फातिर · 16/45
अनुवाद उच्चारण — फातिर
إِن يَشَأْ يُذْهِبْكُمْ وَيَأْتِ بِخَلْقٍ جَدِيدٍ ۝١٦
Iny yashaa yuzhibkum wa yaati bikhalqin jadeed
📖 हिंदी अर्थ
अगर वह चाहे तो तुम लोगों को (अदम के पर्दे में) ले जाए और एक नयी ख़िलक़त ला बसाए
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُذْهِبْكُمْ — अर्थात तुम्हें मिटा दे, नष्ट कर दे।
  • بِخَلْقٍ جَدِيدٍ — अर्थात तुम्हारे स्थान पर नई सृष्टि (नए लोग) ले आए।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में अपनी पूर्ण शक्ति और सर्वोच्च अधिकार का बयान कर रहा है। वह फ़रमाता है कि ऐ लोगों! यदि वह चाहे तो तुम सबको नष्ट कर दे और तुम्हारे स्थान पर एक नई सृष्टि ले आए — ऐसे लोग जो उसकी आज्ञा का पालन करें, उसकी इबादत करें और उसके साथ किसी को साझीदार न बनाएँ।

यह अल्लाह की उस शक्ति का प्रमाण है जो किसी भी चीज़ पर आश्रित नहीं। वह किसी का मोहताज नहीं कि तुम उसकी इबादत करो, बल्कि तुम्हारी इबादत का लाभ स्वयं तुम्हें ही पहुँचता है। यदि तुम उसकी अवज्ञा करते हो और उसके साथ कुफ़्र करते हो, तो उसके राज्य में कोई कमी नहीं आती। वह चाहे तो तुम्हें हटाकर दूसरे लोगों को ले आए जो उसके प्रति वफ़ादार हों, उसकी इबादत में तत्पर हों और उसकी आज्ञाओं का पालन करें।

यह आयत मुसलमानों के लिए एक चेतावनी भी है और एक प्रेरणा भी। चेतावनी इस बात की कि अल्लाह की नेमतों को हल्के में न लो। उसकी तरफ़ से मिली हिदायत और इस्लाम की नेमत को संजोकर रखो, क्योंकि यदि तुम कृतघ्न हुए तो अल्लाह तुम्हें बदल सकता है। और प्रेरणा इस बात की कि अल्लाह की रहमत और उसकी मदद पर भरोसा रखो, क्योंकि वह हर पल नई सृष्टि पैदा करने पर क़ादिर है। जिस तरह उसने तुम्हें पैदा किया, उसी तरह वह तुम्हारे बाद दूसरों को भी पैदा कर सकता है।

इस आयत में अल्लाह तआला की तरफ़ से एक प्यारा संकेत भी है कि वह अपने बंदों को ख़त्म करना नहीं चाहता, बल्कि उनकी हिदायत और भलाई चाहता है। वह तो बस यह बताना चाहता है कि उसकी शक्ति की कोई सीमा नहीं, और उसकी इबादत ही सच्ची कामयाबी का रास्ता है। जो लोग उसकी इबादत से मुँह मोड़ते हैं, वह उनके बदले दूसरे लोगों को ले आता है जो उसकी इबादत में आगे बढ़कर हिस्सा लेते हैं।

इसलिए ऐ मुसलमान! अपने रब की तरफ़ रुजू करो, उसकी इबादत को अपनी ज़िंदगी का मरकज़ बनाओ, और उसकी नेमतों का शुक्र अदा करो। याद रखो, अल्लाह की शक्ति के आगे कोई ताक़त नहीं टिक सकती, और उसकी रहमत उन लोगों के लिए है जो उसकी तरफ़ आते हैं।

🎧 सुनें

📜 आयत 14-18 — फातिर

14إِن تَدْعُوهُمْ لَا يَسْمَعُوا دُعَاءَكُمْ وَلَوْ سَمِعُوا مَا اسْتَجَابُوا لَكُمْ ۖ وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ يَكْفُرُونَ بِشِرْكِكُمْ ۚ وَلَا يُنَبِّئُكَ مِثْلُ خَبِيرٍ
अगर तुम उनको पुकारो तो वह तुम्हारी पुकार को सुनते नहीं अगर (बिफ़रज़े मुहाल) सुनों भी तो तुम्हारी दुआएँ नहीं कुबूल कर सकते और क़यामत के दिन तुम्हारे शिर्क से इन्कार कर बैठेंगें और वाक़िफकार (शख्स की तरह कोई दूसरा उनकी पूरी हालत) तुम्हें बता नहीं सकता
15۞ يَا أَيُّهَا النَّاسُ أَنتُمُ الْفُقَرَاءُ إِلَى اللَّهِ ۖ وَاللَّهُ هُوَ الْغَنِيُّ الْحَمِيدُ
लोगों तुम सब के सब खुदा के (हर वक्त) मोहताज हो और (सिर्फ) खुदा ही (सबसे) बेपरवा सज़ावारे हम्द (व सना) है
16إِن يَشَأْ يُذْهِبْكُمْ وَيَأْتِ بِخَلْقٍ جَدِيدٍ
अगर वह चाहे तो तुम लोगों को (अदम के पर्दे में) ले जाए और एक नयी ख़िलक़त ला बसाए
17وَمَا ذَٰلِكَ عَلَى اللَّهِ بِعَزِيزٍ
और ये कुछ खुदा के वास्ते दुशवार नहीं
18وَلَا تَزِرُ وَازِرَةٌ وِزْرَ أُخْرَىٰ ۚ وَإِن تَدْعُ مُثْقَلَةٌ إِلَىٰ حِمْلِهَا لَا يُحْمَلْ مِنْهُ شَيْءٌ وَلَوْ كَانَ ذَا قُرْبَىٰ ۗ إِنَّمَا تُنذِرُ الَّذِينَ يَخْشَوْنَ رَبَّهُم بِالْغَيْبِ وَأَقَامُوا الصَّلَاةَ ۚ وَمَن تَزَكَّىٰ فَإِنَّمَا يَتَزَكَّىٰ لِنَفْسِهِ ۚ وَإِلَى اللَّهِ الْمَصِيرُ
और याद रहे कि कोई शख्स किसी दूसरे (के गुनाह) का बोझ नहीं उठाएगा और अगर कोई (अपने गुनाहों का) भारी बोझ उठाने वाला अपना बोझ उठाने के वास्ते (किसी को) बुलाएगा तो उसके बारे में से कुछ भी उठाया न जाएगा अगरचे (कोई किसी का) कराबतदार ही (क्यों न) हो (ऐ रसूल) तुम तो बस उन्हीं लोगों को डरा सकते हो जो बे देखे भाले अपने परवरदिगार का ख़ौफ रखते हैं और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ते हैं और (याद रखो कि) जो शख्स पाक साफ रहता है वह अपने ही फ़ायदे के वास्ते पाक साफ रहता है और (आख़िरकार सबको हिरफिर के) खुदा ही की तरफ जाना है
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अनुवाद — फातिर 16

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सूरा आयत 16/45 — फातिर فاطر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: फातिर सुनें, फातिर अनुवाद, फातिर mp3, फातिर pdf. आयत 14–18. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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