फातिर · 21/45
अनुवाद उच्चारण — फातिर
وَلَا الظِّلُّ وَلَا الْحَرُورُ ۝٢١
Wa laz zillu wa lal haroor
📖 हिंदी अर्थ
और न छाँव (बेहिश्त) और धूप (दोज़ख़ बराबर है)
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الظِّلّ (ज़िल्ल): छाया, यहाँ अर्थ है जन्नत।
  • الْحَرُور (हरूर): तेज़ गर्म हवा, यहाँ अर्थ है जहन्नम (नरक)।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में मोमिनों और काफ़िरों के बीच के फ़र्क़ को बयान कर रहे हैं। जिस तरह अंधा और आँखों वाला, अंधेरा और उजाला, छाया और तेज़ गर्म हवा कभी बराबर नहीं हो सकते, उसी तरह ईमान वालों और कुफ़्र वालों का अंजाम भी कभी एक नहीं हो सकता।

छाया (जन्नत) में ठंडक, सुकून और राहत है, जबकि हरूर (जहन्नम) में जलती हुई गर्मी, तकलीफ़ और अज़ाब है। ये दोनों कभी एक जैसे नहीं हो सकते। यही हाल ईमान और कुफ़्र का है—ईमान दिल को रौशनी, सुकून और ज़िंदगी देता है, जबकि कुफ़्र दिल को अंधेरे, बेचैनी और मौत में डाल देता है।

अल्लाह तआला ने अपने रसूल ﷺ को हक़ (सच्चाई) के साथ भेजा, ताकि वे लोगों को जन्नत की ख़ुशख़बरी दें और जहन्नम के अज़ाब से डराएँ। जो लोग इस हक़ को क़बूल कर लेंगे, वे जन्नत की ठंडी छाया में आराम करेंगे, और जो इनकार करेंगे, वे हरूर (जहन्नम की गर्मी) में जलेंगे।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपने जीवन में किस रास्ते को चुन रहे हैं। क्या हम जन्नत की ठंडी छाया चाहते हैं या जहन्नम की जलती हुई गर्मी? अल्लाह ने हमें अक्ल और समझ दी है, और अपने रसूल ﷺ के ज़रिए सच्चा रास्ता दिखाया है। यह बड़ी रहमत है कि हमारे पास अभी भी मौका है कि हम अपने दिलों को ईमान की रौशनी से रोशन करें, अच्छे काम करें और अल्लाह की रहमत के साये में जन्नत की ठंडक हासिल करें। अल्लाह की रहमत के दरवाज़े हमेशा खुले हैं—बस ज़रूरत है सच्चे दिल से उसकी तरफ़ रुजू करने की।

🎧 सुनें

📜 आयत 19-23 — फातिर

19وَمَا يَسْتَوِي الْأَعْمَىٰ وَالْبَصِيرُ
और अन्धा (क़ाफिर) और ऑंखों वाला (मोमिन किसी तरह) बराबर नहीं हो सकते
20وَلَا الظُّلُمَاتُ وَلَا النُّورُ
और न अंधेरा (कुफ्र) और उजाला (ईमान) बराबर है
21وَلَا الظِّلُّ وَلَا الْحَرُورُ
और न छाँव (बेहिश्त) और धूप (दोज़ख़ बराबर है)
22وَمَا يَسْتَوِي الْأَحْيَاءُ وَلَا الْأَمْوَاتُ ۚ إِنَّ اللَّهَ يُسْمِعُ مَن يَشَاءُ ۖ وَمَا أَنتَ بِمُسْمِعٍ مَّن فِي الْقُبُورِ
और न ज़िन्दे (मोमिनीन) और न मुर्दें (क़ाफिर) बराबर हो सकते हैं और खुदा जिसे चाहता है अच्छी तरह सुना (समझा) देता है और (ऐ रसूल) जो (कुफ्फ़ार मुर्दों की तरह) क़ब्रों में हैं उन्हें तुम अपनी (बातें) नहीं समझा सकते हो
23إِنْ أَنتَ إِلَّا نَذِيرٌ
तुम तो बस (एक खुदा से) डराने वाले हो
फातिरकुरान सूची
45आयत
मक्कीRevelation
21आयत

अनुवाद — फातिर 21

सूरा फातिर आयत 21 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और न छाँव (बेहिश्त) और धूप (दोज़ख़ बराबर है)

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Tuesday, August 18, 2026

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