनाफ़िक़ लोग विवश होकर उसके अधीन हैं। क्योंकि वे अल्लाह की कुदरत और उसके क़ानून से बच नहीं सकते। जब उन पर मुसीबतें आती हैं या वे विपत्ति में घिरते हैं, तो वे भी लाचार होकर अल्लाह ही की ओर रुजू करते हैं। पूरी कायनात उसी के हुक्म के ताबे है, और अंत में सबको उसी की ओर लौटना है। क़यामत के दिन वह हर एक को उसके कर्मों का बदला देगा।
यह आयत अल्लाह की ओर से एक सख़्त चेतावनी है कि कोई भी व्यक्ति इस्लाम के अलावा किसी और धर्म पर अल्लाह के सामने पेश न हो, क्योंकि अल्लाह ने अपने बंदों के लिए केवल इस्लाम को ही पसंद किया है।
फ़ायदे (लाभ):
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि इस्लाम ही अल्लाह का सच्चा दीन है, और अल्लाह के यहाँ कोई और दीन क़ुबूल नहीं। इसलिए हमें अपने दीन पर दृढ़ रहना चाहिए और उस पर गर्व करना चाहिए।
- पूरी कायनात अल्लाह के आगे समर्पित है, तो हम इंसानों को भी अपने रब की आज्ञा का पालन स्वेच्छा से करना चाहिए, न कि विवश होकर। यही हमारी सफलता का रास्ता है।
- यह आयत हमें याद दिलाती है कि हर हाल में हमें अल्लाह की ओर लौटना है, इसलिए अपनी ज़िंदगी को उसी के बताए हुए तरीके पर चलाना चाहिए, ताकि उस दिन हम कामयाब हों।
- इस्लाम एक ऐसा दीन है जो फ़ितरत (प्राकृतिक स्वभाव) के अनुरूप है, इसलिए इसे अपनाना आसान है और यही सच्ची राह है।
📜 आयत 81-85 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 83
सूरा आल-इमरान आयत 83 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो क्या ये लोग ख़ुदा के दीन के सिवा (कोई…सूरा आयत 83/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 81–85. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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