आल-इमरान · 86/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
كَيْفَ يَهْدِي اللَّهُ قَوْمًا كَفَرُوا بَعْدَ إِيمَانِهِمْ وَشَهِدُوا أَنَّ الرَّسُولَ حَقٌّ وَجَاءَهُمُ الْبَيِّنَاتُ ۚ وَاللَّهُ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الظَّالِمِينَ ۝٨٦
Kaifa yahdil laahu qawman kafaroo ba`da eemaanihim wa shahidooo annar Rasoola haqqunw wa jaaa`ahumul baiyinaat; wallaahu laa yahdil qawmaz zaalimeen
📖 हिंदी अर्थ
भला ख़ुदा ऐसे लोगों की क्योंकर हिदायत करेगा जो इमाने लाने के बाद फिर काफ़िर हो गए हालॉकि वह इक़रार कर चुके थे कि पैग़म्बर (आख़िरूज़ज़मा) बरहक़ हैं और उनके पास वाजेए व रौशन मौजिज़े भी आ चुके थे और ख़ुदा ऐसी हठधर्मी करने वाले लोगों की हिदायत नहीं करता

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَهْدِي: मार्गदर्शन करना, सत्य की ओर ले जाना।
  • كَفَرُوا: कुफ़्र किया, इनकार किया।
  • إِيمَانِهِمْ: उनका ईमान (विश्वास)।
  • شَهِدُوا: गवाही दी, साक्षी बने।
  • الْبَيِّنَاتُ: स्पष्ट प्रमाण, खुले चमत्कार और आयतें।
  • الظَّالِمِينَ: अत्याचारी, जो सत्य को जानकर उसे छोड़ दें।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में बात करती है जो ईमान लाने के बाद, और यह गवाही देने के बाद कि रसूल (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) सत्य हैं और उनके द्वारा लाई गई हर चीज़ सत्य है, और उनके पास स्पष्ट प्रमाण और निशानियाँ आ चुकी थीं—फिर भी वे कुफ़्र की ओर लौट गए। अल्लाह पूछता है कि ऐसे लोगों को अल्लाह कैसे मार्गदर्शन दे सकता है? यह एक असंभव बात है, क्योंकि जिसने सत्य को जान लिया, उसे अपनी आँखों से देख लिया, और फिर भी उसे ठुकरा दिया, उसका दिल मुहरबंद हो जाता है। अल्लाह ऐसे ज़ालिमों को हिदायत नहीं देता, जो जानबूझकर सत्य का इनकार करते हैं और अंधकार को प्रकाश पर तरजीह देते हैं। यहाँ "ज़ालिम" उन्हें कहा गया है जो अपने ज्ञान के बावजूद सत्य को छोड़कर असत्य पर चलते हैं, और यह उनका अपने ऊपर अत्याचार है।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. ईमान के बाद कुफ़्र की ओर लौटना सबसे बड़ा अत्याचार है, और ऐसे लोग अल्लाह की हिदायत से वंचित रह जाते हैं।
  2. यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य को जानने के बाद उस पर अमल करना ज़रूरी है; केवल जानना काफी नहीं है।
  3. अल्लाह की हिदायत उन्हीं को मिलती है जो सत्य की तलाश में सच्चे दिल से हों और उसे अपनाने का इरादा रखें।
  4. यह हमें चेतावनी देती है कि अपने ईमान को हल्के में न लें, और उसे बचाए रखने के लिए दुआ करते रहें।
  5. यह आयत मुसलमानों को यह भी बताती है कि जो लोग सत्य को जानकर उसका विरोध करते हैं, उनके लिए हिदायत की कोई उम्मीद नहीं, इसलिए हमें अपने ईमान पर स्थिर रहना चाहिए और अल्लाह से साबित क़दमी की दुआ माँगनी चाहिए।


📜 आयत 84-88 — आल-इमरान

84قُلْ آمَنَّا بِاللَّهِ وَمَا أُنزِلَ عَلَيْنَا وَمَا أُنزِلَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَإِسْمَاعِيلَ وَإِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ وَالْأَسْبَاطِ وَمَا أُوتِيَ مُوسَىٰ وَعِيسَىٰ وَالنَّبِيُّونَ مِن رَّبِّهِمْ لَا نُفَرِّقُ بَيْنَ أَحَدٍ مِّنْهُمْ وَنَحْنُ لَهُ مُسْلِمُونَ
(ऐ रसूल उन लोगों से) कह दो कि हम तो ख़ुदा पर ईमान लाए और जो किताब हम पर नाज़िल हुई और जो (सहीफ़े) इबराहीम और इस्माईल और इसहाक़ और याकूब और औलादे याकूब पर नाज़िल हुये और मूसा और ईसा और दूसरे पैग़म्बरों को जो (जो किताब) उनके परवरदिगार की तरफ़ से इनायत हुई(सब पर ईमान लाए) हम तो उनमें से किसी एक में भी फ़र्क़ नहीं करते
85وَمَن يَبْتَغِ غَيْرَ الْإِسْلَامِ دِينًا فَلَن يُقْبَلَ مِنْهُ وَهُوَ فِي الْآخِرَةِ مِنَ الْخَاسِرِينَ
और हम तो उसी (यकता ख़ुदा) के फ़रमाबरदार हैं और जो शख्स इस्लाम के सिवा किसी और दीन की ख्वाहिश करे तो उसका वह दीन हरगिज़ कुबूल ही न किया जाएगा और वह आख़िरत में सख्त घाटे में रहेगा
86كَيْفَ يَهْدِي اللَّهُ قَوْمًا كَفَرُوا بَعْدَ إِيمَانِهِمْ وَشَهِدُوا أَنَّ الرَّسُولَ حَقٌّ وَجَاءَهُمُ الْبَيِّنَاتُ ۚ وَاللَّهُ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الظَّالِمِينَ
भला ख़ुदा ऐसे लोगों की क्योंकर हिदायत करेगा जो इमाने लाने के बाद फिर काफ़िर हो गए हालॉकि वह इक़रार कर चुके थे कि पैग़म्बर (आख़िरूज़ज़मा) बरहक़ हैं और उनके पास वाजेए व रौशन मौजिज़े भी आ चुके थे और ख़ुदा ऐसी हठधर्मी करने वाले लोगों की हिदायत नहीं करता
87أُولَٰئِكَ جَزَاؤُهُمْ أَنَّ عَلَيْهِمْ لَعْنَةَ اللَّهِ وَالْمَلَائِكَةِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ
ऐसे लोगों की सज़ा यह है कि उनपर ख़ुदा और फ़रिश्तों और (दुनिया जहॉन के) सब लोगों की फिटकार हैं
88خَالِدِينَ فِيهَا لَا يُخَفَّفُ عَنْهُمُ الْعَذَابُ وَلَا هُمْ يُنظَرُونَ
और वह हमेशा उसी फिटकार में रहेंगे न तो उनके अज़ाब ही में तख्फ़ीफ़ की जाएगी और न उनको मोहलत दी जाएगी
आल-इमरानकुरान सूची
200आयत
मदनीRevelation
86आयत

अनुवाद — आल-इमरान 86

सूरा आल-इमरान आयत 86 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : भला ख़ुदा ऐसे लोगों की क्योंकर हिदायत करेगा जो इमाने…

सूरा आयत 86/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 84–88. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए