लुकमान · 4/34
अनुवाद उच्चारण — लुकमान
الَّذِينَ يُقِيمُونَ الصَّلَاةَ وَيُؤْتُونَ الزَّكَاةَ وَهُم بِالْآخِرَةِ هُمْ يُوقِنُونَ ۝٤
Allazeena yuqeemoonas Salaata wa yu`toonaz Zakaata wa hum bil Aakhirati hum yooqinoon
📖 हिंदी अर्थ
जो पाबन्दी से नमाज़ अदा करते हैं और ज़कात देते हैं और वही लोग आख़िरत का भी यक़ीन रखते हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُقِيمُونَ الصَّلَاةَ: नमाज़ को उसके सही तरीके, समय और शर्तों के साथ अदा करना।
  • يُؤْتُونَ الزَّكَاةَ: अपने माल की निर्धारित ज़कात (फ़रज़ रक़म) उसके हक़दारों को देना।
  • يُوقِنُونَ: पूर्ण विश्वास और यक़ीन रखना, बिना किसी संदेह के।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन नेक लोगों का वर्णन करती है जो अल्लाह के सच्चे बंदे हैं। उनकी पहली विशेषता यह है कि वे नमाज़ को पूरी तरह से अदा करते हैं—अपने समय पर, अपने आदाब (शिष्टाचार) के साथ, और खुशू (विनम्रता) के साथ। नमाज़ ही वह रस्सी है जो बंदे को उसके रब से जोड़ती है, और इसे क़ायम करने का मतलब है इसे हमेशा और बेहतर तरीके से पढ़ना। दूसरी विशेषता यह है कि वे ज़कात देते हैं—अपने माल का वह हिस्सा जो अल्लाह ने उन पर फ़रज़ किया है, वे ग़रीबों, मिस्कीनों और ज़रूरतमंदों को देते हैं। यह उनके दिल की सफ़ाई और समाज के प्रति उनकी ज़िम्मेदारी को दर्शाता है। तीसरी विशेषता यह है कि वे आख़िरत (परलोक) पर पूरा यक़ीन रखते हैं—वे जानते हैं कि मौत के बाद दोबारा जी उठना है, हिसाब होगा, और हर अच्छे या बुरे काम का बदला मिलेगा। यह यक़ीन उन्हें हर अच्छे काम की तरफ़ प्रेरित करता है और बुरे कामों से रोकता है। ये तीनों गुण मिलकर एक मुकम्मल (पूर्ण) मुसलमान की पहचान हैं—जिसका दिल अल्लाह से जुड़ा हो, जो अपने माल में दूसरों का हक़ समझता हो, और जो आख़िरत की तैयारी में लगा रहे। यह आयत हमें सिखाती है कि सच्ची कामयाबी सिर्फ़ दुनिया में नहीं, बल्कि आख़िरत में है, और यही तीन काम हमें उस कामयाबी तक पहुँचाते हैं। अल्लाह हमें इन गुणों पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 2-6 — लुकमान

2تِلْكَ آيَاتُ الْكِتَابِ الْحَكِيمِ
ये सूरा हिकमत से भरी हुई किताब की आयतें है
3هُدًى وَرَحْمَةً لِّلْمُحْسِنِينَ
जो (अज़सरतापा) उन लोगों के लिए हिदायत व रहमत है
4الَّذِينَ يُقِيمُونَ الصَّلَاةَ وَيُؤْتُونَ الزَّكَاةَ وَهُم بِالْآخِرَةِ هُمْ يُوقِنُونَ
जो पाबन्दी से नमाज़ अदा करते हैं और ज़कात देते हैं और वही लोग आख़िरत का भी यक़ीन रखते हैं
5أُولَٰئِكَ عَلَىٰ هُدًى مِّن رَّبِّهِمْ ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ
यही लोग अपने परवरदिगार की हिदायत पर आमिल हैं और यही लोग (क़यामत में) अपनी दिली मुरादें पाएँगे
6وَمِنَ النَّاسِ مَن يَشْتَرِي لَهْوَ الْحَدِيثِ لِيُضِلَّ عَن سَبِيلِ اللَّهِ بِغَيْرِ عِلْمٍ وَيَتَّخِذَهَا هُزُوًا ۚ أُولَٰئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ مُّهِينٌ
और लोगों में बाज़ (नज़र बिन हारिस) ऐसा है जो बेहूदा क़िस्से (कहानियाँ) ख़रीदता है ताकि बग़ैर समझे बूझे (लोगों को) ख़ुदा की (सीधी) राह से भड़का दे और आयातें ख़ुदा से मसख़रापन करे ऐसे ही लोगों के लिए बड़ा रुसवा करने वाला अज़ाब है
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अनुवाद — लुकमान 4

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Tuesday, August 18, 2026

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