अर-रूम · 12/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
وَيَوْمَ تَقُومُ السَّاعَةُ يُبْلِسُ الْمُجْرِمُونَ ۝١٢
Wa yawma taqoomus Saa`atu yublisul mujrimoon
📖 हिंदी अर्थ
और जिस दिन क़यामत बरपा होगी (उस दिन) गुनेहगार लोग ना उम्मीद होकर रह जाएँगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَقُومُ السَّاعَةُ: क़ियामत का दिन आएगा, यानी वह समय जब सारा संसार समाप्त होकर हश्र (पुनरुत्थान) शुरू होगा।
  • يُبْلِسُ: निराश हो जाना, हताश हो जाना, यानी हर भले से मायूस हो जाना और सिर झुकाए खड़े रहना।
  • الْمُجْرِمُونَ: अपराधी, वे लोग जिन्होंने कुफ़्र और गुनाहों का रास्ता अपनाया, ख़ासकर मुशरिक (शिर्क करने वाले)।

तफ़सीर (व्याख्या):

जिस दिन क़ियामत की घड़ी आ खड़ी होगी, और सारे जहान का निज़ाम तब्दील हो जाएगा, उस दिन मुजरिमों (अपराधियों) की हालत बेहद बदतर होगी। वे अपने किए पर पछताएँगे, लेकिन पछतावे का वक़्त नहीं होगा। उनकी सारी उम्मीदें ख़त्म हो जाएँगी, और वे अल्लाह की रहमत से बिल्कुल मायूस हो जाएँगे। उनके पास कोई बहाना नहीं बचेगा, कोई दलील नहीं होगी, और न ही कोई सहारा। वे समझ जाएँगे कि अब किसी तरह की नजात (मुक्ति) मुमकिन नहीं। उनके चेहरे स्याह होंगे, सिर झुके होंगे, और वे शर्मिंदगी और हसरत के मारे खामोश खड़े होंगे। यह वह दिन होगा जब हर गुनाहगार अपनी औकात समझ जाएगा, और उसे यक़ीन हो जाएगा कि अल्लाह की पकड़ से बचना नामुमकिन है।

दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि आज हम जो भी कर रहे हैं, उसका हिसाब एक दिन ज़रूर होगा। अगर हम आज अल्लाह की नाफ़रमानी में मशगूल हैं, तो क़ियामत के दिन हमारी हालत भी इन मुजरिमों जैसी होगी — निराश, बेबस और पछतावे में डूबी हुई। लेकिन अल्लाह ने हम पर रहमत की है कि उसने हमें मौका दिया है। आज हम तौबा कर सकते हैं, अपनी गलतियों से बाज़ आ सकते हैं, और अल्लाह की रहमत की तरफ लौट सकते हैं। यह दुनिया इम्तिहान की जगह है, और क़ियामत उस इम्तिहान का नतीजा है। जो आज अल्लाह की इबादत करेगा और उसके हुक्मों पर चलेगा, वह उस दिन खुश और कामयाब होगा। इसलिए हमें चाहिए कि आज ही अपनी ज़िंदगी को सही रास्ते पर लगाएँ, ताकि उस बड़े दिन हम निराश न हों, बल्कि अल्लाह की रहमत और जन्नत की खुशखबरी पाएँ। याद रखें, अल्लाह की रहमत बहुत वसी (व्यापक) है, और वह तौबा करने वालों को बहुत प्यार करता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 10-14 — अर-रूम

10ثُمَّ كَانَ عَاقِبَةَ الَّذِينَ أَسَاءُوا السُّوأَىٰ أَن كَذَّبُوا بِآيَاتِ اللَّهِ وَكَانُوا بِهَا يَسْتَهْزِئُونَ
फिर जिन लोगों ने बुराई की थी उनका अन्जाम बुरा ही हुआ क्योंकि उन लोगों ने ख़ुदा की आयतों को झुठलाया था और उनके साथ मसखरा पन किया किए
11اللَّهُ يَبْدَأُ الْخَلْقَ ثُمَّ يُعِيدُهُ ثُمَّ إِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
ख़ुदा ही ने मख़लूकात को पहली बार पैदा किया फिर वही दुबारा (पैदा करेगा) फिर तुम सब लोग उसी की तरफ लौटाए जाओगे
12وَيَوْمَ تَقُومُ السَّاعَةُ يُبْلِسُ الْمُجْرِمُونَ
और जिस दिन क़यामत बरपा होगी (उस दिन) गुनेहगार लोग ना उम्मीद होकर रह जाएँगे
13وَلَمْ يَكُن لَّهُم مِّن شُرَكَائِهِمْ شُفَعَاءُ وَكَانُوا بِشُرَكَائِهِمْ كَافِرِينَ
और उनके (बनाए हुए ख़ुदा के) शरीकों में से कोई उनका सिफारिशी न होगा और ये लोग ख़़ुद भी अपने शरीकों से इन्कार कर जाएँगे
14وَيَوْمَ تَقُومُ السَّاعَةُ يَوْمَئِذٍ يَتَفَرَّقُونَ
और जिस दिन क़यामत बरपा होगी उस दिन (मोमिनों से) कुफ्फ़ार जुदा हो जाएँगें
अर-रूमकुरान सूची
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मक्कीRevelation
12आयत

अनुवाद — अर-रूम 12

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Tuesday, August 18, 2026

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