फातिर · 17/45
अनुवाद उच्चारण — सूरा फातिर
وَمَا ذَٰلِكَ عَلَى اللَّهِ بِعَزِيزٍ ۝١٧
Wa maa zaalika `alal laahi bi`azeez
📖 हिंदी अर्थ
और ये कुछ खुदा के वास्ते दुशवार नहीं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • عَزِيز: कठिन, दुर्लभ, असंभव या मुश्किल। यहाँ इसका अर्थ है कि अल्लाह के लिए कोई काम कठिन नहीं है।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि तुम्हें (इंसानों को) मिटा देना और तुम्हारे स्थान पर एक नई सृष्टि पैदा कर देना — यह काम अल्लाह के लिए कोई कठिन या असंभव नहीं है। बल्कि यह उसके लिए अत्यंत सरल और आसान है। जिस प्रकार उसने पहली बार तुम्हें पैदा किया, उसी प्रकार वह तुम्हें दोबारा पैदा करने पर भी पूर्ण रूप से सक्षम है। अल्लाह की कुदरत (शक्ति) के आगे कोई चीज़ मुश्किल नहीं, न छोटी और न बड़ी। वह जब किसी चीज़ का इरादा करता है, तो बस कहता है "हो जा" और वह हो जाती है।

यह आयत हमें अल्लाह की असीम शक्ति और कुदरत की याद दिलाती है। जब हमें यह विश्वास हो जाए कि अल्लाह के लिए कुछ भी कठिन नहीं है, तो हमारे दिलों में उसके प्रति पूर्ण भरोसा और आशा पैदा होती है। हम जानते हैं कि चाहे हमारी परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, अल्लाह उन्हें आसान कर सकता है। वही हमारा रक्षक, सहायक और मालिक है।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की कुदरत के सामने हमें विनम्र और आज्ञाकारी बनना चाहिए। हमें उसकी इबादत में कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए, क्योंकि वह सब कुछ कर सकता है। उसकी रहमत और कृपा से ही हमारा अस्तित्व है, और उसी की इच्छा से हमारा अंत होगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने जीवन को उसकी रज़ा (प्रसन्नता) के अनुसार ढालें, और उसकी ओर लौटने का प्रयास करें।

याद रखें, अल्लाह के लिए कुछ भी असंभव नहीं है — न तो हमें दोबारा जीवित करना, न हमारा हिसाब लेना, न हमें जन्नत या जहन्नम में दाखिल करना। यह सब उसके लिए बेहद आसान है। इसलिए हमें अपने आचरण को सुधारना चाहिए और उसकी रहमत के हक़दार बनने की कोशिश करनी चाहिए, क्योंकि वही सबसे अधिक दयालु और क्षमाशील है।



📜 आयत 15-19 — सूरा फातिर

15۞ يَا أَيُّهَا النَّاسُ أَنتُمُ الْفُقَرَاءُ إِلَى اللَّهِ ۖ وَاللَّهُ هُوَ الْغَنِيُّ الْحَمِيدُ
लोगों तुम सब के सब खुदा के (हर वक्त) मोहताज हो और (सिर्फ) खुदा ही (सबसे) बेपरवा सज़ावारे हम्द (व सना) है
16إِن يَشَأْ يُذْهِبْكُمْ وَيَأْتِ بِخَلْقٍ جَدِيدٍ
अगर वह चाहे तो तुम लोगों को (अदम के पर्दे में) ले जाए और एक नयी ख़िलक़त ला बसाए
17وَمَا ذَٰلِكَ عَلَى اللَّهِ بِعَزِيزٍ
और ये कुछ खुदा के वास्ते दुशवार नहीं
18وَلَا تَزِرُ وَازِرَةٌ وِزْرَ أُخْرَىٰ ۚ وَإِن تَدْعُ مُثْقَلَةٌ إِلَىٰ حِمْلِهَا لَا يُحْمَلْ مِنْهُ شَيْءٌ وَلَوْ كَانَ ذَا قُرْبَىٰ ۗ إِنَّمَا تُنذِرُ الَّذِينَ يَخْشَوْنَ رَبَّهُم بِالْغَيْبِ وَأَقَامُوا الصَّلَاةَ ۚ وَمَن تَزَكَّىٰ فَإِنَّمَا يَتَزَكَّىٰ لِنَفْسِهِ ۚ وَإِلَى اللَّهِ الْمَصِيرُ
और याद रहे कि कोई शख्स किसी दूसरे (के गुनाह) का बोझ नहीं उठाएगा और अगर कोई (अपने गुनाहों का) भारी बोझ उठाने वाला अपना बोझ उठाने के वास्ते (किसी को) बुलाएगा तो उसके बारे में से कुछ भी उठाया न जाएगा अगरचे (कोई किसी का) कराबतदार ही (क्यों न) हो (ऐ रसूल) तुम तो बस उन्हीं लोगों को डरा सकते हो जो बे देखे भाले अपने परवरदिगार का ख़ौफ रखते हैं और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ते हैं और (याद रखो कि) जो शख्स पाक साफ रहता है वह अपने ही फ़ायदे के वास्ते पाक साफ रहता है और (आख़िरकार सबको हिरफिर के) खुदा ही की तरफ जाना है
19وَمَا يَسْتَوِي الْأَعْمَىٰ وَالْبَصِيرُ
और अन्धा (क़ाफिर) और ऑंखों वाला (मोमिन किसी तरह) बराबर नहीं हो सकते
फातिरकुरान सूची
45आयत
मक्कीअवतरण स्थान
17आयत

अनुवाद — फातिर 17

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Thursday, October 1, 2026

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