फातिर · 27/45
अनुवाद उच्चारण — फातिर
أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ أَنزَلَ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَأَخْرَجْنَا بِهِ ثَمَرَاتٍ مُّخْتَلِفًا أَلْوَانُهَا ۚ وَمِنَ الْجِبَالِ جُدَدٌ بِيضٌ وَحُمْرٌ مُّخْتَلِفٌ أَلْوَانُهَا وَغَرَابِيبُ سُودٌ ۝٢٧
Alam tara annal laaha anzala minas samaaa`i maaa`an fa akhrajnaa bihee samaraatim mukhtalifan alwaanuhaa; wa minal jibaali judadum beedunw wa humrum mukhtalifun alwaanuhaa wa gharaabeebu sood
📖 हिंदी अर्थ
अब क्या तुमने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि यक़ीनन खुदा ही ने आसमान से पानी बरसाया फिर हम (खुदा) ने उसके ज़रिए से तरह-तरह की रंगतों के फल पैदा किए और पहाड़ों में क़तआत (टुकड़े रास्ते) हैं जिनके रंग मुख़तलिफ है कुछ तो सफेद (बुर्राक़) और कुछ लाल (लाल) और कुछ बिल्कुल काले सियाह
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • جُدَدٌ (जुदद): पहाड़ों में बनी राहें, रेखाएँ या धारियाँ।
  • بِيضٌ (बीज़): सफेद रंग की।
  • حُمْرٌ (हुम्र): लाल रंग की।
  • غَرَابِيبُ (ग़राबीब): अत्यधिक काले रंग की (कौवे के रंग जैसी)।

तफ़सीर (व्याख्या):

क्या तुमने कभी अपनी आँखों से नहीं देखा और अपने दिल से नहीं सोचा कि अल्लाह ने आसमान से पानी बरसाया? फिर उसी पानी के ज़रिए हमने ज़मीन से तरह-तरह के फल उगाए, जिनके रंग अलग-अलग हैं – कोई लाल, कोई पीला, कोई हरा, कोई काला। यह विविधता उसी एक पानी से पैदा होती है, जो अल्लाह की कुदरत का अद्भुत नमूना है। इसी तरह, अल्लाह ने पहाड़ों में भी अलग-अलग रंगों की धारियाँ और राहें बनाईं – कुछ सफेद, कुछ लाल, और कुछ ऐसी काली जो कौवे के रंग जैसी दिखती हैं। यह सब उसी एक ख़ाक (मिट्टी) और चट्टानों से बना है, लेकिन रंगों में इतना फर्क है।

यह आयत हमें अल्लाह की कुदरत पर ग़ौर करने की दावत देती है। जब हम फलों के रंग, पहाड़ों की बनावट और उनकी खूबसूरती को देखते हैं, तो हमें यकीन होता है कि यह सब किसी अंधी प्रकृति का काम नहीं, बल्कि उस हकीम (बुद्धिमान) और कादिर (सर्वशक्तिमान) अल्लाह की रचना है जो हर चीज़ पर क़ादिर है। यह विविधता हमें सिखाती है कि जिस तरह पानी से अलग-अलग रंग के फल निकलते हैं, उसी तरह अल्लाह की रहमत से लोगों के दिल भी अलग-अलग होते हैं – कोई ईमान की रोशनी से रौशन होता है, कोई ग़फ़लत में रहता है।

इस आयत में हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम अपने आस-पास की चीज़ों को सिर्फ़ देखें नहीं, बल्कि उन पर सोचें। जो इंसान इन निशानियों पर ग़ौर करता है, उसका ईमान मज़बूत होता है और वह अल्लाह की बड़ाई का एहसास करता है। अल्लाह ने यह सब कुछ हमारे लिए बनाया है ताकि हम उसका शुक्र अदा करें और उसकी इबादत में लगे रहें। याद रखो, यह रंग-बिरंगी दुनिया एक दिन ख़त्म हो जाएगी, लेकिन अल्लाह की रहमत और उसकी जन्नत हमेशा रहने वाली है। तो आओ, हम इस कुदरत के नज़ारों से सबक़ लें और अपने रब की तरफ़ रुजू करें, क्योंकि वही सबसे बड़ा रचनाकार और मेहरबान है।

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📜 आयत 25-29 — फातिर

25وَإِن يُكَذِّبُوكَ فَقَدْ كَذَّبَ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ جَاءَتْهُمْ رُسُلُهُم بِالْبَيِّنَاتِ وَبِالزُّبُرِ وَبِالْكِتَابِ الْمُنِيرِ
ऐसी नहीं गुज़री कि उसके पास (हमारा) डराने वाला पैग़म्बर न आया हो और अगर ये लोग तुम्हें झुठलाएँ तो कुछ परवाह नहीं करो क्योंकि इनके अगलों ने भी (अपने पैग़म्बरों को) झुठलाया है (हालाँकि) उनके पास उनके पैग़म्बर वाज़ेए व रौशन मौजिजे अौर सहीफ़े और रौशन किताब लेकर आए थे
26ثُمَّ أَخَذْتُ الَّذِينَ كَفَرُوا ۖ فَكَيْفَ كَانَ نَكِيرِ
फिर हमने उन लोगों को जो काफ़िर हो बैठे ले डाला तो (तुमने देखाकि) मेरा अज़ाब (उन पर) कैसा (सख्त हुआ
27أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ أَنزَلَ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَأَخْرَجْنَا بِهِ ثَمَرَاتٍ مُّخْتَلِفًا أَلْوَانُهَا ۚ وَمِنَ الْجِبَالِ جُدَدٌ بِيضٌ وَحُمْرٌ مُّخْتَلِفٌ أَلْوَانُهَا وَغَرَابِيبُ سُودٌ
अब क्या तुमने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि यक़ीनन खुदा ही ने आसमान से पानी बरसाया फिर हम (खुदा) ने उसके ज़रिए से तरह-तरह की रंगतों के फल पैदा किए और पहाड़ों में क़तआत (टुकड़े रास्ते) हैं जिनके रंग मुख़तलिफ है कुछ तो सफेद (बुर्राक़) और कुछ लाल (लाल) और कुछ बिल्कुल काले सियाह
28وَمِنَ النَّاسِ وَالدَّوَابِّ وَالْأَنْعَامِ مُخْتَلِفٌ أَلْوَانُهُ كَذَٰلِكَ ۗ إِنَّمَا يَخْشَى اللَّهَ مِنْ عِبَادِهِ الْعُلَمَاءُ ۗ إِنَّ اللَّهَ عَزِيزٌ غَفُورٌ
और इसी तरह आदमियों और जानवरों और चारपायों की भी रंगते तरह-तरह की हैं उसके बन्दों में ख़ुदा का ख़ौफ करने वाले तो बस उलेमा हैं बेशक खुदा (सबसे) ग़ालिब और बख्शने वाला है
29إِنَّ الَّذِينَ يَتْلُونَ كِتَابَ اللَّهِ وَأَقَامُوا الصَّلَاةَ وَأَنفَقُوا مِمَّا رَزَقْنَاهُمْ سِرًّا وَعَلَانِيَةً يَرْجُونَ تِجَارَةً لَّن تَبُورَ
बेशक जो लोग Âुदा की किताब पढ़ा करते हैं और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ते हैं और जो कुछ हमने उन्हें अता किया है उसमें से छिपा के और दिखा के (खुदा की राह में) देते हैं वह यक़ीनन ऐसे व्यापार का आसरा रखते हैं
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Tuesday, August 18, 2026

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