Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- شُرَكَائِهِمْ — उनके साझीदार (जिन्हें वे दुनिया में ईश्वर का भागीदार मानकर पूजते थे)
- شُفَعَاءُ — सिफ़ारिश करने वाले, मध्यस्थ
- كَافِرِينَ — इनकार करने वाले, अस्वीकार करने वाले (यहाँ अर्थ: उनसे बैर रखने वाले और उन्हें छोड़ देने वाले)
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उस भयानक दिन (क़ियामत) की स्थिति का वर्णन कर रही है जब मुशरिक (ईश्वर का साझीदार ठहराने वाले) लोग अपने उन देवी-देवताओं और माबूदों की ओर आशा भरी निगाहों से देखेंगे, जिन्हें उन्होंने दुनिया में अल्लाह के सिवा पूजा था। वे सोचेंगे कि शायद ये उनकी सिफ़ारिश करके उन्हें अज़ाब से बचा लेंगे। लेकिन उस दिन उनकी यह उम्मीद पूरी तरह निराशा में बदल जाएगी, क्योंकि उनके वे साझीदार न तो उनकी सिफ़ारिश कर सकेंगे और न ही उन्हें कोई मदद पहुँचा सकेंगे।
इससे भी बढ़कर दर्दनाक बात यह है कि जिन्हें वे अपना सहारा समझते थे, वही उनसे बैर कर लेंगे और उन्हें अस्वीकार कर देंगे। वे दोनों एक-दूसरे से बराअत (अलगाव) का ऐलान करेंगे — पूजने वाले पूजे जाने वालों से और पूजे जाने वाले पूजने वालों से। हर एक दूसरे को छोड़कर भागेगा और दूसरे पर लानत भेजेगा। यह उस धोखे का सबसे बड़ा खुलासा होगा जो दुनिया में शिर्क (ईश्वर के साथ साझीदार ठहराने) के रूप में उन्हें मिला था।
इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि सिफ़ारिश और मध्यस्थता का अधिकार केवल अल्लाह के पास है, और वह भी केवल उसी की अनुमति से होगी। जो लोग अल्लाह के सिवा किसी और से मदद, नजात (मुक्ति) या सिफ़ारिश की उम्मीद रखते हैं, वे क़ियामत के दिन बुरी तरह निराश होंगे। अतः बुद्धिमान वही है जो इसी दुनिया में अपने रिश्ते को केवल अल्लाह से जोड़ ले, उसकी इबादत करे और उसी से मदद माँगे। यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है, और यही वह रास्ता है जो हमें उस दिन की शर्मिंदगी और निराशा से बचा सकता है।
आइए हम अपने दिलों को शिर्क की हर रूप से पाक करें और केवल अल्लाह पर भरोसा रखें, क्योंकि वही है जो सुनता है, देखता है और अपने बंदों की मदद करता है। उसकी रहमत और माफ़ी की कोई सीमा नहीं है, बशर्ते हम सच्चे दिल से उसकी ओर लौट आएँ।
📜 आयत 11-15 — सूरा अर-रूम
अनुवाद — अर-रूम 13
सूरा अर-रूम आयत 13 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उनके (बनाए हुए ख़ुदा के) शरीकों में से कोई…सूरा आयत 13/60 — सूरा अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अर-रूम सुनें, सूरा अर-रूम अनुवाद, सूरा अर-रूम mp3, सूरा अर-रूम pdf. आयत 11–15. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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